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आरबीआई की वीआरआरआर नीलामी में ₹3.93 लाख करोड़ की बोलियां, 5.24% कट-ऑफ दर पर सभी स्वीकार

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आरबीआई की वीआरआरआर नीलामी में ₹3.93 लाख करोड़ की बोलियां, 5.24% कट-ऑफ दर पर सभी स्वीकार

सारांश

बैंकिंग प्रणाली में ₹10.73 लाख करोड़ के अधिशेष के बीच RBI ने वीआरआरआर नीलामी में ₹3.93 लाख करोड़ की बोलियां 5.24% दर पर स्वीकारीं। साथ ही ₹1 लाख करोड़ की OMO बिक्री की घोषणा — केंद्रीय बैंक की नकदी को रेपो दर के अनुरूप रखने की दोहरी रणनीति।

मुख्य बातें

RBI की 15 सितंबर 2026 की वीआरआरआर नीलामी में ₹3,93,352 करोड़ की बोलियां प्राप्त हुईं।
अधिसूचित राशि ₹5 लाख करोड़ थी; सभी बोलियां 5.24% कट-ऑफ दर पर स्वीकार।
11 सितंबर 2026 तक बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त नकदी का अनुमान लगभग ₹10.73 लाख करोड़ ।
नकदी अधिशेष का मुख्य कारण बैंकों द्वारा एफसीएनआर-बी जमाओं के अंतर्गत भारी जुटाव।
RBI ने तीन चरणों में ₹1 लाख करोड़ की OMO बिक्री घोषित — पहली नीलामी ₹50,000 करोड़ की, 17 सितंबर को।
इससे पूर्व सितंबर में वीआरआरआर के जरिए ₹3,53,390 करोड़ की नकदी अवशोषित की गई थी।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को 15 सितंबर 2026 को आयोजित वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी में ₹3,93,352 करोड़ की बोलियां प्राप्त हुईं। केंद्रीय बैंक ने अधिसूचित ₹5 लाख करोड़ की राशि के मुकाबले मिलीं सभी बोलियों को 5.24 प्रतिशत की कट-ऑफ और भारित औसत दर पर स्वीकार कर लिया। बैंकिंग प्रणाली में असाधारण नकदी अधिशेष के बीच यह नीलामी अल्पकालिक मनी मार्केट दरों को रेपो दर के अनुरूप बनाए रखने की RBI की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

नीलामी का पूरा ब्यौरा

RBI की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, ₹5 लाख करोड़ की अधिसूचित राशि के सापेक्ष बैंकों ने ₹3,93,352 करोड़ की बोलियां लगाईं। केंद्रीय बैंक ने 5.24% की कट-ऑफ दर और भारित औसत दर पर समस्त प्राप्त बोलियों को स्वीकार किया, जो अधिसूचित राशि का लगभग 78.7 प्रतिशत बनता है।

गौरतलब है कि इससे पहले सितंबर में भी केंद्रीय बैंक ने ओवरनाइट वीआरआरआर नीलामी के जरिए ₹3,53,390 करोड़ की अतिरिक्त नकदी अवशोषित की थी। उस नीलामी में भी अधिसूचित राशि ₹5 लाख करोड़ थी और कट-ऑफ दर 5.24% रही थी।

बैंकिंग प्रणाली में नकदी अधिशेष की स्थिति

11 सितंबर 2026 तक बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त नकदी का अनुमान लगभग ₹10.73 लाख करोड़ था। आंकड़ों के अनुसार, यह नकदी सरप्लस मुख्यतः बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा अनिवासी — एफसीएनआर-बी — जमाओं के अंतर्गत भारी मात्रा में जुटाई गई राशि के बाद उत्पन्न हुई है।

यह ऐसे समय में आया है जब RBI अल्पकालिक मनी मार्केट दरों को अपनी नीतिगत रेपो दर के अनुरूप बनाए रखने की कोशिश में लगातार नकदी प्रबंधन उपाय अपना रहा है।

ओपन मार्केट ऑपरेशन — अतिरिक्त उपाय

वीआरआरआर नीलामियों के साथ-साथ RBI ने पिछले सप्ताह तीन चरणों में ₹1 लाख करोड़ मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) बिक्री की भी घोषणा की है।

