4 अक्टूबर 2026
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कैप्टन स्मित मच्छार का खुलासा: 'मेरे अंदर एक आखिरी कोशिश की ताकत बची थी', नेतन्याहू ने बताया दुनिया का हीरो

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कैप्टन स्मित मच्छार का खुलासा: 'मेरे अंदर एक आखिरी कोशिश की ताकत बची थी', नेतन्याहू ने बताया दुनिया का हीरो

सारांश

घायल, अर्ध-बेहोश, फर्श पर गिरे — फिर भी कैप्टन स्मित मच्छार ने आखिरी ताकत से कॉकपिट का दरवाजा खोला और सैकड़ों जानें बचाईं। यरूशलम में नेतन्याहू ने उन्हें 'इजरायल, भारत और पूरी दुनिया का हीरो' बताते हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने का न्योता दिया।

मुख्य बातें

कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया कि को-पायलट ने प्रार्थना के दौरान उनके सिर पर पीछे से जानलेवा वार किए।
शुरुआती हमलों से दृष्टि बुरी तरह प्रभावित होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर हालात काबू में कराए।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यरूशलम में कैप्टन मच्छार से मुलाकात की और उन्हें 'इजरायल, भारत और पूरी दुनिया का हीरो' कहा।
नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया।
कैप्टन मच्छार फिलहाल गंभीर चोटों से उबर रहे हैं; नेतन्याहू ने जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

इजरायल की ओर जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान को कथित तौर पर कब्जे में लेने की कोशिश को नाकाम करने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने 4 अक्टूबर 2026 को कॉकपिट के अंदर के उन भयावह पलों का विस्तृत विवरण साझा किया, जब उनके को-पायलट ने अचानक उन पर जानलेवा हमला कर दिया। यरूशलम में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से हुई मुलाकात के दौरान कैप्टन मच्छार ने यह पूरी दास्तान सुनाई। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस दिखाते हुए सैकड़ों यात्रियों की जान बचाई।

उड़ान की सामान्य शुरुआत और अचानक हमला

कैप्टन मच्छार के अनुसार, उड़ान की शुरुआत पूरी तरह सामान्य थी। वह कॉकपिट में सामने की ओर देख रहे थे जबकि उनका को-पायलट प्रार्थना कर रहा था। मच्छार ने बताया, 'उसने मुझसे कहा था कि वह प्रार्थना करना चाहता है। स्थानीय यात्रियों और क्रू मेंबर्स के बीच ऐसा करना आम बात है, इसलिए मैंने सम्मानवश पीछे देखने के बजाय सामने की ओर देखते रहना उचित समझा।'

उन्होंने बताया, 'करीब चार-पाँच मिनट बाद अचानक मेरे सिर के पीछे बहुत ज़ोर से वार हुआ।' पहले पल में उन्हें लगा कि विमान को कोई बड़ी तकनीकी क्षति पहुँची है।

हमले का एहसास और दृष्टि का प्रभावित होना

कैप्टन मच्छार ने बताया, 'मुझे सबसे पहले लगा कि विमान को कोई बड़ा नुकसान हुआ है। इसके बाद एक के बाद एक वार होते रहे और तभी मुझे एहसास हुआ कि समस्या विमान में नहीं, बल्कि मेरे साथ कॉकपिट में मौजूद दूसरा व्यक्ति मुझ पर हमला कर रहा है।' शुरुआती वारों की वजह से उनकी नजर बुरी तरह प्रभावित हो गई और उन्हें साफ दिखाई देना बंद हो गया।

उन्होंने बताया कि उस समय विमान बेहद तेज़ी से नीचे जा रहा था। उन्होंने स्वीकार किया कि उस वक्त की कई यादें अभी भी टुकड़ों में हैं और पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।

आखिरी ताकत से दरवाजा खोलने की जद्दोजहद

कैप्टन मच्छार ने बताया कि उन्होंने एक बार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता पाई, लेकिन हमलावर ने उसे फिर बंद कर दिया। इसके बाद वह कॉकपिट के फर्श पर गिर पड़े। चारों ओर यात्रियों की चीखें सुनाई दे रही थीं और विमान की तेज आवाज़ से वातावरण भयावह हो चुका था।

