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एसआईआर विवाद: महाराष्ट्र में 2 करोड़ से अधिक नाम हटाने का दावा, विपक्ष ने भाजपा और चुनाव आयोग को घेरा

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एसआईआर विवाद: महाराष्ट्र में 2 करोड़ से अधिक नाम हटाने का दावा, विपक्ष ने भाजपा और चुनाव आयोग को घेरा

सारांश

महाराष्ट्र में एसआईआर के तहत 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने के दावे के साथ विपक्ष ने भाजपा और चुनाव आयोग पर सीधा निशाना साधा है। पश्चिम बंगाल का मामला पहले से अदालत में है। यह विवाद चुनावी पारदर्शिता की बहस को नई धार दे रहा है।

मुख्य बातें

विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया के तहत 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
एनसीपी (शरद पवार गुट) नेता क्लाइड क्रास्टो के अनुसार मतदाता सूची 9 करोड़ से घटकर 7–7.5 करोड़ रह गई है — करीब 21% की कमी।
मुंबई में अकेले 36 लाख नाम हटाए जाने का दावा किया गया है।
शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे ने पश्चिम बंगाल में 98 लाख मतदाताओं के मामले का हवाला दिया, जो अदालत में लंबित है।
कांग्रेस नेता वर्षा गायकवाड़ ने विधानसभा और बीएमसी चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
विपक्ष ने चुनाव आयोग से सार्वजनिक स्पष्टीकरण और स्वतंत्र जाँच की माँग की।

मुंबई में 4 सितंबर को विपक्षी दलों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग पर तीखे आरोप लगाए कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का उपयोग राजनीतिक हित साधने के लिए किया जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेताओं ने यह आरोप तब लगाए जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और वोट चोरी का मुद्दा उठाया।

महाराष्ट्र में कितने नाम हटाए गए

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता क्लाइड क्रास्टो ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत महाराष्ट्र में 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की मतदाता सूची में पहले करीब 9 करोड़ नाम थे, जो अब घटकर लगभग 7 से 7.5 करोड़ रह गए हैं — यानी कथित तौर पर 21 प्रतिशत नाम हटाए गए हैं। क्रास्टो ने सवाल उठाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बड़ी संख्या में नाम जोड़े गए थे, तो अब इतनी बड़ी तादाद में नाम क्यों और कैसे हटाए जा रहे हैं।

मुंबई का विशेष उल्लेख करते हुए क्रास्टो ने कहा कि शहर में करीब 36 लाख लोगों के नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या किसी विशेष वर्ग के मतदाताओं को लक्षित किया जा रहा है, और चुनाव आयोग तथा भाजपा से महाराष्ट्र की जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

पश्चिम बंगाल का संदर्भ और न्यायालय में लंबित मामला

शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे ने दावा किया कि महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया के तहत 2 करोड़ 38 लाख से अधिक लोगों के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ भी करीब 98 लाख मतदाताओं के साथ इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी, और वह मामला अभी अदालत में लंबित है। दानवे ने आरोप लगाया कि यदि वे 98 लाख नाम सूची से नहीं हटाए गए होते, तो पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम भिन्न हो सकते थे। उनके अनुसार, भाजपा अलग-अलग राज्यों में इस प्रक्रिया का उपयोग अपनी चुनावी रणनीति के तहत कर रही है।

कांग्रेस की चिंता: पिछले चुनावों की वैधता पर सवाल

कांग्रेस नेता वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि अगर करीब 2 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा सही है, तो इससे पहले हुए विधानसभा चुनाव और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव की प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि संविधान के तहत चुनाव आयोग की सर्वोच्च जिम्मेदारी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना तथा प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना है।

शिवसेना (यूबीटी) का पुराना आरोप और चुनाव आयोग की चुप्पी

शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी पार्टी ने कथित वोटों की धांधली को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। सावंत ने चेतावनी दी कि अगर मतदाता सूची से नाम हटाकर बाद में उन्हें राजनीतिक लाभ के लिए दोबारा जोड़ा जाता है, तो यह पूरी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को संदिग्ध बना देगा। यह ऐसे समय में आया है जब देश में चुनावी पारदर्शिता को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज हो रही है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल से जुड़ा एसआईआर मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से सार्वजनिक स्पष्टीकरण और स्वतंत्र जाँच की माँग की है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है या नहीं, और क्या यह मुद्दा संसद में भी उठाया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह केवल चुनावी गणित का नहीं, बल्कि संवैधानिक मताधिकार का प्रश्न है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (SIR) प्रक्रिया क्या है और इसका विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष सारांश पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची को अद्यतन करता है — अपात्र या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाकर और नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़कर। विवाद इसलिए है क्योंकि विपक्षी दलों का आरोप है कि महाराष्ट्र में इस बार 2 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए, जो कथित तौर पर किसी विशेष वर्ग को लक्षित करता है।
महाराष्ट्र में कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं?
विपक्षी नेताओं के दावे के अनुसार महाराष्ट्र की मतदाता सूची करीब 9 करोड़ से घटकर 7 से 7.5 करोड़ रह गई है, यानी लगभग 21% नाम हटाए गए हैं। शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे ने 2 करोड़ 38 लाख से अधिक नाम हटाए जाने का दावा किया है। चुनाव आयोग ने अभी तक इन आँकड़ों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पश्चिम बंगाल में एसआईआर का मामला अदालत में क्यों है?
पश्चिम बंगाल में भी एसआईआर प्रक्रिया के तहत करीब 98 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे ने दावा किया कि यदि वे नाम नहीं हटाए गए होते, तो वहाँ के चुनाव परिणाम भिन्न हो सकते थे।
विपक्ष की मुख्य माँग क्या है?
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से महाराष्ट्र की जनता के सामने मतदाता सूची पुनरीक्षण का पूरा डेटा सार्वजनिक करने और स्वतंत्र जाँच की माँग की है। कांग्रेस नेता वर्षा गायकवाड़ ने यह भी कहा कि इन आरोपों की रोशनी में पिछले विधानसभा और बीएमसी चुनावों की प्रक्रिया की भी समीक्षा होनी चाहिए।
भाजपा पर विपक्ष का क्या आरोप है?
विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा एसआईआर प्रक्रिया का उपयोग अपनी चुनावी रणनीति के तहत अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है। शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत ने यह भी आशंका जताई कि हटाए गए नाम बाद में राजनीतिक सुविधा के अनुसार दोबारा जोड़े जा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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