वंदे मातरम विवाद: रविशंकर प्रसाद का कांग्रेस पर प्रहार — 'स्वतंत्रता आंदोलन पर एकाधिकार का दावा छोड़ें'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद रविशंकर प्रसाद ने नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर आयोजित प्रेसवार्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर कड़ा हमला बोला। उनका आरोप है कि कांग्रेस राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् और देश के स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को लेकर दोहरा रवैया अपना रही है। प्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कांग्रेस इसी तरह की गतिविधियाँ जारी रखती है, तो उसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर एकाधिकार का दावा करना बंद कर देना चाहिए।
सोनिया गांधी पर आरोप और कांग्रेस का स्पष्टीकरण
प्रसाद ने आरोप लगाया कि एक कार्यक्रम के दौरान ऐसा प्रतीत हुआ कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी वंदे मातरम् के पूर्ण गायन पर आपत्ति जता रही थीं। कांग्रेस के मीडिया प्रमुख ने इस पर सफाई दी थी कि सोनिया गांधी केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था कर रही थीं। हालाँकि, प्रसाद ने इस स्पष्टीकरण को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'पूरी तरह गलत' बताया।
गोवा कार्यक्रम और दो पदों का विवाद
BJP सांसदों ने गोवा में आयोजित कांग्रेस के एक कार्यक्रम का भी उल्लेख किया, जहाँ कथित तौर पर वंदे मातरम् के केवल दो पद गाए गए। प्रसाद ने इसे कांग्रेस की विचारधारा से जोड़ते हुए सवाल किया कि राष्ट्रीय गीत के प्रति पार्टी का वास्तविक दृष्टिकोण क्या है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ में यह भी दावा किया — हालाँकि इसे उन्होंने संभावना के रूप में प्रस्तुत किया — कि 1936-37 के दौर में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुए राजनीतिक समझौतों के चलते केवल शुरुआती दो पद गाने की परंपरा पड़ी होगी।
स्वतंत्रता आंदोलन और डॉ. राजेंद्र प्रसाद का संदर्भ
खड़गे द्वारा BJP नेताओं की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए रविशंकर प्रसाद ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में थे, जेल भी गए और बाद में देश के प्रथम राष्ट्रपति बने। प्रसाद ने यह भी याद दिलाया कि 1950 में संविधान सभा के स्तर पर वंदे मातरम् को जो सम्मान दिया गया, वह इसी ऐतिहासिक महत्व का प्रमाण है।
वोट बैंक की राजनीति पर निशाना
प्रसाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी कथित 'वोट बैंक' की राजनीति के कारण अपनी ही ऐतिहासिक परंपराओं से समझौता कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् की रचना में BJP की कोई भूमिका नहीं रही, इसलिए इस विषय को दलीय राजनीतिक विवाद के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए — यह राष्ट्रीय भावना और स्वाधीनता संग्राम की साझा विरासत का प्रश्न है।
नक्सलवाद पर भी प्रसाद का बयान
प्रेसवार्ता में प्रसाद ने नक्सलवाद के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'दिमागी नक्सल' की बात करते हुए किसी का नाम नहीं लिया था, बल्कि उन लोगों के प्रति सावधान रहने की बात कही थी जो माओवाद को बौद्धिक समर्थन देते हैं और उनके पक्ष में लेख लिखते या वित्तीय सहायता करते हैं। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के उस संकल्प का भी उल्लेख किया जिसमें माओवाद को समाप्त करने की बात कही गई थी, और दावा किया कि बस्तर, सुकमा और महाराष्ट्र में नक्सलवाद अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
यह विवाद ऐसे समय में और गहरा हो गया है जब 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दे राजनीतिक केंद्र में आ चुके हैं। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है।