RBI अप्रैल 2027 तक रेपो रेट 6% तक बढ़ा सकता है, बाज़ार में अधिक तरलता बनी चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अप्रैल 2027 तक रेपो रेट को 6 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है — यह संभावना बंधन AMC की एक ताज़ा रिपोर्ट में जताई गई है, जो 4 सितंबर को जारी हुई। रिपोर्ट के अनुसार, बाज़ार में अत्यधिक तरलता और बढ़ते मुद्रास्फीति के दबाव ने नीतिगत सामान्यीकरण की प्रक्रिया को तेज़ करने की ज़रूरत को रेखांकित किया है।
तरलता की स्थिति और ओवरनाइट रेट्स पर असर
रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेशी मुद्रा प्रवाह से रुपए की तरलता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसने ओवरनाइट रेट्स को नीतिगत दरों से काफी नीचे धकेल दिया है। इससे भारत के स्थिर आय वाले निवेशकों के लिए एक जटिल निवेश वातावरण तैयार हो गया है।
बंधन AMC के अनुसार, तालमेल उसी रफ्तार से बिठाया जाएगा जिस गति से RBI नॉर्मलाइजेशन की कार्रवाई करेगा। इसमें ओवरनाइट रेट एंकर को पॉलिसी रेट के अनुसार पुनर्निर्धारित करना, मध्यम अवधि में अतिरिक्त तरलता को सोखने के उपाय और मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा रेपो रेट सामान्यीकरण की गति पर विचार शामिल हो सकते हैं।
बाज़ार से अपेक्षित उपाय
रिपोर्ट के अनुसार, बाज़ार कुछ अस्थायी और स्थायी उपायों की प्रतीक्षा में है। इनमें फॉरेक्स स्वैप, MSS बॉन्ड, OMO बिक्री और संभवतः CRR में बढ़ोतरी शामिल हो सकती है। हालाँकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल तरलता सामान्यीकरण की रफ्तार के मामले में अधिक गुंजाइश नहीं है, क्योंकि समग्र परिस्थितियों में अभी भी उल्लेखनीय अनिश्चितताएँ बनी हुई हैं।
वैश्विक और घरेलू मुद्रास्फीति दबाव
रिपोर्ट में मध्य पूर्व में नए सिरे से बढ़े तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में हालिया उछाल का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही कृषि उत्पादों सहित सभी प्रमुख कमोडिटीज़ पर व्यापक दबाव बना हुआ है।
घरेलू मोर्चे पर, मानसून असमान रहा है, जबकि GDP वृद्धि मज़बूत बनी हुई है और भारत में क्रेडिट ग्रोथ लगभग 18 प्रतिशत की दर से जारी है। रिपोर्ट में कहा गया, 'वैश्विक और स्थानीय दोनों ही परिस्थितियाँ महंगाई का दबाव बढ़ने की ओर इशारा कर रही हैं, भले ही अब तक के आँकड़े RBI के लिए अपेक्षाकृत राहत देने वाले रहे हों।'
MPC का रुख और आगे की राह
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछली पॉलिसी बैठक के कार्यवृत्त (मिनट्स) में MPC सदस्यों का रुख अधिक सख्त दिखा है, जो उनकी बढ़ती सतर्कता को दर्शाता है। माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर कीमतों का दबाव बढ़ने के कारण सदस्य मौजूदा नीतिगत रुख को लेकर और भी असहज महसूस कर रहे होंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब RBI की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक निकट है और बाज़ार दर वृद्धि के संकेतों पर बारीकी से नज़र रखे हुए है। आने वाले महीनों में RBI की कार्रवाई यह तय करेगी कि भारतीय बॉन्ड बाज़ार और ऋण बाज़ार किस दिशा में जाते हैं।