पहली OMO नीलामी ₹50,000 करोड़ की होगी, जो 17 सितंबर 2026 को निर्धारित है। इसके बाद 21 सितंबर और 28 सितंबर को क्रमशः ₹25,000-₹25,000 करोड़ की दो और नीलामियां होंगी। OMO बिक्री के जरिए RBI बाज़ार से नकदी खींचता है, जिससे दीर्घकालिक ब्याज दरों पर भी असर पड़ सकता है।

RBI की रणनीति और उसका महत्व

RBI पिछले एक महीने से लगातार वीआरआरआर नीलामियां आयोजित कर रहा है। इन नीलामियों का उद्देश्य अतिरिक्त नकदी को अवशोषित कर ओवरनाइट मनी मार्केट दरों को रेपो दर के करीब रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाज़ार में नकदी की अत्यधिक उपलब्धता बनी रहे, तो मुद्रास्फीति प्रबंधन जटिल हो सकता है।

केंद्रीय बैंक के ये नकदी प्रबंधन उपाय मौद्रिक नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनके ज़रिए RBI बिना रेपो दर बदले भी बाज़ार की मौद्रिक स्थितियों को प्रभावित कर सकता है। आगामी OMO नीलामियों के परिणाम यह तय करेंगे कि प्रणाली में नकदी अधिशेष किस हद तक नियंत्रित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे सामान्य रेपो दर की घोषणा से नहीं संभाला जा सकता। आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी अधिशेष नकदी की उपस्थिति मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। असली परीक्षा यह होगी कि आगामी OMO नीलामियां बाज़ार में अपेक्षित अवशोषण कर पाती हैं या अतिरिक्त नकदी प्रणाली में बनी रहती है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीआरआरआर नीलामी क्या होती है और RBI इसे क्यों करता है?
वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) एक ऐसा तंत्र है जिसके ज़रिए RBI बैंकों से अतिरिक्त नकदी एक निश्चित अवधि के लिए अवशोषित करता है और उन्हें ब्याज देता है। इसका मुख्य उद्देश्य ओवरनाइट मनी मार्केट दरों को रेपो दर के करीब बनाए रखना है ताकि मौद्रिक नीति प्रभावी ढंग से काम करे।
15 सितंबर 2026 की वीआरआरआर नीलामी में कितनी बोलियां आईं?
15 सितंबर 2026 को आयोजित वीआरआरआर नीलामी में RBI को ₹3,93,352 करोड़ की बोलियां प्राप्त हुईं, जबकि अधिसूचित राशि ₹5 लाख करोड़ थी। केंद्रीय बैंक ने 5.24% की कट-ऑफ और भारित औसत दर पर सभी बोलियां स्वीकार कर लीं।
बैंकिंग प्रणाली में इतनी अधिक नकदी क्यों है?
बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा अनिवासी — एफसीएनआर-बी — जमाओं के अंतर्गत भारी मात्रा में धन जुटाए जाने के बाद बैंकिंग प्रणाली में नकदी सरप्लस की स्थिति बन गई। 11 सितंबर 2026 तक यह अधिशेष लगभग ₹10.73 लाख करोड़ आंका गया था।
RBI की OMO बिक्री की योजना क्या है और इसका असर क्या होगा?
RBI ने तीन चरणों में कुल ₹1 लाख करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियों की OMO बिक्री की घोषणा की है — 17 सितंबर को ₹50,000 करोड़, और 21 व 28 सितंबर को ₹25,000-₹25,000 करोड़। OMO बिक्री के ज़रिए RBI बाज़ार से नकदी खींचता है, जिससे अतिरिक्त तरलता कम होती है और ब्याज दरों पर दबाव नियंत्रित रहता है।
पिछली वीआरआरआर नीलामी की तुलना में इस बार के नतीजे कैसे रहे?
इससे पहले सितंबर में हुई ओवरनाइट वीआरआरआर नीलामी में ₹3,53,390 करोड़ की बोलियां आई थीं, जबकि इस बार ₹3,93,352 करोड़ की बोलियां मिलीं — यानी करीब ₹40,000 करोड़ अधिक। दोनों नीलामियों में कट-ऑफ दर 5.24% रही और RBI ने प्राप्त समस्त बोलियां स्वीकार कीं।
राष्ट्र प्रेस
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