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नेपाल बाढ़: 10 दिन सुरंग में फंसे कबीर महाजन जीवित बचाए गए, परिजनों ने बताई 10 दिनों की तड़प

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नेपाल बाढ़: 10 दिन सुरंग में फंसे कबीर महाजन जीवित बचाए गए, परिजनों ने बताई 10 दिनों की तड़प

सारांश

10 दिनों की अँधेरी सुरंग, भूख-नींद से बेहाल परिवार — और फिर सुबह 8:30 बजे वो फोन जिसने सब बदल दिया। नेपाल बाढ़ में फंसे कबीर महाजन और संजय साह की जीवित वापसी ने राहत दी, लेकिन 945 मज़दूर अभी भी 11 जलविद्युत परियोजनाओं में लापता हैं।

मुख्य बातें

कबीर महाजन (45 वर्ष) और संजय साह (30 वर्ष) को 4 सितंबर की सुबह 8:30 बजे नेपाल की एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग से 10 दिन बाद जीवित बचाया गया।
दोनों को इलाज के लिए काठमांडू की छाउनी स्थित नेपाल आर्मी हॉस्पिटल ले जाया गया।
नेपाल पुलिस के अनुसार 26 अगस्त की बाढ़ में अब तक 1,295 लोगों की मौत हो चुकी है और 4,898 लोग संपर्क से बाहर हैं।
इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार 11 जलविद्युत परियोजनाओं में 945 कर्मचारी अभी भी लापता हैं।
बाढ़ ने त्रिशूली और भोटेकोशी गलियारे की जलविद्युत परियोजनाओं और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचाया है।

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बाद 10 दिनों तक सुरंग में फंसे रहने के बाद कबीर महाजन को बचावकर्मियों ने शुक्रवार, 4 सितंबर को सुरक्षित निकाल लिया। काठमांडू के नज़दीक स्थित एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग से हुए इस सफल बचाव ने उन सैकड़ों परिवारों में नई उम्मीद जगाई है जिनके परिजन 26 अगस्त को त्रिशूली और भोटेकोशी नदी क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ के बाद से लापता हैं।

10 दिनों की अनिश्चितता: परिवार की आपबीती

कबीर के छोटे भाई आमिर महाजन ने बताया कि आपदा से ठीक एक दिन पहले — 25 अगस्त को — उनकी कबीर से आखिरी बात हुई थी। उसके बाद के दस दिन परिवार के लिए असहनीय पीड़ा से भरे रहे। आमिर ने कहा, 'हम बेहद खुश हैं कि 10 दिन से लापता मेरे बड़े भाई को बचा लिया गया। परिवार में जो खुशी आई है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।'

परिवार ने बताया कि इन दस दिनों में उनकी नींद और भूख दोनों उड़ गई थीं। वे घंटों टीवी रिपोर्ट, सोशल मीडिया और अन्य स्रोतों पर नज़रें टिकाए रहते। आमिर ने कहा, 'हम मीडिया, फेसबुक और कई स्रोतों से लगातार अपडेट देखते रहे — सोचते रहे कि आज या कल भाई के बारे में कोई खबर मिलेगी या नहीं। परिवार लगातार चिंता में जी रहा था, कभी नहीं पता था कि अगली जानकारी कब आएगी या वह क्या लेकर आएगी।'

बचाव का वह सुनहरा पल

शुक्रवार सुबह करीब 8:30 बजे परिवार को पहले खबर मिली कि एक और व्यक्ति को सुरंग से बचाया गया है। इसके तुरंत बाद नेपाल विद्युत प्राधिकरण का फोन आया, जिसमें पुष्टि की गई कि कबीर को भी जीवित निकाल लिया गया है। 45 वर्षीय कबीर महाजन उस जलविद्युत परियोजना की हाइड्रोपावर ऑटोमेशन यूनिट में सुपरवाइजर के तौर पर कार्यरत थे। उनके साथ 30 वर्षीय फोरमैन संजय साह को भी उसी सुरंग से जीवित बचाया गया।

बचाए जाने के बाद कबीर को इलाज के लिए काठमांडू की छाउनी स्थित नेपाल आर्मी हॉस्पिटल ले जाया गया। परिवार उन्हें अस्पताल ले जाते समय कुछ क्षणों के लिए ही देख सका। आमिर ने बताया, 'उनकी हालत ठीक लग रही है। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है और हम बाहर इंतजार कर रहे हैं।'

