18 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

वंदे मातरम विवाद: रविशंकर प्रसाद का कांग्रेस पर प्रहार — 'स्वतंत्रता आंदोलन पर एकाधिकार का दावा छोड़ें'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
वंदे मातरम विवाद: रविशंकर प्रसाद का कांग्रेस पर प्रहार — 'स्वतंत्रता आंदोलन पर एकाधिकार का दावा छोड़ें'

सारांश

वंदे मातरम् को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच तकरार तेज हो गई है। BJP सांसद रविशंकर प्रसाद ने नई दिल्ली में प्रेसवार्ता कर सोनिया गांधी के रवैये पर सवाल उठाए और कांग्रेस को स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत पर एकाधिकार का दावा छोड़ने की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

BJP सांसद रविशंकर प्रसाद ने नई दिल्ली में प्रेसवार्ता कर कांग्रेस पर वंदे मातरम् को लेकर दोहरे रवैये का आरोप लगाया।
प्रसाद ने दावा किया कि एक कार्यक्रम में सोनिया गांधी वंदे मातरम् के पूर्ण गायन पर आपत्ति जताती दिखीं; कांग्रेस के स्पष्टीकरण को उन्होंने खारिज किया।
गोवा के कांग्रेस कार्यक्रम में भी केवल दो पद गाए जाने का मुद्दा उठाया गया।
राजेंद्र प्रसाद का उदाहरण देते हुए BJP नेताओं की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका का बचाव किया।
उन्होंने कांग्रेस पर 'वोट बैंक' की राजनीति के लिए ऐतिहासिक परंपराओं से समझौते का आरोप लगाया।
बस्तर, सुकमा और महाराष्ट्र में नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त होने का दावा भी प्रसाद ने किया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद रविशंकर प्रसाद ने नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर आयोजित प्रेसवार्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर कड़ा हमला बोला। उनका आरोप है कि कांग्रेस राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् और देश के स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को लेकर दोहरा रवैया अपना रही है। प्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कांग्रेस इसी तरह की गतिविधियाँ जारी रखती है, तो उसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर एकाधिकार का दावा करना बंद कर देना चाहिए।

सोनिया गांधी पर आरोप और कांग्रेस का स्पष्टीकरण

प्रसाद ने आरोप लगाया कि एक कार्यक्रम के दौरान ऐसा प्रतीत हुआ कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी वंदे मातरम् के पूर्ण गायन पर आपत्ति जता रही थीं। कांग्रेस के मीडिया प्रमुख ने इस पर सफाई दी थी कि सोनिया गांधी केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था कर रही थीं। हालाँकि, प्रसाद ने इस स्पष्टीकरण को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'पूरी तरह गलत' बताया।

गोवा कार्यक्रम और दो पदों का विवाद

BJP सांसदों ने गोवा में आयोजित कांग्रेस के एक कार्यक्रम का भी उल्लेख किया, जहाँ कथित तौर पर वंदे मातरम् के केवल दो पद गाए गए। प्रसाद ने इसे कांग्रेस की विचारधारा से जोड़ते हुए सवाल किया कि राष्ट्रीय गीत के प्रति पार्टी का वास्तविक दृष्टिकोण क्या है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ में यह भी दावा किया — हालाँकि इसे उन्होंने संभावना के रूप में प्रस्तुत किया — कि 1936-37 के दौर में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुए राजनीतिक समझौतों के चलते केवल शुरुआती दो पद गाने की परंपरा पड़ी होगी।

स्वतंत्रता आंदोलन और डॉ. राजेंद्र प्रसाद का संदर्भ

खड़गे द्वारा BJP नेताओं की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए रविशंकर प्रसाद ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में थे, जेल भी गए और बाद में देश के प्रथम राष्ट्रपति बने। प्रसाद ने यह भी याद दिलाया कि 1950 में संविधान सभा के स्तर पर वंदे मातरम् को जो सम्मान दिया गया, वह इसी ऐतिहासिक महत्व का प्रमाण है।

