'वंदे मातरम' विवाद: सोनिया गांधी पर NDA का हमला, जयंत चौधरी से मनीषा कायंदे तक ने माफी की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
सोमवार, 17 अगस्त को एआईसीसी मुख्यालय में 'वंदे मातरम' के गायन के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की कथित प्रतिक्रिया को लेकर सियासी विवाद तेज़ हो गया। एनडीए नेताओं ने एकजुट होकर कहा कि राष्ट्रीय गीत का अपमान देश का अपमान है और कांग्रेस नेतृत्व को तत्काल माफी मांगनी चाहिए।
मुख्य घटनाक्रम
एक वायरल वीडियो के सामने आने के बाद यह विवाद भड़का, जिसमें कथित तौर पर कांग्रेस मुख्यालय में 'वंदे मातरम' गायन के दौरान इसे रोकने का प्रयास दिखाया गया है। भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने इस वीडियो का हवाला देते हुए कहा, 'हम सबने वह वीडियो देखा है जिसमें कांग्रेस हेडक्वार्टर में 'वंदे मातरम' का अनादर और अपमान होते हुए दिखाया गया है। चाहे 'वंदे मातरम' हो या हमारा राष्ट्रगान 'जन गण मन', जब भी ये बजते या गाए जाते हैं, तो तुरंत खड़े होना जरूरी होता है।'
उन्होंने आगे कहा, 'सोनिया गांधी ने जो किया, वह 'वंदे मातरम' का सीधा अपमान है।' यह ऐसे समय में आया है जब स्वतंत्रता दिवस के ठीक बाद देशभक्ति की भावनाएँ चरम पर होती हैं।
विभिन्न नेताओं की प्रतिक्रिया
कोलकाता में केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा, 'हर किसी को 'वंदे मातरम' के बारे में संसद द्वारा पारित कानून का सम्मान करना चाहिए और इसके प्रति लोगों की भावनाओं का आदर करना चाहिए। मुझे समझ नहीं आता कि सोनिया गांधी ने ऐसा क्यों किया।'
हैदराबाद में तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने कहा, 'पूरे देश में सोनिया गांधी के 'वंदे मातरम' गाए जाने के दौरान किए गए व्यवहार की निंदा हो रही है। यह बात टीवी स्क्रीन पर दिखी और देश में हर किसी ने इसे देखा।' उन्होंने माँग की कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे — तीनों देश से माफी माँगें।
मुंबई में शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने इस घटना को अपराध की संज्ञा दी। उन्होंने कहा, 'यह गलत है। यह एक अपराध है। उनके खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए क्योंकि 'वंदे मातरम' हमारा देशभक्तिपूर्ण राष्ट्रीय गीत है।'
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, 'मैंने यह देखा और मुझे यह अजीब लगा। ऐसे समय में जब आपको सावधान की मुद्रा में खड़े होना चाहिए, तब गाना रोकने के लिए कहा जा रहा था।'
ऐतिहासिक संदर्भ और भाजपा का तर्क
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी. आर. केसवन ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा, 'पूरा 'वंदे मातरम' गाने से रोकने की कोशिश करके सोनिया गांधी ने जो गंभीर गलती की है, वह एक ऐसी हरकत है जिसका कोई बचाव नहीं किया जा सकता।' उन्होंने यह भी कहा कि 1905 में ब्रिटिश शासन ने 'वंदे मातरम' को सार्वजनिक रूप से गाने पर प्रतिबंध लगाया था और इसे अपराध घोषित किया था। उनके अनुसार, आज कांग्रेस की सोच उसी दिशा में जाती दिख रही है।
गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' को 1950 में भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला था और यह स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक रहा है। यह पहली बार नहीं है जब इस गीत को लेकर राजनीतिक विवाद उठा हो।
आम जनता और कांग्रेस पर असर
एनडीए नेताओं के अनुसार, यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ और व्यापक जनाक्रोश का कारण बना। हालाँकि, कांग्रेस की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
क्या होगा आगे
विपक्षी दलों के नेताओं की माफी की माँग और कानूनी कार्रवाई की बात के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा राष्ट्रवाद की राजनीति के नज़रिए से आगामी चुनावी चर्चाओं में भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।