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गौतमबुद्ध नगर में 'नो पीयूसी, नो पेट्रोल' लागू: बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के अब नहीं मिलेगा ईंधन

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गौतमबुद्ध नगर में 'नो पीयूसी, नो पेट्रोल' लागू: बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के अब नहीं मिलेगा ईंधन

सारांश

सर्दियों से पहले ही गौतमबुद्ध नगर ने कड़ा रुख अपनाया — 1 अक्टूबर से बिना वैध पीयूसी के पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिलेगा। खाद्य एवं रसद विभाग की ऐप से जाँच होगी और 10 साल पुराने डीजल व 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर भी नज़र रहेगी।

मुख्य बातें

गौतमबुद्ध नगर में 1 अक्टूबर 2026 से 'नो पीयूसी, नो पेट्रोल' व्यवस्था प्रभावी।
वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के बिना किसी भी वाहन को ईंधन देने से मना किया जाएगा।
खाद्य एवं रसद विभाग की ऐप के ज़रिये पेट्रोल पंप कर्मी वाहन का पीयूसी स्टेटस तत्काल जाँचते हैं।
10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर अतिरिक्त निगरानी का प्रावधान।
पहले दिन ऐप में तकनीकी खामियाँ सामने आईं; अधिकारियों ने जल्द सुधार का भरोसा दिलाया।

गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में 1 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) से 'नो पीयूसी, नो पेट्रोल' व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू कर दी गई है, जिसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के बिना किसी भी वाहन को ईंधन नहीं दिया जाएगा। सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

नई व्यवस्था के अंतर्गत पेट्रोल पंप कर्मी खाद्य एवं रसद विभाग की ऐप के माध्यम से वाहन का पीयूसी स्टेटस जाँचते हैं और वैध प्रमाणपत्र की पुष्टि होने पर ही ईंधन भरने की अनुमति देते हैं। यदि किसी वाहन का प्रमाणपत्र अनुपस्थित है या उसकी वैधता समाप्त हो चुकी है, तो चालक को तत्काल ईंधन देने से मना कर दिया जाता है और उन्हें नया पीयूसी बनवाने की सलाह दी जाती है।

पेट्रोल पंप कर्मियों के अनुसार, पहले दिन से ही यह जाँच प्रक्रिया पूरी सक्रियता से शुरू की गई। वाहन चालक के पहुँचने पर उसके वाहन का पंजीकरण नंबर ऐप में दर्ज किया जाता है और उसकी पीयूसी स्थिति तत्काल स्क्रीन पर देखी जाती है।

तकनीकी दिक्कतें भी आईं सामने

पहले दिन क्रियान्वयन के दौरान ऐप में तकनीकी खामियाँ भी सामने आईं। कर्मचारियों के अनुसार, कई बार वाहन की जानकारी या पीयूसी की स्थिति ऐप पर तत्काल प्रदर्शित नहीं हो रही थी। ऐसी स्थिति में चालक से मौखिक जानकारी ली गई और उपलब्ध आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ऐप की कार्यप्रणाली और अधिक सुचारू होगी।

पुराने वाहनों पर भी विशेष नज़र

यह अभियान केवल पीयूसी जाँच तक सीमित नहीं है। इस व्यवस्था के तहत 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। पुराने वाहन अधिक उत्सर्जन करते हैं और सर्दियों में वायु गुणवत्ता को सर्वाधिक प्रभावित करते हैं; इसीलिए इन पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

आम जनता पर असर

गौतमबुद्ध नगर के वाहन चालकों को अब अपने वाहन का वैध पीयूसी प्रमाणपत्र हर समय साथ रखना आवश्यक होगा। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-एनसीआर में हर सर्दी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर तक पहुँच जाता है और वाहनों से होने वाला उत्सर्जन प्रमुख कारणों में गिना जाता है। जिन वाहन चालकों का प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है, उन्हें सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी नज़दीकी अधिकृत केंद्र पर जाकर समय रहते नया पीयूसी बनवा लें।

क्या होगा आगे

अधिकारियों का ध्यान प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ नियमों के प्रभावी अनुपालन पर केंद्रित है। गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई प्रतिबंध लगाए जाते हैं; 'नो पीयूसी, नो पेट्रोल' उसी श्रृंखला का एक अग्रिम कदम है। ऐप-आधारित निगरानी के और परिष्कृत होने के साथ आने वाले सप्ताहों में इस व्यवस्था की प्रभावशीलता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

नो पेट्रोल' एक सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन पहले ही दिन ऐप की तकनीकी विफलता यह सवाल उठाती है कि क्या बुनियादी ढाँचा इस नीति के अनुरूप तैयार है। दिल्ली-एनसीआर में हर सर्दी में वायु प्रदूषण आपातकाल बन जाता है, फिर भी वाहन उत्सर्जन नियंत्रण की यह कवायद हर साल उसी समय शुरू होती है जब हवा पहले से ज़हरीली हो चुकी होती है — प्रश्न यह है कि साल भर की निरंतर निगरानी क्यों नहीं होती। जब तक ऐप-आधारित प्रणाली त्रुटि-रहित और पारदर्शी नहीं बनती, तब तक अनुपालन मनमाना और असमान बना रहेगा।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'नो पीयूसी, नो पेट्रोल' व्यवस्था क्या है?
यह गौतमबुद्ध नगर में 1 अक्टूबर 2026 से लागू की गई व्यवस्था है, जिसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के बिना किसी भी वाहन को पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। इसका उद्देश्य सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
पेट्रोल पंप पर पीयूसी की जाँच कैसे होती है?
पेट्रोल पंप कर्मी खाद्य एवं रसद विभाग की ऐप में वाहन का पंजीकरण नंबर दर्ज कर उसका पीयूसी स्टेटस तुरंत देखते हैं। वैध प्रमाणपत्र होने पर ही ईंधन भरने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
यदि वाहन का पीयूसी नहीं है तो क्या होगा?
यदि वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र अनुपस्थित है या उसकी वैधता समाप्त हो चुकी है, तो वाहन चालक को ईंधन देने से मना कर दिया जाएगा। चालक को निकटतम अधिकृत केंद्र से नया पीयूसी बनवाने के बाद ही ईंधन मिल सकेगा।
क्या पुराने वाहनों पर कोई अतिरिक्त नियम है?
हाँ, इस अभियान में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। ऐसे वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए नियमों का सख्त पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
यह व्यवस्था क्यों लागू की गई है?
दिल्ली-एनसीआर में हर सर्दी में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर जाती है और वाहनों का उत्सर्जन इसके प्रमुख कारणों में शामिल है। गौतमबुद्ध नगर प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण के प्रारंभिक उपाय के रूप में यह व्यवस्था लागू की है।
राष्ट्र प्रेस
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