4 सितंबर 2026
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मध्य प्रदेश CM मोहन यादव ने जन्माष्टमी पर बच्चों को खिलाई माखन-मिश्री, मटकी फोड़ कर मनाया उत्सव

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मध्य प्रदेश CM मोहन यादव ने जन्माष्टमी पर बच्चों को खिलाई माखन-मिश्री, मटकी फोड़ कर मनाया उत्सव

सारांश

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में जन्माष्टमी पर नन्हें गोपाल को गोद में लेकर मटकी फोड़ी और बच्चों को माखन-मिश्री खिलाई। उन्होंने भगवान कृष्ण के जीवन को आज भी प्रासंगिक बताते हुए सांदीपनि आश्रम की देशभक्ति-आधारित शिक्षा के प्रसंग को साझा किया।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 4 सितंबर को भोपाल स्थित CM आवास में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई।
उन्होंने नन्हें गोपाल को गोद में लेकर मटकी फोड़ी और बच्चों को माखन-मिश्री खिलाई।
CM आवास पर महारास का आयोजन हुआ और राधा-कृष्ण बने बच्चों ने उत्सव में भाग लिया।
यादव ने सांदीपनि आश्रम में भगवान कृष्ण की शिक्षा और सुदामा से मित्रता के प्रसंग का उल्लेख किया।
महर्षि सांदीपनि ने 64 कलाओं व 14 विद्याओं से कृष्ण का व्यक्तित्व निर्मित किया और 11 वर्षों तक देशभक्तों को शिक्षा दी।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 4 सितंबर को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरी भक्ति और उल्लास के साथ मनाया। उन्होंने नन्हें गोपाल को गोद में उठाकर मटकी फोड़ी और बच्चों को अपने हाथों से माखन-मिश्री खिलाई।

मुख्यमंत्री आवास में भक्तिमय माहौल

मुख्यमंत्री निवास परिसर में चारों ओर कृष्ण भजनों की गूँज रही और महारास का आयोजन हुआ। राधा-कृष्ण के स्वरूप में सजे बच्चों ने उत्सव में जमकर भाग लिया। मुख्यमंत्री यादव ने स्वयं बच्चों के बीच उपस्थित रहकर पर्व की रौनक को और बढ़ाया।

भगवान कृष्ण के जीवन पर मुख्यमंत्री के विचार

इस अवसर पर मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का इतिहास गौरवशाली है और उनके जीवन के सभी पक्ष आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा, 'हमारा देश राम-कृष्ण के नाम से जाना जाता है। दोनों ने तमाम चुनौतियों और कठिनाइयों के बीच भी लोगों को मार्गदर्शन देने के लिए अद्भुत मानव रूप धारण किया।'

यादव ने यह भी कहा कि जेल में जन्म लेना अपने आप में बड़ी चुनौती थी, फिर भी भगवान श्रीकृष्ण ने यह संदेश दिया कि कष्टों से घबराना नहीं, बल्कि उनसे पार पाकर मुस्कुराते रहना चाहिए।

कालिया मर्दन से कंस वध तक — प्रेरणा के प्रसंग

मुख्यमंत्री ने कहा कि कालिया मर्दन, इंद्र के घमंड को चूर करना और कंस वध जैसे प्रसंग आज भी जीवन में प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कठिन समय में भी शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया और सांदीपनि आश्रम में अध्ययन कर दुनिया के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी आश्रम में उनकी सुदामा से मित्रता हुई, जो सच्ची मैत्री का आदर्श बनी।

महर्षि सांदीपनि और देशभक्ति की शिक्षा

यादव ने बताया कि उस युग में महर्षि सांदीपनि की ख्याति इतनी थी कि विश्व उनके सामने नतमस्तक था। उन्होंने 64 कलाओं और 14 विद्याओं से भगवान श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व का निर्माण किया। मुख्यमंत्री ने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि देश-विरोधी तत्वों ने महर्षि से अपने बच्चों को पढ़ाने का आग्रह किया, परंतु महर्षि ने स्पष्ट कहा कि वे शिक्षा केवल देशभक्तों को देंगे। इस पर उन तत्वों ने ऋषि के 6 माह के बालक को बंधक बना लिया, किंतु महर्षि उज्जैन आ गए और उन्होंने 11 वर्षों तक बच्चों को शिक्षा दी।

आगे क्या

मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित यह कार्यक्रम सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जन्माष्टमी को सांस्कृतिक पर्व के रूप में मनाने की यह परंपरा राज्य में धार्मिक और सामाजिक समरसता को आगे बढ़ाने की दिशा में एक सतत प्रयास के रूप में देखी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित सांस्कृतिक संदेश भी है — जो भाजपा की 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' की राजनीतिक लाइन के अनुरूप है। सांदीपनि आश्रम और देशभक्ति-आधारित शिक्षा के प्रसंग को उजागर करना महज धार्मिक व्याख्यान नहीं, बल्कि एक सुचिंतित आख्यान है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह सांस्कृतिक जुड़ाव राज्य की शिक्षा या पाठ्यक्रम नीति में कोई ठोस परिवर्तन लाता है, या यह केवल प्रतीकात्मक राजनीति तक सीमित रहता है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जन्माष्टमी कहाँ और कैसे मनाई?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 4 सितंबर को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई। उन्होंने नन्हें गोपाल को गोद में लेकर मटकी फोड़ी और बच्चों को अपने हाथों से माखन-मिश्री खिलाई।
CM आवास पर जन्माष्टमी कार्यक्रम में क्या-क्या हुआ?
मुख्यमंत्री निवास में कृष्ण भजन गूँजे, महारास का आयोजन हुआ और राधा-कृष्ण के वेश में सजे बच्चों ने उत्सव में भाग लिया। यह आयोजन भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास का संगम रहा।
मुख्यमंत्री यादव ने भगवान कृष्ण के जीवन से क्या संदेश दिया?
यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण का जीवन आज भी प्रासंगिक है — जेल में जन्म से लेकर कंस वध तक, हर प्रसंग यह सिखाता है कि कष्टों से घबराएँ नहीं, बल्कि उनसे पार पाकर आगे बढ़ें।
सांदीपनि आश्रम का जन्माष्टमी संदर्भ में क्या महत्व बताया गया?
मुख्यमंत्री ने बताया कि महर्षि सांदीपनि ने 64 कलाओं और 14 विद्याओं से भगवान कृष्ण का व्यक्तित्व निर्मित किया। उन्होंने देश-विरोधी तत्वों के दबाव के बावजूद केवल देशभक्तों को शिक्षा देने का संकल्प लिया और 11 वर्षों तक बच्चों को पढ़ाया।
भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का उल्लेख क्यों किया गया?
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि सांदीपनि आश्रम में ही भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता हुई, जो सच्ची और निःस्वार्थ मैत्री का आदर्श उदाहरण है। यह प्रसंग सामाजिक समरसता और मित्रता के मूल्यों को रेखांकित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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