गौतमबुद्ध नगर में 'नो पीयूसी, नो पेट्रोल' लागू: बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के अब नहीं मिलेगा ईंधन
सारांश
मुख्य बातें
गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में 1 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) से 'नो पीयूसी, नो पेट्रोल' व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू कर दी गई है, जिसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के बिना किसी भी वाहन को ईंधन नहीं दिया जाएगा। सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
नई व्यवस्था के अंतर्गत पेट्रोल पंप कर्मी खाद्य एवं रसद विभाग की ऐप के माध्यम से वाहन का पीयूसी स्टेटस जाँचते हैं और वैध प्रमाणपत्र की पुष्टि होने पर ही ईंधन भरने की अनुमति देते हैं। यदि किसी वाहन का प्रमाणपत्र अनुपस्थित है या उसकी वैधता समाप्त हो चुकी है, तो चालक को तत्काल ईंधन देने से मना कर दिया जाता है और उन्हें नया पीयूसी बनवाने की सलाह दी जाती है।
पेट्रोल पंप कर्मियों के अनुसार, पहले दिन से ही यह जाँच प्रक्रिया पूरी सक्रियता से शुरू की गई। वाहन चालक के पहुँचने पर उसके वाहन का पंजीकरण नंबर ऐप में दर्ज किया जाता है और उसकी पीयूसी स्थिति तत्काल स्क्रीन पर देखी जाती है।
तकनीकी दिक्कतें भी आईं सामने
पहले दिन क्रियान्वयन के दौरान ऐप में तकनीकी खामियाँ भी सामने आईं। कर्मचारियों के अनुसार, कई बार वाहन की जानकारी या पीयूसी की स्थिति ऐप पर तत्काल प्रदर्शित नहीं हो रही थी। ऐसी स्थिति में चालक से मौखिक जानकारी ली गई और उपलब्ध आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ऐप की कार्यप्रणाली और अधिक सुचारू होगी।
पुराने वाहनों पर भी विशेष नज़र
यह अभियान केवल पीयूसी जाँच तक सीमित नहीं है। इस व्यवस्था के तहत 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। पुराने वाहन अधिक उत्सर्जन करते हैं और सर्दियों में वायु गुणवत्ता को सर्वाधिक प्रभावित करते हैं; इसीलिए इन पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
आम जनता पर असर
गौतमबुद्ध नगर के वाहन चालकों को अब अपने वाहन का वैध पीयूसी प्रमाणपत्र हर समय साथ रखना आवश्यक होगा। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-एनसीआर में हर सर्दी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर तक पहुँच जाता है और वाहनों से होने वाला उत्सर्जन प्रमुख कारणों में गिना जाता है। जिन वाहन चालकों का प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है, उन्हें सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी नज़दीकी अधिकृत केंद्र पर जाकर समय रहते नया पीयूसी बनवा लें।
क्या होगा आगे
अधिकारियों का ध्यान प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ नियमों के प्रभावी अनुपालन पर केंद्रित है। गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई प्रतिबंध लगाए जाते हैं; 'नो पीयूसी, नो पेट्रोल' उसी श्रृंखला का एक अग्रिम कदम है। ऐप-आधारित निगरानी के और परिष्कृत होने के साथ आने वाले सप्ताहों में इस व्यवस्था की प्रभावशीलता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।