मतदाता सूची से 5 लाख नाम हटने का खतरा: किरीट सोमैया ने चुनाव आयोग से विशेष प्रावधान की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता किरीट सोमैया ने 21 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी से मुलाकात कर मतदाता सूची से जुड़ी एक गंभीर चिंता उठाई — मुंबई और महाराष्ट्र में पुनर्विकास परियोजनाओं के कारण अस्थायी रूप से विस्थापित 5 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में दर्ज नहीं हो पा रहे। यदि समय पर समाधान नहीं निकला, तो इन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं।
मुख्य मुद्दा: विस्थापित मतदाताओं की पहचान
सोमैया ने बताया कि मुंबई और महाराष्ट्र में चल रही पुनर्विकास तथा झोपड़पट्टी पुनर्विकास परियोजनाओं के चलते बड़ी संख्या में मतदाता अस्थायी रूप से अन्य स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसे पाँच लाख से अधिक मतदाताओं के नाम विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।'
उनकी मांग है कि इन मतदाताओं के नाम उनके मूल निवास स्थान की मतदाता सूची में बने रहें, क्योंकि वे भविष्य में वहीं वापस लौटने वाले हैं। यह मुद्दा केवल BJP तक सीमित नहीं है — महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित विभिन्न पक्षों ने भी इसे उठाया है।
मुंबई में डिजिटलाइजेशन की धीमी रफ्तार
सोमैया ने यह भी रेखांकित किया कि राज्य के अन्य हिस्सों में जहाँ SIR प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है, वहीं मुंबई में डिजिटलाइजेशन की गति अपेक्षाकृत धीमी है। उन्होंने चुनाव आयोग से अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती कर इस प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया। उनके अनुसार, चुनाव आयोग ने इस अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
सीजेपी विरोध प्रदर्शन और विपक्षी आंदोलन पर प्रतिक्रिया
बैठक के बाद सोमैया ने सीजेपी विरोध प्रदर्शन और जंतर-मंतर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भागीदारी पर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में विपक्ष को आंदोलन करने का पूरा अधिकार है और किसी भी मुद्दे पर आवाज उठाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।' हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर आंदोलन को कानून और नियमों के दायरे में रहकर, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में चुनावी तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और मतदाता सूची का शुद्धिकरण एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। गौरतलब है कि शहरी पुनर्विकास के कारण मतदाता विस्थापन की यह समस्या केवल मुंबई तक सीमित नहीं, बल्कि देश के अन्य महानगरों में भी देखी जाती है। चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और विशेष प्रावधान की दिशा में उठाए जाने वाले कदम आने वाले दिनों में स्पष्ट होंगे।