18 जुलाई 2026
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उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए सोन हुई मास्को पहुंचीं, लावरोव से होगी अहम द्विपक्षीय वार्ता

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उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए सोन हुई मास्को पहुंचीं, लावरोव से होगी अहम द्विपक्षीय वार्ता

सारांश

उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए सोन हुई का मास्को दौरा महज़ एक शिष्टाचार भेंट नहीं — यह जून 2024 की रक्षा संधि के बाद दोनों देशों के बीच गहराते सैन्य-कूटनीतिक गठजोड़ की अगली कड़ी है। लावरोव के साथ होने वाली बैठक यह तय करेगी कि यह साझेदारी आगे किस दिशा में जाती है।

मुख्य बातें

उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए सोन हुई 18 जुलाई को मास्को पहुंचीं, यह अक्टूबर 2025 के बाद उनकी पहली आधिकारिक रूस यात्रा है।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के निमंत्रण पर आयोजित इस दौरे की रूस के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है।
जून 2024 में दोनों देशों ने आपसी रक्षा प्रावधान वाली 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि' पर हस्ताक्षर किए थे।
कथित तौर पर उत्तर कोरिया ने कुर्स्क क्षेत्र में हज़ारों सैनिक और हथियार भेजे; बदले में रूस ने उन्नत सैन्य व अंतरिक्ष तकनीक साझा की।
वार्ता का विस्तृत एजेंडा अभी सार्वजनिक नहीं; विश्लेषकों के अनुसार रक्षा, सुरक्षा और द्विपक्षीय मुद्दे केंद्र में होंगे।

उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए सोन हुई 18 जुलाई को मास्को पहुंचीं और रूस के आधिकारिक दौरे पर हैं, जहाँ वह अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। रूस के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि की है और बताया है कि यह दौरा लावरोव के निमंत्रण पर हो रहा है।

यात्रा की पृष्ठभूमि

रिपोर्टों के अनुसार, अक्टूबर 2025 के बाद यह चोए सोन हुई की रूस की पहली आधिकारिक यात्रा है। चोए उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के सत्ता में आने के बाद पिछले एक दशक में देश की सबसे प्रभावशाली राजनयिकों में गिनी जाती हैं और विदेश नीति निर्माण में उनकी केंद्रीय भूमिका मानी जाती है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब मास्को और प्योंगयांग के बीच रणनीतिक, सैन्य और आर्थिक सहयोग तेज़ी से गहरा हुआ है।

रूस-उत्तर कोरिया संबंधों की मज़बूत होती बुनियाद

जून 2024 में दोनों देशों ने आपसी रक्षा प्रावधान वाली 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि' पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत किसी भी देश पर हमला होने पर एक-दूसरे को सैन्य सहायता देना शामिल है। इस संधि के बाद से दोनों देशों के बीच सहयोग के नए आयाम खुले हैं।

कथित तौर पर उत्तर कोरिया ने रूस की ओर से लड़ने के लिए तोप के गोले, हथियार और कुर्स्क क्षेत्र में हज़ारों सैनिक एवं श्रमिक भेजे हैं। बदले में मास्को ने प्योंगयांग को उन्नत सैन्य, उपग्रह और अंतरिक्ष तकनीक उपलब्ध कराने में सहयोग किया है।

वार्ता का संभावित एजेंडा

विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक में रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। गौरतलब है कि दोनों विदेश मंत्रियों की बैठक के एजेंडे की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। रूस के विदेश मंत्रालय ने केवल इतना कहा है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग के क्रम में हो रही है।

वैश्विक संदर्भ और आगे की राह

यह दौरा तब हो रहा है जब पश्चिमी देश रूस-उत्तर कोरिया के बढ़ते रक्षा सहयोग को लेकर गहरी चिंता जता रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह साझेदारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन करती है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है। इस वार्ता के नतीजे आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली मुद्दा यह है कि यह साझेदारी एशिया-प्रशांत और यूरोप दोनों में शक्ति संतुलन को एक साथ बदल रही है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चोए सोन हुई की रूस यात्रा का उद्देश्य क्या है?
चोए सोन हुई रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के निमंत्रण पर मास्को पहुंची हैं और दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा सहयोग तथा द्विपक्षीय मुद्दों पर वार्ता करेंगी। यह अक्टूबर 2025 के बाद उनकी पहली आधिकारिक रूस यात्रा है।
रूस और उत्तर कोरिया के बीच 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि' क्या है?
जून 2024 में दोनों देशों द्वारा हस्ताक्षरित इस संधि में आपसी रक्षा प्रावधान शामिल हैं — यानी किसी एक देश पर हमला होने पर दूसरा सैन्य सहायता देगा। यह संधि दोनों देशों के बीच सहयोग की नींव मानी जाती है।
उत्तर कोरिया ने रूस को क्या सहायता दी है?
कथित तौर पर उत्तर कोरिया ने रूस को तोप के गोले, हथियार और कुर्स्क क्षेत्र में हज़ारों सैनिक व श्रमिक भेजे हैं। बदले में रूस ने प्योंगयांग को उन्नत सैन्य, उपग्रह और अंतरिक्ष तकनीक देने में सहयोग किया है।
चोए सोन हुई उत्तर कोरिया की राजनीति में कितनी महत्वपूर्ण हैं?
चोए सोन हुई किम जोंग उन के सत्ता में आने के बाद से देश की सबसे प्रभावशाली राजनयिकों में गिनी जाती हैं। विदेश नीति निर्माण में उनकी केंद्रीय भूमिका मानी जाती है।
इस वार्ता के नतीजे क्या हो सकते हैं?
विश्लेषकों के अनुसार बैठक में रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा संभव है। हालाँकि एजेंडे की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है और नतीजे आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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