एयर इंडिया ने फुकेत-दिल्ली फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड को बर्खास्त किया, ड्रग टेस्ट में साइकोएक्टिव पदार्थ पाया गया
सारांश
मुख्य बातें
एयर इंडिया ने 4 सितंबर 2026 को फुकेत-दिल्ली उड़ान (AI-2379) के 'पायलट-इन-कमांड' (PIC) को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया। यह कार्रवाई 4 अगस्त की उस घटना के बाद हुई जब उड़ान ने अचानक ऊंचाई खो दी थी और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की रिपोर्ट में PIC का ड्रग टेस्ट नॉन-नेगेटिव पाया गया। इस हादसे में कम से कम 20 यात्री और 4 क्रू सदस्य घायल हो गए थे।
मुख्य घटनाक्रम
उड़ान AI-2379 में कुल 145 लोग सवार थे — 137 यात्री, 6 केबिन क्रू और 2 पायलट। 4 अगस्त को उड़ान के दौरान विमान ने अचानक ऊंचाई खो दी, जिससे दर्जनों लोग घायल हो गए। घटना के बाद AAIB ने जांच शुरू की और दोनों क्रू सदस्यों की नई दिल्ली में उड़ान के बाद मेडिकल स्क्रीनिंग कराई गई।
ब्रेथलाइजर टेस्ट में दोनों पायलटों के नतीजे संतोषजनक रहे। हालांकि, साइकोएक्टिव या नशीले पदार्थ का पता लगाने वाले टेस्ट में पायलट-इन-कमांड का सैंपल नॉन-नेगेटिव पाया गया, जबकि को-पायलट का सैंपल नेगेटिव रहा।
कन्फर्मेशन टेस्ट के नतीजे
AAIB की रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक नतीजों के बाद दोनों क्रू सदस्यों के ब्लड सैंपल पैथोलॉजिकल लैब भेजे गए। कन्फर्मेशन टेस्ट में भी PIC का सैंपल नॉन-नेगेटिव पाया गया। रिपोर्ट में कहा गया, 'पीआईसी का सैंपल नॉन-नेगेटिव पाया गया... को-पायलट का सैंपल दोनों टेस्ट में नेगेटिव पाया गया।' इसके साथ ही AAIB ने नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से इस मामले में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने की मांग की।
एयर इंडिया की प्रतिक्रिया
एयर इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक पोस्ट में कहा कि 'एयर इंडिया के लिए सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।' एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा, फिटनेस या नियमों के उल्लंघन को लेकर उसकी 'जीरो-टॉलरेंस' नीति के तहत पायलट को तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त किया गया है। एयरलाइन ने यह भी बताया कि तकनीकी और अन्य पहलुओं से संबंधित विस्तृत जांच अभी जारी है।
आम जनता और विमानन सुरक्षा पर असर
यह मामला भारतीय विमानन क्षेत्र में पायलट की मेडिकल जांच और नशीले पदार्थों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। DGCA के नियमों के तहत उड़ान से पहले और बाद में पायलटों की मेडिकल जांच अनिवार्य है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि साइकोएक्टिव पदार्थों की व्यापक स्क्रीनिंग की जरूरत पर इस घटना ने नए सिरे से ध्यान दिलाया है।
क्या होगा आगे
AAIB की विस्तृत जांच अभी जारी है और तकनीकी कारणों की भी पड़ताल की जा रही है। DGCA से प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की उम्मीद है। यह घटना भारतीय विमानन नियामक ढाँचे में पायलट स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल को और कड़ा करने की दिशा में नीतिगत बहस को गति दे सकती है।