कैप्टन स्मित मच्छार: घायल होकर भी बचाई 174 जानें, मुंबई के पड़ोसियों को नाज़
सारांश
मुख्य बातें
फ्लाईदुबई के पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने घायल अवस्था में अपनी असाधारण सूझबूझ से 174 यात्रियों की जान बचाकर पूरे विश्व का दिल जीत लिया है। मुंबई में उनके पड़ोसियों से हुई बातचीत में जो भावनाएँ उभरीं, वे इस बहादुर अधिकारी की इंसानी छवि को और गहरा करती हैं।
पड़ोसियों की ज़ुबानी — गर्व और प्रार्थना
कैप्टन मच्छार के पड़ोसी प्रतीक ने बताया, 'हम उन्हें बचपन से जानते हैं। पिछले 10 सालों में हमारा ज़्यादा संपर्क नहीं रहा, लेकिन वे अब भी हमारे अच्छे दोस्त हैं। हम उन्हें शुभकामनाएँ देते हैं और उनके सुरक्षित लौटने की कामना करते हैं।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'हमें गर्व है कि हमारी ही बिल्डिंग में पले-बढ़े एक इंसान ने इतने नेक काम में योगदान दिया और उस कठिन पल में 174 लोगों की जान बचाई।'
बिल्डिंग की एक महिला पड़ोसी ने कहा, 'वह सच में एक बहादुर अधिकारी हैं — उन्हें सलाम। उम्मीद है कि वह जल्द सुरक्षित और ठीक होंगे। वह बहुत अच्छे और विनम्र इंसान हैं।'
सुबह अखबार से मिली खबर, फिर उमड़ी दुआएँ
एक अन्य पड़ोसी ने बताया, '1 अक्टूबर की सुबह अखबार पढ़ने से जानकारी हुई। उन्होंने बहुत अच्छा काम किया — भगवान से प्रार्थना है कि वह जल्द स्वस्थ हों।' एक और निवासी ने कहा, 'स्मित मच्छार ने जिस तरह का काम किया, वह हम सबके लिए गर्व की बात है। वे जल्द ठीक होकर वापस आएँ, हम उनका भव्य स्वागत करने वाले हैं। वे बहुत शांत स्वभाव के हैं और हमेशा सबकी मदद को तैयार रहते हैं।'
पूरी सोसाइटी को नाज़, परिवार दुबई रवाना
बिल्डिंग के एक निवासी ने कहा, 'उनकी बहादुरी को शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता। पूरी बिल्डिंग को उन पर गर्व है।' एक अन्य निवासी ने बताया, 'यह पूरी सोसाइटी के लिए गर्व का पल है। विश्व के कई नेताओं ने उनकी तारीफ की है। हम खुश हैं कि वे हम लोगों में से एक हैं।' उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कैप्टन मच्छार के परिवार के सदस्य दुबई रवाना हो गए हैं।
घायल अवस्था में भी नहीं डिगा हौसला
गौरतलब है कि कैप्टन स्मित मच्छार ने विपरीत परिस्थितियों में — स्वयं घायल होने के बावजूद — विमान को सुरक्षित उतारकर सवार 174 यात्रियों की जान बचाई। यह घटना इस बात की मिसाल है कि प्रशिक्षण, अनुभव और मानसिक दृढ़ता किस तरह आपातकाल में जीवनदायी साबित होती है। उनकी इस वीरता की सराहना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है, जिससे भारत का सिर गर्व से ऊँचा हुआ है।
मुंबई के जिस इलाके में वे पले-बढ़े, वहाँ आज उनके जल्द स्वस्थ होने और भव्य स्वागत की तैयारी की बातें हो रही हैं — यह बताता है कि असली नायक समाज की जड़ों से ही उगते हैं।