उन्होंने कहा, 'मेरे अंदर एक आखिरी कोशिश की ताकत बची थी। इसे आप अपने लिए कहें या लोगों के लिए — मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि अगर मैं कुछ नहीं करता, तो मेरी मौत तय थी। तभी मैंने पूरी ताकत लगा दी। मेरे अंदर जितनी भी ताकत बची थी, मैंने सब लगा दी और दरवाजे तक पहुँचकर उसे खोल दिया।'

उन्होंने बताया कि दरवाजा खुलते ही बाहर तैयार खड़े लोगों ने तुरंत कार्रवाई की और हालात को काबू में ले लिया।

नेतन्याहू की तारीफ और ऐतिहासिक आमंत्रण

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार की बात सुनकर उनके साहस की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। नेतन्याहू ने कहा, 'मैं आपके साहस और इतने मुश्किल हालात में भी शांत रहकर सही फैसला लेने की आपकी क्षमता से हैरान हूँ।'

नेतन्याहू ने कहा, 'आपने इतनी सारी जानें बचाईं। आपने दुनिया में यह भरोसा जगाया कि एक बहादुर पायलट और बहादुर यात्री इस बुराई का सामना कर सकते हैं, चाहे वह कितनी भी खतरनाक और हिंसक क्यों न हो।' उन्होंने आगे कहा, 'आप इजरायल के हीरो हैं। आप भारत के हीरो हैं। आप पूरी दुनिया के हीरो हैं।'

नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने अपनी पत्नी की ओर से पायलट की पत्नी को शुभकामनाएं भी भेजीं और जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

आगे क्या होगा

गंभीर रूप से घायल कैप्टन मच्छार फिलहाल स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया में हैं। नेतन्याहू ने उनसे जल्द इजरायल दौरे की उम्मीद जताई और कहा कि यह यात्रा 'यादगार और ऐतिहासिक' होगी। इस घटना ने विमानन सुरक्षा, को-पायलट की जाँच प्रक्रिया और कॉकपिट सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैप्टन स्मित मच्छार कौन हैं और उन्होंने क्या किया?
कैप्टन स्मित मच्छार फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट हैं, जिन्होंने इजरायल जा रही उड़ान को को-पायलट के हमले के बाद कब्जे में जाने से बचाया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी आखिरी ताकत लगाकर कॉकपिट का दरवाजा खोला और बाहर मौजूद क्रू को हालात काबू में लेने का मौका दिया।
फ्लाईदुबई की उड़ान में को-पायलट ने हमला क्यों किया?
स्रोत में को-पायलट के हमले के कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। कैप्टन मच्छार के अनुसार को-पायलट प्रार्थना कर रहा था, और तभी अचानक उन्होंने पीछे से हमला कर दिया। जाँच एजेंसियाँ इस घटना की पूरी परिस्थितियों की जाँच कर रही हैं।
नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार को क्या आमंत्रण दिया?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया है। नेतन्याहू ने उन्हें 'इजरायल, भारत और पूरी दुनिया का हीरो' बताया।
कैप्टन मच्छार ने घायल अवस्था में कॉकपिट का दरवाजा कैसे खोला?
कैप्टन मच्छार के अनुसार हमले से उनकी दृष्टि बुरी तरह प्रभावित हो गई थी और वह कॉकपिट के फर्श पर गिरे हुए थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक बार दरवाजा खोला था, लेकिन हमलावर ने उसे बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी शेष सारी ताकत लगाकर दोबारा दरवाजा खोला, जिससे बाहर तैयार खड़े क्रू ने तुरंत स्थिति पर काबू पाया।
इस घटना का विमानन सुरक्षा पर क्या असर पड़ सकता है?
यह घटना कॉकपिट सुरक्षा प्रोटोकॉल और को-पायलट की मनोवैज्ञानिक जाँच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियामकों को इस घटना के मद्देनज़र कॉकपिट सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा करनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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