सोनाक्षी बत्रा बोलीं — 'कृष्ण ने अनगिनत भूमिकाएं निभाईं, पर खुद को कभी नहीं खोया'
सारांश
मुख्य बातें
'जगधात्री' में मुख्य किरदार निभा रही अभिनेत्री सोनाक्षी बत्रा ने जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण से अपने गहरे जुड़ाव और उनके जीवन से मिलने वाली प्रेरणा को साझा किया। उन्होंने बताया कि अभिनय की दुनिया में कदम रखने के बाद उन्हें अपने पिता की वह सलाह और अधिक सार्थक लगने लगी, जो वे बचपन में हर मंच-प्रदर्शन से पहले देते थे।
बचपन से चली आ रही आस्था
सोनाक्षी ने बताया कि जब वे छोटी थीं और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर मंच पर प्रस्तुति देने जाती थीं, तब उनके पिता हमेशा उन्हें भगवान कृष्ण का आशीर्वाद लेने की सलाह देते थे। उस समय इस बात की गहराई उनकी समझ में नहीं आती थी। लेकिन आज, जब वे स्वयं अभिनय जगत का हिस्सा हैं, तो पिता के उन शब्दों का अर्थ उन्हें स्पष्ट रूप से समझ आता है।
कृष्ण और अभिनेता — एक समानांतर
सोनाक्षी ने कहा, 'भगवान कृष्ण ने कई अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। वह बेटे भी थे, दोस्त भी, प्रेमी भी, मार्गदर्शक भी, रणनीतिकार और राजा भी — इन सभी भूमिकाओं के बीच उन्होंने कभी अपना असली स्वरूप नहीं खोया।' उन्होंने इस दर्शन को अभिनय से जोड़ते हुए कहा कि एक कलाकार को भी हर किरदार की भावनाओं और संसार में डूबना पड़ता है, लेकिन इन सबके बीच अपनी असली पहचान को बनाए रखना ही अभिनय की सबसे बड़ी खूबसूरती है।
जन्माष्टमी की मीठी पारिवारिक यादें
अभिनेत्री ने जन्माष्टमी से जुड़ी बचपन की स्मृतियाँ भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके घर में लड्डू गोपाल को फूलों और सुंदर वस्त्रों से सजाया जाता था, झाँकियाँ तैयार की जाती थीं और उनकी माँ खासतौर पर खीर और माखन का भोग बनाती थीं। उन्होंने कहा, 'इन छोटी-छोटी परंपराओं से घर का माहौल अपनेपन और खुशी से भर जाता था और ये यादें जिंदगीभर दिल में बसी रहती हैं।'
दही हांडी से टीमवर्क का पाठ
सोनाक्षी ने दही हांडी की परंपरा को एक व्यापक जीवन-दर्शन से जोड़ा। उनके अनुसार, 'एक अकेला व्यक्ण शायद हांडी तक पहुँच सके, लेकिन वहाँ तक पहुँचने के लिए पूरी टीम की ज़रूरत होती है। हर हाथ अहम है और हर व्यक्ति दूसरे को संभालता है।' उन्होंने कहा कि यह सिद्धांत केवल इस उत्सव तक सीमित नहीं, बल्कि हर काम और हर पेशे पर लागू होता है।
कृष्ण का संदेश — भूमिकाएं निभाओ, खुद को मत खोओ
अपनी बात समेटते हुए सोनाक्षी ने कहा, 'आज मेरे लिए कृष्ण का अर्थ यह साहस है कि इंसान जिंदगी में कई भूमिकाएं निभाए, लेकिन खुद को न खोए। अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का भरोसा रखे और जो उसके हाथ में नहीं है, उसे ईश्वर पर छोड़ने की समझ भी रखे।' यह विचार उनके अभिनय-दर्शन और व्यक्तिगत जीवन दोनों में झलकता है।