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उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए सोन-हुई मास्को पहुंचीं, किम जोंग-उन की रूस यात्रा की अटकलें तेज

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उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए सोन-हुई मास्को पहुंचीं, किम जोंग-उन की रूस यात्रा की अटकलें तेज

सारांश

उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए सोन-हुई का मास्को दौरा महज एक औपचारिक भेंट नहीं — विश्लेषक इसे किम जोंग-उन की संभावित रूस यात्रा की पूर्व-तैयारी मान रहे हैं। जून 2024 की 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि' और हजारों उत्तर कोरियाई सैनिकों की यूक्रेन में तैनाती के बाद यह कदम दोनों देशों की धुरी को और गहरा करने का संकेत है।

मुख्य बातें

उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए सोन-हुई रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के निमंत्रण पर मास्को के आधिकारिक दौरे पर पहुंची हैं।
यह अक्टूबर 2024 के बाद उनकी मास्को की पहली यात्रा है; दौरे का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया।
विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा किम जोंग-उन की संभावित मास्को शिखर यात्रा की तैयारी से जुड़ा हो सकता है।
जून 2024 में हस्ताक्षरित 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि' के बाद उत्तर कोरिया ने यूक्रेन युद्ध में रूस के लिए हजारों सैनिक भेजे हैं।
पिछले महीने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी उत्तर कोरिया का दौरा किया था; प्योंगयांग एक साथ रूस और चीन दोनों के साथ संबंध प्रगाढ़ कर रहा है।

उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए सोन-हुई रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के निमंत्रण पर मास्को के आधिकारिक दौरे पर पहुंच चुकी हैं। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने रविवार, 20 जुलाई को इसकी पुष्टि की, जबकि रूसी विदेश मंत्रालय ने एक दिन पहले ही इसकी जानकारी दे दी थी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब प्योंगयांग और मास्को के बीच रणनीतिक एवं सैन्य सहयोग अभूतपूर्व गहराई तक पहुंच चुका है।

दौरे की पृष्ठभूमि

केसीएनए के अनुसार, चोए सोन-हुई अपने आधिकारिक विमान से प्योंगयांग से रवाना होकर रूस पहुंचीं। यह अक्टूबर 2024 के बाद उनकी मास्को की पहली यात्रा है — इससे पहले वे मास्को के कार्यकारी दौरे पर आई थीं और बेलारूस में आयोजित एक वैश्विक सुरक्षा सम्मेलन में भी शामिल हुई थीं। उत्तर कोरियाई मीडिया ने इस बार भी दौरे के उद्देश्य या कार्यक्रम का कोई विवरण साझा नहीं किया है, और रूसी पक्ष ने भी बैठक के एजेंडे पर चुप्पी बनाए रखी है।

किम जोंग-उन की मास्को यात्रा की अटकलें

विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन की संभावित रूस यात्रा की तैयारियों से जुड़ा हो सकता है। चूंकि दोनों देशों के बीच फिलहाल कोई बड़ा राजनयिक कार्यक्रम या वर्षगांठ निर्धारित नहीं है, इसलिए कयास लगाए जा रहे हैं कि मास्को में संभावित शिखर बैठक की रूपरेखा पर विचार-विमर्श हो सकता है। गौरतलब है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही किम को मास्को आमंत्रित कर चुके हैं।

रूस-उत्तर कोरिया संबंधों की मजबूत होती कड़ी

जून 2024 में किम जोंग-उन और व्लादिमीर पुतिन ने 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि' पर हस्ताक्षर किए थे, जो दोनों देशों के संबंधों में एक निर्णायक मोड़ साबित हुई। इस समझौते के बाद उत्तर कोरिया ने यूक्रेन युद्ध में रूस के समर्थन के लिए हजारों सैनिक भेजे हैं। रक्षा, अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार गहरा होता जा रहा है।

