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एनसीआर में 1 अक्टूबर से ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ लागू, 2026 में प्रदूषण 35% तक घटाने का लक्ष्य

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एनसीआर में 1 अक्टूबर से ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ लागू, 2026 में प्रदूषण 35% तक घटाने का लक्ष्य

सारांश

एनसीआर की दमघोंटू हवा के खिलाफ यूपी सरकार ने अब तक का सबसे ठोस ब्लूप्रिंट पेश किया है — 1 अक्टूबर 2026 से ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’, 1,041 पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरे, 975 ई-बसें और 1,792 किमी सड़कों का पुनर्विकास। लक्ष्य है 2026 में प्रदूषण स्तर 30-35% तक नीचे लाना।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026 में एनसीआर का प्रदूषण 30-35% तक घटाने का लक्ष्य तय किया।
1 अक्टूबर 2026 से एनसीआर के 1,041 पेट्रोल पंपों पर ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ लागू, एएनपीआर कैमरों से निगरानी।
‘नया सफर’ के तहत 26.19 लाख ईओएल वाहन चिन्हित; जनवरी-अप्रैल 2026 में 37,156 स्क्रैप, 460 ज़ब्त।
गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में 975 इलेक्ट्रिक बसों का लक्ष्य; अभी सिर्फ 100 ई-बसें संचालित।
725 प्रदूषणकारी उद्योग चिन्हित; 613 में ओसीईएमएस लग चुका, सीपीसीबी सर्वर से जुड़ा।
1,792 किमी सड़कों के पुनर्विकास पर ₹3,666 करोड़ खर्च का अनुमान; अब तक 143.8 किमी पूरा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर निर्णायक कार्रवाई की रूपरेखा तय करते हुए वर्ष 2026 के दौरान प्रदूषण स्तर में 30 से 35 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी रणनीति के तहत 1 अक्टूबर 2026 से एनसीआर के सभी पेट्रोल पंपों पर ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था लागू होगी, जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) के बिना किसी भी वाहन को ईंधन नहीं मिलेगा।

मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक

मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में बुधवार को लखनऊ में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में एनसीआर की वायु गुणवत्ता सुधार से जुड़े सभी विभागों की कार्ययोजना का मूल्यांकन किया गया। गोयल ने अधिकारियों को समन्वित और परिणामोन्मुख कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि स्वच्छ हवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

बैठक में वाहन प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन, सड़क की धूल, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट, हरित आवरण विस्तार और पराली प्रबंधन जैसे प्रमुख स्रोतों पर विशेष फोकस रखने पर सहमति बनी। साथ ही व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर नागरिक भागीदारी बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया गया।

पुराने वाहनों पर शिकंजा

नया सफर’ योजना के तहत एनसीआर के चार जिलों में 26.19 लाख एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों की पहचान की जा चुकी है। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 37,156 पुराने वाहन स्क्रैप किए गए, जबकि 460 वाहन जब्त किए गए। ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था के क्रियान्वयन के लिए एनसीआर के 1,041 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाए जाएंगे, जो बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों की पहचान स्वचालित रूप से कर सकेंगे।

इलेक्ट्रिक बसें और वायु निगरानी

स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन के विस्तार के लिए गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में कुल 975 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है, जबकि फिलहाल इन शहरों में मात्र 100 ई-बसें चल रही हैं। वायु गुणवत्ता निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए एनसीआर-उत्तर प्रदेश क्षेत्र में 43 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएक्यूएमएस) स्थापित किए जा रहे हैं — इनमें से 25 पहले से चालू हैं और शेष 18 स्टेशन अक्टूबर 2026 तक चालू होंगे।

उद्योगों और सड़क धूल पर कार्रवाई

औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण के तहत 725 प्रदूषणकारी उद्योगों की पहचान की गई है, जिनमें से 613 इकाइयों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) लगाकर उन्हें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से जोड़ा जा चुका है। वहीं 665 उद्योगों में एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (एपीसीडी) लगाने की ज़रूरत चिन्हित की गई है।

