जम्मू-कश्मीर बाढ़: पुंछ-राजौरी में 10 की मौत, गृह मंत्री अमित शाह ने दिया केंद्रीय सहायता का भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 19 जुलाई 2026 को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से संपर्क कर केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया, क्योंकि पुंछ और राजौरी जिलों में भीषण बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और कई लोग अभी भी लापता हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सबसे अधिक नुकसान पुंछ जिले के सुरनकोट क्षेत्र के लोअर मुर्रा इलाके में हुआ, जहाँ बाढ़ का पानी और भूस्खलन का मलबा रिहायशी बस्तियों में घुस गया। सुरनकोट से 9 मौतों की खबर है, जिनमें एक ही परिवार के 6 सदस्य शामिल हैं। पुंछ की हवेली तहसील में एक और व्यक्ति की जान गई है। अधिकारियों के अनुसार कई लोगों के मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मृतकों की अंतिम संख्या और घरों, निजी व सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे को हुए नुकसान का पूरा आकलन करने में कई दिन लग सकते हैं।
बचाव और राहत अभियान
पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), नागरिक प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवकों की संयुक्त टीमों ने रुक-रुक कर हो रही बारिश और दुर्गम भूभाग के बावजूद व्यापक खोज एवं बचाव अभियान जारी रखा। प्रभावित गाँवों तक पहुँच बहाल करने और मलबा हटाने के लिए भारी अर्थमूविंग मशीनों का उपयोग किया गया। जिला प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया।
आम जनता पर असर
भारी बारिश से पुंछ और राजौरी में सड़कें, पुल, आवासीय मकान, वाहन और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ। हवेली तहसील में कम से कम 7 मकान टूट-फूट गए, जबकि मंडी और अन्य क्षेत्रों में भी संपत्ति नुकसान की सूचनाएँ मिलीं। भूस्खलन के कारण कई सड़कें अवरुद्ध रहीं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों का संपर्क टूट गया। नदियों, नालों और भूस्खलन-संभावित ढलानों के पास रहने वाले निवासियों को मौसम में सुधार होने तक घर के अंदर रहने की सलाह दी गई।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने अगले 5 दिनों तक जम्मू-कश्मीर में व्यापक बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। विशेष रूप से जम्मू डिवीजन में भारी से बहुत भारी बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में 23 जुलाई तक अचानक बाढ़, भूस्खलन, कीचड़ का खिसकना, पत्थर गिरने और जलभराव का खतरा बना हुआ है।
क्या होगा आगे
अधिकारी संवेदनशील इलाकों पर कड़ी नज़र बनाए हुए हैं। नुकसान के पूर्ण आकलन के बाद केंद्र सरकार द्वारा राहत पैकेज की घोषणा अपेक्षित है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सीज़न में जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी जिले हर वर्ष भूस्खलन और बाढ़ की चपेट में आते हैं, और इस वर्ष की तीव्रता विशेष रूप से गंभीर बताई जा रही है।