18 अगस्त 2026
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महाराष्ट्र एसआईआर: 9.70 करोड़ में से 2 करोड़ मतदाता सूची से हटे, रोहित पवार ने उठाए गंभीर सवाल

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महाराष्ट्र एसआईआर: 9.70 करोड़ में से 2 करोड़ मतदाता सूची से हटे, रोहित पवार ने उठाए गंभीर सवाल

सारांश

महाराष्ट्र में मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) विवाद गहराया — NCP-SP विधायक रोहित पवार का दावा है कि 9.70 करोड़ में से 2 करोड़ नाम हटाए गए, और यह संख्या 2.5 करोड़ तक पहुँच सकती है। पारदर्शिता के 80% सवालों के जवाब असंतोषजनक रहे।

मुख्य बातें

NCP-SP विधायक रोहित पवार ने 18 अगस्त 2026 को दावा किया कि महाराष्ट्र में 9.70 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 2 करोड़ नाम एसआईआर प्रक्रिया में हटाए गए।
पवार के अनुसार हटाए गए नामों की संख्या बढ़कर 2.2 करोड़ से 2.5 करोड़ तक पहुँच सकती है।
पारदर्शिता पर उठाए गए सवालों में करीब 80 प्रतिशत जवाब संतोषजनक नहीं थे; अधिकारियों ने अधिकांश मामले चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र का बताया।
पवार ने आरोप लगाया कि हटाए गए नामों में BJP -विरोधी विचारधारा के मतदाता हो सकते हैं — हालाँकि इसका कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
MPSC पेपर लीक मामले में जाँच रिपोर्ट 1 या 2 सितंबर तक सार्वजनिक करने का आश्वासन दिया गया है।

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) [NCP-SP] के विधायक रोहित पवार ने 18 अगस्त 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, राज्य में कुल 9 करोड़ 70 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 2 करोड़ नाम सूची से हटाए जा चुके हैं — और यह संख्या आगे बढ़कर 2.2 करोड़ से 2.5 करोड़ तक पहुँच सकती है।

मुख्य आरोप और दावे

रोहित पवार ने स्पष्ट किया कि मृत व्यक्तियों या स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाना एक स्वीकृत प्रक्रिया है, परंतु उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया में वास्तविक और जीवित मतदाताओं के नाम भी गलती से हटाए जा सकते हैं। उनके अनुसार, जिन 2 करोड़ लोगों का डेटा सत्यापन के दौरान उपलब्ध नहीं हो सका, उनके नाम खारिज कर दिए गए।

पवार ने यह भी आरोप लगाया कि हटाए गए नामों में ऐसे लोग हो सकते हैं जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा से सहमत नहीं हैं। हालाँकि, यह उनका राजनीतिक दावा है और उन्होंने इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।

पारदर्शिता पर सवाल

रोहित पवार ने बताया कि उन्होंने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर कई सवाल उठाए, लेकिन अधिकांश मामलों में चुनाव आयोग का हवाला देते हुए कहा गया कि संबंधित जानकारी संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उनके अनुसार, मिले जवाबों में करीब 80 प्रतिशत संतोषजनक नहीं थे।

एसआईआर की समय सीमा बढ़ाए जाने की संभावना पर पवार ने कहा कि ऐसा नहीं किया जाएगा, क्योंकि मतदाताओं का डेटा पहले ही एकत्र किया जा चुका है। जिन मतदाताओं का डेटा उपलब्ध है, उनकी मैपिंग की जाएगी।

ट्रंप और भारत की चुनाव प्रणाली पर टिप्पणी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'सेव अमेरिका एक्ट' के समर्थन में भारत की चुनाव प्रणाली का उल्लेख किए जाने पर रोहित पवार ने ट्रंप की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने भारत के हितों से जुड़े मुद्दों पर कभी समर्थन नहीं किया और उनकी नीतियों से भारत को कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पवार ने भारतीय नेतृत्व पर भी अमेरिका के सामने झुकने का आरोप लगाया।

MPSC पेपर लीक विवाद

रोहित पवार ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा अन्न एवं औषधि प्रशासन में कथित पेपर लीक मामले को भी उठाया। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर MPSC से संपर्क के बाद क्राइम ब्रांच से मुलाकात की गई, जो मामले की जाँच कर रही है। जाँच एजेंसी ने 11 अगस्त तक रिपोर्ट देने की बात कही थी, किंतु रिपोर्ट समय पर नहीं मिली। अधिकारियों ने अब 1 या 2 सितंबर तक छात्रों, MPSC और मीडिया के सामने रिपोर्ट रखने का आश्वासन दिया है। पवार ने कहा कि वे उस समय सीमा तक प्रतीक्षा करेंगे और इसके बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में अगले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची की विश्वसनीयता एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा की माँग कर रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि मृत और स्थानांतरित मतदाताओं को हटाना वैध प्रक्रिया है — असली सवाल यह है कि इनमें से कितने वास्तविक मतदाता हैं। BJP पर राजनीतिक मंशा का आरोप बिना स्वतंत्र प्रमाण के विपक्षी बयानबाजी की श्रेणी में आता है, जिसे सावधानी से देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग की चुप्पी और 80% जवाबों का असंतोषजनक होना — यही वह बिंदु है जहाँ जवाबदेही की माँग जायज़ बनती है। मतदाता सूची की शुद्धता और समावेशिता के बीच संतुलन बनाना लोकतंत्र की बुनियादी ज़िम्मेदारी है, जिसे महज़ तकनीकी प्रक्रिया नहीं माना जाना चाहिए।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र एसआईआर क्या है और इसमें विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक चुनावी प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची को अद्यतन किया जाता है — मृत, स्थानांतरित या अपात्र नाम हटाए जाते हैं। विवाद इसलिए है क्योंकि NCP-SP विधायक रोहित पवार के अनुसार 9.70 करोड़ में से 2 करोड़ नाम हटाए गए हैं, जिनमें वास्तविक मतदाता भी शामिल हो सकते हैं।
रोहित पवार ने कितने मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया है?
रोहित पवार ने दावा किया है कि महाराष्ट्र में अब तक लगभग 2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और यह संख्या आगे बढ़कर 2.2 करोड़ से 2.5 करोड़ तक पहुँच सकती है। यह कुल 9.70 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं का लगभग 20 से 25 प्रतिशत है।
क्या चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर कोई जवाब दिया है?
रोहित पवार के अनुसार, अधिकांश सवालों के जवाब में यह कहा गया कि संबंधित जानकारी चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है और स्थानीय अधिकारियों के पास उपलब्ध नहीं है। चुनाव आयोग ने अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
MPSC पेपर लीक मामले में अब तक क्या हुआ है?
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अन्न एवं औषधि प्रशासन परीक्षा में कथित पेपर लीक की जाँच क्राइम ब्रांच कर रही है। जाँच रिपोर्ट 11 अगस्त तक देने का आश्वासन था, जो समय पर नहीं मिली। अब अधिकारियों ने 1 या 2 सितंबर तक रिपोर्ट सार्वजनिक करने का वादा किया है।
क्या एसआईआर की समय सीमा बढ़ाई जाएगी?
रोहित पवार के अनुसार एसआईआर की समय सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी, क्योंकि मतदाताओं का डेटा पहले ही एकत्र किया जा चुका है। जिन मतदाताओं का डेटा उपलब्ध है उनकी मैपिंग की जाएगी, और जिनका डेटा नहीं मिला उनके नाम प्रक्रिया में खारिज किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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