24 अगस्त 2026
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मध्य प्रदेश के स्कूलों में 1 से 3 सितंबर तक तीन दिवसीय कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव, शिक्षा विभाग का आदेश जारी

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मध्य प्रदेश के स्कूलों में 1 से 3 सितंबर तक तीन दिवसीय कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव, शिक्षा विभाग का आदेश जारी

सारांश

मध्य प्रदेश सरकार ने स्कूलों में 1 से 3 सितंबर तक तीन दिवसीय कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव का आदेश दिया है — लीलाओं का मंचन, गीता ज्ञान और मिथक-खंडन व्याख्यान इसके केंद्र में हैं। यह कदम शिक्षा में सांस्कृतिक मूल्यों के समावेश की राज्य सरकार की नीति को आगे बढ़ाता है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 1 से 3 सितंबर 2025 तक तीन दिवसीय कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव मनाया जाएगा।
लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालक रविंद्र कुमार सिंह ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किया।
आयोजन में गीता ज्ञान , लीला-मंचन, नृत्य, नाटक और भ्रामक मिथक-खंडन व्याख्यान शामिल हैं।
सांदीपनि विद्यालयों में गुरु-शिष्य परंपरा पर विशेष परिचर्चा और नाट्य मंचन होगा।
BJP प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने निर्णय को 'सनातन संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने वाला सराहनीय कदम' बताया।

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 1 सितंबर से 3 सितंबर 2025 तक तीन दिवसीय श्री कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव आयोजित किया जाएगा। लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालक रविंद्र कुमार सिंह ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया है। यह निर्देश राज्य के संस्कृति विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप दिए गए हैं।

आयोजन की रूपरेखा

शिक्षा विभाग द्वारा तय कार्यक्रम के अंतर्गत इन तीन दिनों में विविध सांस्कृतिक गतिविधियाँ और प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएंगी। भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का मंचन होगा तथा उनकी शिक्षाओं, गीता ज्ञान और विभिन्न प्रसंगों पर आधारित नाट्य एवं नृत्य प्रस्तुतियाँ भी होंगी। इसके अतिरिक्त भगवान श्री कृष्ण से जुड़े भ्रामक मिथकों को तोड़ने के उद्देश्य से विशेष व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे।

सांदीपनि विद्यालयों में विशेष कार्यक्रम

प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों में इस उत्सव के दौरान विशेष आयोजन होंगे। इनमें सांदीपनि गुरु से जुड़े प्रसंगों और गुरु-शिष्य परंपरा पर परिचर्चा एवं नाट्य मंचन शामिल हैं। विभाग के अनुसार इस पूरे आयोजन का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपराओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के प्रति जागरूकता व समझ विकसित करना है।

भाजपा की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'स्कूलों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के आयोजन का मध्यप्रदेश सरकार का निर्णय हमारी सनातन संस्कृति, संस्कारों और श्रीकृष्ण के जीवन मूल्यों से नई पीढ़ी को जोड़ने वाला सराहनीय कदम है।' यादव ने यह भी कहा कि 'भगवान श्रीकृष्ण किसी एक वर्ग की आस्था नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और हमारी गौरवशाली परंपरा के प्रतीक हैं।'

आगे क्या

यह आयोजन 24 अगस्त 2025 को जारी आदेश के बाद प्रदेशभर के स्कूलों में लागू होगा। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब मध्य प्रदेश सरकार शिक्षा में सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के समावेश पर जोर दे रही है। आने वाले दिनों में जिला स्तर पर तैयारियाँ शुरू होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पाठ्यक्रम-सन्निकट पहल है। सवाल यह है कि इन तीन दिनों में नियमित शैक्षणिक गतिविधियों का क्या होगा और क्या सभी समुदायों के विद्यार्थियों की भागीदारी स्वैच्छिक रहेगी — इस पर स्पष्टता अभी नहीं है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश के स्कूलों में कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव कब होगा?
यह तीन दिवसीय उत्सव 1 सितंबर से 3 सितंबर 2025 तक प्रदेश के सरकारी स्कूलों में आयोजित किया जाएगा। लोक शिक्षण संचालनालय ने 24 अगस्त को सभी जिला अधिकारियों को आदेश जारी किया है।
इस उत्सव में स्कूलों में कौन-कौन से कार्यक्रम होंगे?
उत्सव में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का मंचन, गीता ज्ञान पर आधारित नाटक व नृत्य, भ्रामक मिथकों को तोड़ने के लिए व्याख्यान और विभिन्न प्रतियोगिताएँ शामिल हैं। सांदीपनि विद्यालयों में गुरु-शिष्य परंपरा पर विशेष परिचर्चा भी होगी।
यह आदेश किसने और किस आधार पर जारी किया?
लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालक रविंद्र कुमार सिंह ने यह आदेश जारी किया। यह निर्देश राज्य के संस्कृति विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप दिए गए हैं।
इस आयोजन का उद्देश्य क्या है?
शिक्षा विभाग के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपराओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के प्रति समझ विकसित करना है।
BJP ने इस फैसले पर क्या कहा?
BJP के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने इसे 'सनातन संस्कृति, संस्कारों और श्रीकृष्ण के जीवन मूल्यों से नई पीढ़ी को जोड़ने वाला सराहनीय कदम' बताया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण किसी एक वर्ग की आस्था नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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