17 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाराष्ट्र वोटर लिस्ट SIR: NCP (SP) ने CEO चोकलिंगम को सौंपा सुधार ज्ञापन, 1.08 करोड़ नाम हटाने पर उठाए सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाराष्ट्र वोटर लिस्ट SIR: NCP (SP) ने CEO चोकलिंगम को सौंपा सुधार ज्ञापन, 1.08 करोड़ नाम हटाने पर उठाए सवाल

सारांश

NCP (SP) ने महाराष्ट्र के CEO को SIR प्रक्रिया में व्यापक सुधार का ज्ञापन सौंपा — 1.08 करोड़ नाम हटाने पर सवाल, BLO पर अत्यधिक दबाव की शिकायत, और GPS ट्रैकिंग से लेकर AI-आधारित वेरिफिकेशन तक की माँग। मतदाता अधिकारों की यह लड़ाई अगले चुनाव से पहले की असली जंग है।

मुख्य बातें

NCP (SP) के प्रतिनिधिमंडल ने 17 अगस्त को महाराष्ट्र CEO एस.
चोकलिंगम को SIR प्रक्रिया में सुधार का ज्ञापन सौंपा।
वोटर लिस्ट से अब तक 1.08 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं — पार्टी ने इस पर गंभीर चिंता जताई।
BLO पर अत्यधिक कार्यभार, अधूरे पते, डेटा मैपिंग त्रुटियाँ और 'टेबल सर्वे' शॉर्टकट प्रमुख शिकायतें।
माँग: 'शिफ्टेड' या 'अनट्रेसेबल' घोषित करने से पहले कम से कम दो बार घर जाना और फोन/SMS संपर्क अनिवार्य हो।
तकनीकी सुधारों में GPS जियो-टैगिंग , AI टूल , फेशियल रिकग्निशन और ओपन डैशबोर्ड की माँग।
प्रस्तावित नाम-हटाने की सूची तीन महीने के भीतर सार्वजनिक करने और अपील का अधिकार देने की माँग।

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) [NCP (SP)] के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार, 17 अगस्त को मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस. चोकलिंगम को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें राज्यव्यापी मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया में आमूल सुधार की माँग की गई। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विधायक रोहित पवार और पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख शशिकांत शिंदे ने किया। पार्टी के अनुसार, अब तक वोटर लिस्ट से 1.08 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।

मुख्य खामियाँ जो प्रतिनिधिमंडल ने उठाईं

ज्ञापन में कामकाजी, तकनीकी और प्रशासनिक — तीनों स्तरों पर गंभीर कमियाँ गिनाई गईं। इनमें अधूरे पते, फिजिकल वेरिफिकेशन में बाधाएँ, डेटा मैपिंग की त्रुटियाँ, एक ही नाम का बार-बार दर्ज होना, परिवारों की गलत मैपिंग और गलत पते असाइन करना प्रमुख हैं। पवार ने पत्रकारों को बताया कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर अत्यधिक कार्यभार के कारण ये गलतियाँ हो रही हैं।

गौरतलब है कि SIR प्रक्रिया के तहत किसी मतदाता को 'शिफ्टेड', 'परमानेंटली शिफ्टेड' या 'अनट्रेसेबल' घोषित करना उसके मताधिकार को सीधे प्रभावित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में अगले विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं।

NCP (SP) की प्रमुख माँगें

पार्टी ने माँग की कि BLO घर-घर जाकर सख्त वेरिफिकेशन करें और 'टेबल सर्वे' जैसे शॉर्टकट से बचें। किसी भी मतदाता को 'शिफ्टेड' या 'अनट्रेसेबल' घोषित करने से पहले अधिकारियों को कम से कम दो बार उनके घर जाना होगा और फोन/SMS के जरिए संपर्क करने का प्रयास अनिवार्य किया जाए।