सड़क धूल नियंत्रण के लिए चार प्रमुख शहरों में 1,792 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास की योजना है, जिस पर लगभग ₹3,666 करोड़ खर्च का अनुमान है। अब तक 143.8 किलोमीटर सड़क का पुनर्विकास पूरा हो चुका है, जबकि यांत्रिक सफाई के लिए आवश्यक 108 रोड स्वीपिंग मशीनों में से 50 की खरीद प्रक्रिया जारी है।

क्या होगा आगे

बैठक में निर्माण-विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन, ठोस कचरा निस्तारण, पौधारोपण, पराली प्रबंधन, सीबीजी संयंत्र, ईवी चार्जिंग व बैटरी स्वैपिंग स्टेशन तथा मेट्रो और आरआरटीएस विस्तार जैसी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। प्रदूषण नियंत्रण उपायों की निगरानी के लिए पोर्टलों, मोबाइल एप, जीपीएस ट्रैकिंग और डैशबोर्ड को आपस में जोड़कर एक एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिसकी प्रगति की नियमित समीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

नो फ्यूल’ की घोषणा कागज़ पर साहसिक है, लेकिन एनसीआर में पीयूसीसी प्रणाली की विश्वसनीयता पर पहले से प्रश्न रहे हैं — कई केंद्रों पर बिना वास्तविक जाँच के प्रमाणपत्र जारी होने की शिकायतें मिलती रही हैं। एएनपीआर कैमरों और सीपीसीबी से जुड़े ओसीईएमएस जैसे डिजिटल टूल इस बार सख्ती का असली पैमाना होंगे, क्योंकि लागू न होने की स्थिति में 35% कटौती का लक्ष्य महज़ संख्या रह जाएगा। दूसरा बड़ा सवाल इलेक्ट्रिक बसों का है — 100 से 975 तक पहुँचने का अंतर साफ बताता है कि स्वच्छ परिवहन ढाँचा अभी कितना पीछे है। असली परख अक्टूबर 2026 के बाद होगी, जब प्रवर्तन, उपकरण और राजनीतिक इच्छाशक्ति तीनों एक साथ कसौटी पर होंगे।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नियम क्या है और कब से लागू होगा?
यह 1 अक्टूबर 2026 से एनसीआर के सभी पेट्रोल पंपों पर लागू होने वाली व्यवस्था है, जिसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) के बिना किसी भी वाहन को ईंधन नहीं मिलेगा। निगरानी के लिए 1,041 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने एनसीआर में प्रदूषण घटाने का क्या लक्ष्य रखा है?
राज्य सरकार ने वर्ष 2026 के दौरान एनसीआर में प्रदूषण स्तर में 30 से 35 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए वाहन प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन, सड़क धूल, निर्माण अपशिष्ट और पराली जैसे प्रमुख स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई की जा रही है।
‘नया सफर’ योजना के तहत अब तक कितने पुराने वाहनों पर कार्रवाई हुई है?
योजना के तहत एनसीआर के चार जिलों में 26.19 लाख एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहन चिन्हित किए गए हैं। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 37,156 पुराने वाहन स्क्रैप किए गए और 460 वाहन ज़ब्त किए गए हैं।
एनसीआर में स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन के लिए क्या योजना है?
गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में कुल 975 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि अभी इन शहरों में मात्र 100 ई-बसें चल रही हैं। साथ ही मेट्रो और आरआरटीएस विस्तार पर भी काम जारी है।
वायु गुणवत्ता निगरानी के लिए क्या नया ढाँचा खड़ा किया जा रहा है?
एनसीआर-उत्तर प्रदेश क्षेत्र में कुल 43 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएक्यूएमएस) स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से 25 चालू हो चुके हैं और शेष 18 अक्टूबर 2026 तक स्थापित होंगे। साथ ही पोर्टल, मोबाइल एप, जीपीएस और डैशबोर्ड को जोड़कर एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है।
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