पायलट स्मिता मच्छार की बहादुरी पर कशिश वारसी बोले — '100 से अधिक यात्रियों की जान बचाई, देश का सिर ऊँचा किया'
सारांश
मुख्य बातें
सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कशिश वारसी ने 1 अक्टूबर 2026 को मुरादाबाद में इजरायल से जुड़े विमान प्रकरण में भारतीय मूल की पायलट स्मिता मच्छार की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर 100 से अधिक यात्रियों की जान बचाई और देश का मान बढ़ाया। वारसी ने पायलट को 'हीरो' करार देते हुए घटनाक्रम की निष्पक्ष जाँच की भी माँग की।
पायलट की भूमिका और साहस
कशिश वारसी ने कहा कि इस विमान प्रकरण में स्मिता मच्छार ने असाधारण साहस का परिचय दिया। उनके अनुसार, पायलट ने विषम परिस्थितियों में भी यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा और बिना अपनी जान की परवाह किए अपनी ज़िम्मेदारी निभाई। वारसी ने कहा कि ऐसे साहस के लिए पायलट को पूरे देश की बधाई मिलनी चाहिए।
जाँच की माँग और अफ़वाहों से दूरी
वारसी ने यह भी स्पष्ट किया कि विमान के भीतर कथित तौर पर हुई चाकूबाज़ी की सच्चाई अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है। उनके अनुसार, इस समय विमान के अंदर की घटनाओं की पूरी जानकारी किसी के पास नहीं है, इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं होगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपुष्ट खबरों और अफ़वाहों पर भरोसा करने के बजाय तथ्य सामने आने का इंतज़ार करें। घटना के लिए जो भी ज़िम्मेदार पाया जाए, उसके विरुद्ध उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
सपा पर मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर निशाना
वारसी ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी राज्यसभा प्रतिनिधित्व के मसले पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अपनी पहचान मुस्लिम समुदाय की आवाज़ के रूप में बताती है, लेकिन राज्यसभा के लिए मुस्लिम समुदाय से किसी व्यक्ति को टिकट नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मुरादाबाद के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन का नाम राज्यसभा के लिए स्वाभाविक विकल्प था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
वारसी के अनुसार, सपा ने एक कारोबारी को राज्यसभा भेजकर यह संदेश दे दिया कि पार्टी पूँजीपतियों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज का उपयोग केवल चुनावी ज़रूरत के समय किया जाता है और उसे 'तेजपत्ते की तरह' इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
मुरादाबाद में निराशा और राजनीतिक भागीदारी का सवाल
वारसी ने कहा कि मुरादाबाद के मुस्लिम नेतृत्व और डॉ. एसटी हसन के समर्थकों में सपा के इस फैसले से मायूसी है। उनके अनुसार, राज्यसभा प्रतिनिधित्व का यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है — यह राजनीतिक भागीदारी और समुदाय के समग्र प्रतिनिधित्व का प्रश्न है। उन्होंने सपा नेतृत्व से अपील की कि वह मुस्लिम समाज को वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने पर गंभीरता से विचार करे।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के मुस्लिम वोटबैंक को लेकर आंतरिक तनाव सार्वजनिक होते जा रहे हैं। वारसी की माँग आगे चलकर सपा के लिए राजनीतिक दबाव का कारण बन सकती है।