वंदे मातरम विवाद: BJP नेता पेराला शेखर राव बोले — कांग्रेस कराए जनमत संग्रह, सच सामने आएगा
सारांश
मुख्य बातें
हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता पेराला शेखर राव ने 15 सितंबर 2026 को वंदे मातरम को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच तीखी माँग रखी कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को अपने कार्यकर्ताओं के बीच जनमत संग्रह कराना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पार्टी के भीतर इस राष्ट्रीय गीत के प्रति वास्तविक समर्थन कितना है। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी सर्वेक्षण से समाज की राय भी सामने आ जाएगी।
BJP नेता का मुख्य बयान
पेराला शेखर राव ने कहा, 'यह विषय केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं होना चाहिए। देश में बहुत से लोग वंदे मातरम को मानते और सम्मान करते हैं। कांग्रेस के अंदर भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो वंदे मातरम में विश्वास रखते हैं। कांग्रेस को एक बार अपने कार्यकर्ताओं के बीच जनमत संग्रह कराकर देखना चाहिए। इससे पता चल जाएगा कि उसके कार्यकर्ता वंदे मातरम के समर्थन में हैं या नहीं और समाज इस विषय को चाहता है या नहीं।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वंदे मातरम को किसी एक धर्म विशेष की दृष्टि से देखना उचित नहीं है, बल्कि इसे भारत की सभ्यता, संस्कृति और विरासत के व्यापक संदर्भ में समझा जाना चाहिए।
सांस्कृतिक विरासत का संदर्भ
शेखर राव ने भारत के हजारों वर्षों पुराने इतिहास का उल्लेख किया — वेदकाल से लेकर रामायण, महाभारत, राजाओं-महाराजाओं के युग और उसके बाद की लंबी परंपराओं तक। उनके अनुसार, भारत का इतिहास अमेरिका जैसे अपेक्षाकृत नए देशों की तुलना में कहीं अधिक पुराना और विस्तृत है, इसलिए देश की सांस्कृतिक पहचान को उसी गहराई से समझना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम में नदियों, प्रकृति, संस्कृति और विभिन्न प्रतीकों का उल्लेख है — इसे केवल धार्मिक चश्मे से देखने के बजाय भारतीय सभ्यता के एक अभिन्न अंग के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेतृत्व पर आरोप
शेखर राव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर वंदे मातरम से दूरी बनाए रखने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि कांग्रेस नेतृत्व वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण की बजाय केवल कुछ हिस्सों को ही स्वीकार करता है। यह आरोप उन्होंने बिना तत्काल साक्ष्य प्रस्तुत किए लगाया — कांग्रेस की ओर से इस पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।
गौरतलब है कि वंदे मातरम को लेकर विवाद नया नहीं है — स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही इसके पूर्ण पाठ को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक समूहों में मतभेद रहे हैं।
विवाद का राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज़ होता दिख रहा है। BJP और कांग्रेस के बीच सांस्कृतिक पहचान, देशभक्ति और धार्मिक तटस्थता के सवाल पर टकराव बढ़ता जा रहा है।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान वास्तविक राजनीतिक संवाद से ध्यान भटकाने का काम करते हैं, जबकि BJP का तर्क है कि राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। यह देखना शेष है कि कांग्रेस इस माँग पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं।