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वंदे मातरम विवाद: BJP नेता पेराला शेखर राव बोले — कांग्रेस कराए जनमत संग्रह, सच सामने आएगा

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वंदे मातरम विवाद: BJP नेता पेराला शेखर राव बोले — कांग्रेस कराए जनमत संग्रह, सच सामने आएगा

सारांश

BJP नेता पेराला शेखर राव ने हैदराबाद से तीखा सवाल दागा — कांग्रेस अपने ही कार्यकर्ताओं के बीच वंदे मातरम पर जनमत संग्रह क्यों नहीं कराती? राहुल और सोनिया गांधी पर गीत से दूरी का आरोप लगाते हुए उन्होंने इसे धर्म नहीं, भारत की सभ्यता का प्रश्न बताया।

मुख्य बातें

BJP नेता पेराला शेखर राव ने 15 सितंबर 2026 को हैदराबाद में कांग्रेस से वंदे मातरम पर अपने कार्यकर्ताओं के बीच जनमत संग्रह कराने की माँग की।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को किसी एक धर्म से नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
शेखर राव ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण से दूरी बनाए रखने का आरोप लगाया।
उनका तर्क है कि जो लोग वंदे मातरम के पूर्ण पाठ का विरोध करते हैं, वे भारतीय संस्कृति और समाज से दूर हो रहे हैं।
कांग्रेस की ओर से इस बयान पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।

हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता पेराला शेखर राव ने 15 सितंबर 2026 को वंदे मातरम को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच तीखी माँग रखी कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को अपने कार्यकर्ताओं के बीच जनमत संग्रह कराना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पार्टी के भीतर इस राष्ट्रीय गीत के प्रति वास्तविक समर्थन कितना है। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी सर्वेक्षण से समाज की राय भी सामने आ जाएगी।

BJP नेता का मुख्य बयान

पेराला शेखर राव ने कहा, 'यह विषय केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं होना चाहिए। देश में बहुत से लोग वंदे मातरम को मानते और सम्मान करते हैं। कांग्रेस के अंदर भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो वंदे मातरम में विश्वास रखते हैं। कांग्रेस को एक बार अपने कार्यकर्ताओं के बीच जनमत संग्रह कराकर देखना चाहिए। इससे पता चल जाएगा कि उसके कार्यकर्ता वंदे मातरम के समर्थन में हैं या नहीं और समाज इस विषय को चाहता है या नहीं।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वंदे मातरम को किसी एक धर्म विशेष की दृष्टि से देखना उचित नहीं है, बल्कि इसे भारत की सभ्यता, संस्कृति और विरासत के व्यापक संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

सांस्कृतिक विरासत का संदर्भ

शेखर राव ने भारत के हजारों वर्षों पुराने इतिहास का उल्लेख किया — वेदकाल से लेकर रामायण, महाभारत, राजाओं-महाराजाओं के युग और उसके बाद की लंबी परंपराओं तक। उनके अनुसार, भारत का इतिहास अमेरिका जैसे अपेक्षाकृत नए देशों की तुलना में कहीं अधिक पुराना और विस्तृत है, इसलिए देश की सांस्कृतिक पहचान को उसी गहराई से समझना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम में नदियों, प्रकृति, संस्कृति और विभिन्न प्रतीकों का उल्लेख है — इसे केवल धार्मिक चश्मे से देखने के बजाय भारतीय सभ्यता के एक अभिन्न अंग के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेतृत्व पर आरोप

शेखर राव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर वंदे मातरम से दूरी बनाए रखने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि कांग्रेस नेतृत्व वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण की बजाय केवल कुछ हिस्सों को ही स्वीकार करता है। यह आरोप उन्होंने बिना तत्काल साक्ष्य प्रस्तुत किए लगाया — कांग्रेस की ओर से इस पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।

गौरतलब है कि वंदे मातरम को लेकर विवाद नया नहीं है — स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही इसके पूर्ण पाठ को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक समूहों में मतभेद रहे हैं।

विवाद का राजनीतिक संदर्भ

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज़ होता दिख रहा है। BJP और कांग्रेस के बीच सांस्कृतिक पहचान, देशभक्ति और धार्मिक तटस्थता के सवाल पर टकराव बढ़ता जा रहा है।

आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान वास्तविक राजनीतिक संवाद से ध्यान भटकाने का काम करते हैं, जबकि BJP का तर्क है कि राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। यह देखना शेष है कि कांग्रेस इस माँग पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में डालता है, चाहे वह जवाब दे या न दे। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय प्रतीकों पर राजनीतिक स्कोरिंग से कोई ठोस सामाजिक समाधान निकलता है, या यह केवल ध्रुवीकरण को और गहरा करता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि वंदे मातरम को लेकर भारत के संविधान निर्माताओं ने भी एक सुलझा हुआ मध्यमार्ग अपनाया था — उस संदर्भ को छोड़कर इस बहस को केवल पक्ष-विपक्ष में देखना इतिहास के साथ अन्याय है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP नेता पेराला शेखर राव ने कांग्रेस से क्या माँग की?
पेराला शेखर राव ने माँग की कि कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं के बीच वंदे मातरम के समर्थन को लेकर जनमत संग्रह कराए। उनका कहना है कि इससे पता चलेगा कि कांग्रेस के भीतर और समाज में इस राष्ट्रीय गीत के प्रति वास्तविक रुझान क्या है।
वंदे मातरम विवाद क्या है और यह क्यों उठता रहता है?
वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण को लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक समूहों में मतभेद रहे हैं। कुछ समूह इसके कुछ छंदों को धार्मिक मानते हुए आपत्ति जताते हैं, जबकि BJP जैसे दल इसे भारतीय सभ्यता और राष्ट्रीय पहचान का अभिन्न हिस्सा मानते हैं।
राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर क्या आरोप लगाए गए?
शेखर राव ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी वंदे मातरम से दूरी बनाए रखते हैं और कांग्रेस नेतृत्व केवल इसके कुछ हिस्सों को स्वीकार करता है। कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।
BJP का वंदे मातरम पर क्या रुख है?
BJP का रुख है कि वंदे मातरम को धार्मिक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के रूप में देखा जाए। पार्टी के अनुसार, इसके पूर्ण पाठ का विरोध करने वाले भारतीय संस्कृति और समाज से कटते जा रहे हैं।
यह बयान किस संदर्भ में आया?
यह बयान 15 सितंबर 2026 को हैदराबाद में उस समय आया जब देश में राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। BJP और कांग्रेस के बीच सांस्कृतिक पहचान और देशभक्ति के सवाल पर वाकयुद्ध बढ़ता दिख रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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