वोट बैंक की राजनीति पर निशाना

प्रसाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी कथित 'वोट बैंक' की राजनीति के कारण अपनी ही ऐतिहासिक परंपराओं से समझौता कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् की रचना में BJP की कोई भूमिका नहीं रही, इसलिए इस विषय को दलीय राजनीतिक विवाद के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए — यह राष्ट्रीय भावना और स्वाधीनता संग्राम की साझा विरासत का प्रश्न है।

नक्सलवाद पर भी प्रसाद का बयान

प्रेसवार्ता में प्रसाद ने नक्सलवाद के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'दिमागी नक्सल' की बात करते हुए किसी का नाम नहीं लिया था, बल्कि उन लोगों के प्रति सावधान रहने की बात कही थी जो माओवाद को बौद्धिक समर्थन देते हैं और उनके पक्ष में लेख लिखते या वित्तीय सहायता करते हैं। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के उस संकल्प का भी उल्लेख किया जिसमें माओवाद को समाप्त करने की बात कही गई थी, और दावा किया कि बस्तर, सुकमा और महाराष्ट्र में नक्सलवाद अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है।

यह विवाद ऐसे समय में और गहरा हो गया है जब 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दे राजनीतिक केंद्र में आ चुके हैं। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी जड़ें उस पुरानी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में हैं जो 'राष्ट्रवाद की परिभाषा' पर नियंत्रण को लेकर चलती आई है। BJP का यह हमला चुनावी मौसम में कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में धकेलने की सुचिंतित रणनीति है। लेकिन प्रसाद का 1936-37 का ऐतिहासिक तर्क — जिसे उन्होंने खुद संभावना के रूप में रखा — तथ्यात्मक सत्यापन के बिना राजनीतिक आरोप ही बना रहता है। असली सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर यह बहस नागरिकों के वास्तविक सरोकारों को संबोधित करती है, या केवल ध्रुवीकरण का औज़ार बनती है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम् विवाद में रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
BJP सांसद रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को लेकर दोहरा रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इसी तरह की गतिविधियाँ जारी रखती है, तो उसे स्वतंत्रता संग्राम पर एकाधिकार का दावा करना बंद कर देना चाहिए।
सोनिया गांधी और वंदे मातरम् विवाद क्या है?
रविशंकर प्रसाद ने दावा किया कि एक कार्यक्रम के दौरान सोनिया गांधी वंदे मातरम् के पूर्ण गायन पर आपत्ति जताती प्रतीत हुईं। कांग्रेस के मीडिया प्रमुख ने सफाई दी कि वे खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था कर रही थीं, लेकिन प्रसाद ने इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया।
गोवा में वंदे मातरम् के केवल दो पद गाए जाने का मामला क्या है?
BJP सांसदों ने गोवा में आयोजित कांग्रेस के एक कार्यक्रम में वंदे मातरम् के केवल दो पद गाए जाने का उल्लेख किया। प्रसाद ने इसे कांग्रेस की कथित विचारधारा से जोड़ते हुए राष्ट्रीय गीत के प्रति पार्टी के दृष्टिकोण पर सवाल उठाया।
रविशंकर प्रसाद ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद का उल्लेख क्यों किया?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा BJP नेताओं की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका पर उठाए गए सवालों के जवाब में प्रसाद ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे, जेल गए और देश के प्रथम राष्ट्रपति बने।
क्या BJP और कांग्रेस के बीच वंदे मातरम् विवाद नया है?
वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक मतभेद दशकों पुराने हैं और इसकी जड़ें 1936-37 के कांग्रेस-मुस्लिम लीग दौर तक जाती हैं। हालाँकि, वर्तमान विवाद एक हालिया कार्यक्रम में कथित घटना के बाद फिर से भड़का है और चुनावी माहौल में इसने तीखा रूप ले लिया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 19 घंटे पहले
  3. कल
  4. 2 दिन पहले
  5. 2 दिन पहले
  6. 2 दिन पहले
  7. 2 दिन पहले
  8. 2 महीने पहले