चीन के साथ भी संतुलन साधने की कोशिश

यह यात्रा ऐसे समय में भी हो रही है जब प्योंगयांग अपने पारंपरिक सहयोगी चीन के साथ भी संबंध प्रगाढ़ करने में जुटा है। पिछले महीने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उत्तर कोरिया का दौरा कर किम जोंग-उन से मुलाकात की थी। हाल के हफ्तों में दोनों देशों ने अपनी मित्रता संधि की 65वीं वर्षगांठ के अवसर पर उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्कों को और तेज किया है। इस प्रकार उत्तर कोरिया एक साथ दो प्रमुख शक्तियों — रूस और चीन — के साथ अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत कर रहा है।

आगे क्या होगा

चोए सोन-हुई और लावरोव के बीच वार्ता के नतीजे अभी सामने नहीं आए हैं। यदि किम जोंग-उन की मास्को यात्रा की पुष्टि होती है, तो यह जून 2024 की संधि के बाद दोनों नेताओं की पहली शिखर भेंट होगी और यूक्रेन संघर्ष के बीच रूस-उत्तर कोरिया धुरी को और अधिक वैश्विक ध्यान दिलाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित संकेत है — खासकर तब जब न कोई वर्षगांठ है, न कोई घोषित बहुपक्षीय मंच। असली सवाल यह है कि क्या किम जोंग-उन की मास्को यात्रा यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई भूमिका को और औपचारिक रूप देगी, जो अब तक 'कथित' के दायरे में थी। साथ ही, रूस और चीन दोनों को एक साथ साधने की प्योंगयांग की कोशिश यह बताती है कि उत्तर कोरिया अब अलग-थलग राज्य नहीं, बल्कि एक सक्रिय भू-राजनीतिक खिलाड़ी बनने की राह पर है — और यह बदलाव भारत सहित पूरे इंडो-पैसिफिक के लिए नज़रअंदाज़ करने योग्य नहीं।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए सोन-हुई मास्को क्यों गई हैं?
चोए सोन-हुई रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के निमंत्रण पर आधिकारिक यात्रा पर मास्को पहुंची हैं। दोनों पक्षों ने दौरे का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया है, हालांकि विश्लेषकों के अनुसार यह किम जोंग-उन की संभावित मास्को शिखर यात्रा की पूर्व-तैयारी हो सकती है।
क्या किम जोंग-उन रूस जाने वाले हैं?
अभी तक किम जोंग-उन की रूस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विश्लेषकों का कहना है कि चोए सोन-हुई का दौरा ऐसी किसी शिखर बैठक की तैयारी का हिस्सा हो सकता है, क्योंकि दोनों देशों के बीच कोई अन्य बड़ा राजनयिक कार्यक्रम निर्धारित नहीं है।
उत्तर कोरिया और रूस के बीच संबंध कितने मजबूत हैं?
जून 2024 में किम जोंग-उन और व्लादिमीर पुतिन ने 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि' पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद उत्तर कोरिया ने यूक्रेन युद्ध में रूस के समर्थन के लिए हजारों सैनिक भेजे हैं और रक्षा, अर्थव्यवस्था व प्रौद्योगिकी में भी सहयोग बढ़ा है।
चीन के साथ उत्तर कोरिया के संबंधों की क्या स्थिति है?
पिछले महीने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उत्तर कोरिया का दौरा कर किम जोंग-उन से मुलाकात की थी। दोनों देशों ने अपनी मित्रता संधि की 65वीं वर्षगांठ पर उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क भी बढ़ाए हैं, जो दर्शाता है कि प्योंगयांग रूस और चीन दोनों के साथ एक साथ संबंध प्रगाढ़ कर रहा है।
चोए सोन-हुई की यह रूस यात्रा पहले की यात्राओं से कैसे अलग है?
यह अक्टूबर 2024 के बाद उनकी मास्को की पहली यात्रा है। पिछली बार वे कार्यकारी दौरे पर आई थीं और बेलारूस में एक वैश्विक सुरक्षा सम्मेलन में भी शामिल हुई थीं। इस बार दौरे की अघोषित प्रकृति और किसी निर्धारित द्विपक्षीय कार्यक्रम के अभाव ने इसे विशेष रूप से चर्चा का विषय बनाया है।
राष्ट्र प्रेस
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