संजय साह के परिवार में भी खुशी की लहर

संजय साह की पत्नी लक्ष्मी कुमारी साह ने बताया कि जब सुबह करीब 8:30 बजे उन्हें पति के बचाए जाने की खबर मिली, तो वे घर पर थीं। उन्होंने कहा, 'मैं अपने पति के बचाए जाने से बहुत खुश हूं और इससे मेरे परिवार के सभी सदस्यों में खुशी आई है।' वायरल हुए एक वीडियो के अनुसार, साह ने बताया कि उनकी यूनिट में घटना के समय तीन से चार लोग बचे हुए थे, जबकि 40 से अधिक लोग सुरंग से निकल गए थे।

आपदा का व्यापक असर: 1,295 मौतें, 4,898 लापता

नेपाल पुलिस के शुक्रवार दोपहर 2 बजे तक के आँकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त की बाढ़ में अब तक कम से कम 1,295 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,898 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। बाढ़ ने त्रिशूली और भोटेकोशी गलियारे में जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढाँचों को भारी नुकसान पहुँचाया है।

निजी क्षेत्र के बिजली उत्पादकों के संगठन इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने गुरुवार शाम को बताया कि बाढ़ से प्रभावित 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 945 लोग अभी संपर्क से बाहर हैं। इन दो लोगों की सुरक्षित वापसी ने उन परिवारों में उम्मीद की किरण जगाई है जिनके परिजन अभी भी उन्हीं परियोजनाओं के भीतर फंसे होने की आशंका है।

बचाव दल का आभार

आमिर महाजन ने कहा, 'हम अपने परिवार की ओर से नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल की विशेषज्ञ टीमों, बचावकर्मियों और तलाशी एवं बचाव अभियान में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल सभी लोगों के साथ-साथ देश-विदेश के उन सभी लोगों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करना चाहते हैं जिन्होंने इस कठिन समय में हमारा साथ दिया।' गौरतलब है कि यह बचाव अभियान नेपाल में अब तक के सबसे जटिल आपदा-राहत प्रयासों में से एक माना जा रहा है। अभी भी सैकड़ों परिवार अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस विशाल मानवीय संकट की महज एक झलक है जो नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र को घेरे हुए है। 11 परियोजनाओं में 945 लापता कर्मचारियों की खबर यह सवाल उठाती है कि इन दूरदराज़ सुरंगों में काम करने वाले मज़दूरों के लिए आपातकालीन संचार और निकासी प्रोटोकॉल कितने मज़बूत हैं। गौरतलब है कि नेपाल के जलविद्युत विस्तार की महत्वाकांक्षाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं, लेकिन श्रमिक सुरक्षा ढाँचे की समीक्षा अभी भी पीछे है — यह त्रासदी उस खाई को उजागर करती है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कबीर महाजन को नेपाल की सुरंग से कब और कैसे बचाया गया?
कबीर महाजन को 4 सितंबर की सुबह करीब 8:30 बजे नेपाल की एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग से 10 दिन बाद जीवित निकाला गया। नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल की विशेषज्ञ टीमों ने यह बचाव अभियान चलाया और उन्हें काठमांडू के नेपाल आर्मी हॉस्पिटल ले जाया गया।
नेपाल बाढ़ में अब तक कितने लोगों की मौत हुई और कितने लापता हैं?
नेपाल पुलिस के शुक्रवार दोपहर 2 बजे तक के आँकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त की बाढ़ में कम से कम 1,295 लोगों की मौत हो चुकी है और 4,898 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। इसके अलावा 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 945 कर्मचारी भी लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल में बाढ़ किन नदियों के कारण आई और इसका सबसे ज़्यादा असर कहाँ पड़ा?
26 अगस्त को त्रिशूली और भोटेकोशी नदी क्षेत्रों में भीषण बाढ़ आई, जिसने इन गलियारों में स्थित जलविद्युत परियोजनाओं और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचाया। इन्हीं परियोजनाओं की सुरंगों में काम करने वाले सैकड़ों मज़दूर लापता हो गए।
संजय साह कौन हैं और उन्हें कैसे बचाया गया?
संजय साह 30 वर्षीय फोरमैन हैं जो उसी जलविद्युत परियोजना में कार्यरत थे जहाँ कबीर महाजन काम करते थे। उन्हें भी 4 सितंबर की सुबह उसी सुरंग से जीवित बचाया गया। उनकी पत्नी लक्ष्मी कुमारी साह ने बताया कि खबर मिलने पर पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
जलविद्युत परियोजनाओं में अभी भी कितने लोग लापता हैं?
इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 945 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। कबीर महाजन और संजय साह की सुरक्षित वापसी ने इन परिवारों में उम्मीद जगाई है।
राष्ट्र प्रेस
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