इसके साथ ही, हर वेरिफिकेशन विजिट के लिए अनिवार्य GPS/जियो-टैगिंग, टाइमस्टैम्प और फोटोग्राफिक साक्ष्य की व्यवस्था, तथा BLO के लॉगिन, डिवाइस, IP एड्रेस और SIR ऐप के उपयोग का नियमित डिजिटल ऑडिट करने की भी माँग की गई। पार्टी ने प्रस्ताव रखा कि नाम जोड़ने, हटाने और सुधारने की जानकारी रियल-टाइम में जिलेवार ओपन डैशबोर्ड पर प्रकाशित की जाए।

तकनीकी समाधानों पर जोर

प्रतिनिधिमंडल ने डुप्लिकेट एंट्री घटाने के लिए OTP-आधारित वेरिफिकेशन, AI टूल, फेशियल रिकग्निशन, फजी मैचिंग एल्गोरिदम और नेशनल डेटा इंटीग्रेशन मॉडल के साथ एकीकरण अपनाने पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, जिला-स्तरीय मॉनिटरिंग कमिटी, गलत मैपिंग के लिए स्पेशल रिव्यू मैकेनिज्म, BLO के लिए SOP प्रशिक्षण और अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की भी माँग की गई।

जवाबदेही और अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग

ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि लापरवाही बरतने, वेरिफिकेशन न करने या जानबूझकर गलत एंट्री करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, नाम हटाने के प्रस्तावित सूचियों को अपील और सुनवाई के लिए तीन महीने के भीतर सार्वजनिक किया जाए।

रोहित पवार ने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रस्तुति का उद्देश्य चुनावी व्यवस्था में सटीकता और जनता का भरोसा बढ़ाना है, न कि अविश्वास पैदा करना। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ मुद्दों पर CEO की ओर से संतोषजनक जवाब मिला, जबकि कई मामले केंद्रीय चुनाव आयोग के दायरे में आते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग इन सुझावों पर क्या रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि चुनाव आयोग इन्हें लागू करने की इच्छाशक्ति दिखाएगा या नहीं। BLO पर दबाव की समस्या नई नहीं है — यह हर चुनाव-पूर्व संशोधन में उठती है और हर बार अनसुनी रह जाती है। जब तक जवाबदेही का ढाँचा कागज़ से ज़मीन पर नहीं उतरता, GPS टैगिंग और AI टूल भी महज तकनीकी सजावट बनकर रह सकते हैं।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) क्या है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची को अद्यतन करता है — नए नाम जोड़ता है, गलत या दोहरी एंट्री हटाता है और पते सुधारता है। महाराष्ट्र में इस प्रक्रिया के दौरान अब तक 1.08 करोड़ नाम हटाए जाने की बात सामने आई है।
NCP (SP) ने CEO को ज्ञापन क्यों सौंपा?
पार्टी का कहना है कि SIR प्रक्रिया में BLO पर अत्यधिक दबाव, डेटा मैपिंग की गलतियाँ और 'टेबल सर्वे' जैसे शॉर्टकट के कारण वैध मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं। ज्ञापन में इन खामियों को दूर करने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों की माँग की गई है।
BLO पर अत्यधिक दबाव से क्या समस्याएँ हो रही हैं?
विधायक रोहित पवार के अनुसार, BLO पर काम का बोझ अधिक होने से वे घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करने के बजाय 'टेबल सर्वे' का सहारा ले रहे हैं, जिससे अधूरे पते, गलत मैपिंग और दोहरी एंट्री जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं।
NCP (SP) ने कौन-से तकनीकी सुधार माँगे हैं?
पार्टी ने GPS/जियो-टैगिंग, AI-आधारित फेशियल रिकग्निशन, OTP वेरिफिकेशन, फजी मैचिंग एल्गोरिदम और नेशनल डेटा इंटीग्रेशन मॉडल के साथ एकीकरण की माँग की है। साथ ही, नाम जोड़ने-हटाने की जानकारी रियल-टाइम ओपन डैशबोर्ड पर प्रकाशित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
इस ज्ञापन पर CEO ने क्या प्रतिक्रिया दी?
रोहित पवार ने बताया कि कुछ मुद्दों पर CEO की ओर से संतोषजनक जवाब मिला, जबकि कई मामले केंद्रीय चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और उन्हें वहाँ भेजा जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले