महाराष्ट्र एसआईआर: 9.70 करोड़ में से 2 करोड़ मतदाता सूची से हटे, रोहित पवार ने उठाए गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) [NCP-SP] के विधायक रोहित पवार ने 18 अगस्त 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, राज्य में कुल 9 करोड़ 70 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 2 करोड़ नाम सूची से हटाए जा चुके हैं — और यह संख्या आगे बढ़कर 2.2 करोड़ से 2.5 करोड़ तक पहुँच सकती है।
मुख्य आरोप और दावे
रोहित पवार ने स्पष्ट किया कि मृत व्यक्तियों या स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाना एक स्वीकृत प्रक्रिया है, परंतु उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया में वास्तविक और जीवित मतदाताओं के नाम भी गलती से हटाए जा सकते हैं। उनके अनुसार, जिन 2 करोड़ लोगों का डेटा सत्यापन के दौरान उपलब्ध नहीं हो सका, उनके नाम खारिज कर दिए गए।
पवार ने यह भी आरोप लगाया कि हटाए गए नामों में ऐसे लोग हो सकते हैं जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा से सहमत नहीं हैं। हालाँकि, यह उनका राजनीतिक दावा है और उन्होंने इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
पारदर्शिता पर सवाल
रोहित पवार ने बताया कि उन्होंने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर कई सवाल उठाए, लेकिन अधिकांश मामलों में चुनाव आयोग का हवाला देते हुए कहा गया कि संबंधित जानकारी संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उनके अनुसार, मिले जवाबों में करीब 80 प्रतिशत संतोषजनक नहीं थे।
एसआईआर की समय सीमा बढ़ाए जाने की संभावना पर पवार ने कहा कि ऐसा नहीं किया जाएगा, क्योंकि मतदाताओं का डेटा पहले ही एकत्र किया जा चुका है। जिन मतदाताओं का डेटा उपलब्ध है, उनकी मैपिंग की जाएगी।
ट्रंप और भारत की चुनाव प्रणाली पर टिप्पणी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'सेव अमेरिका एक्ट' के समर्थन में भारत की चुनाव प्रणाली का उल्लेख किए जाने पर रोहित पवार ने ट्रंप की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने भारत के हितों से जुड़े मुद्दों पर कभी समर्थन नहीं किया और उनकी नीतियों से भारत को कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पवार ने भारतीय नेतृत्व पर भी अमेरिका के सामने झुकने का आरोप लगाया।
MPSC पेपर लीक विवाद
रोहित पवार ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा अन्न एवं औषधि प्रशासन में कथित पेपर लीक मामले को भी उठाया। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर MPSC से संपर्क के बाद क्राइम ब्रांच से मुलाकात की गई, जो मामले की जाँच कर रही है। जाँच एजेंसी ने 11 अगस्त तक रिपोर्ट देने की बात कही थी, किंतु रिपोर्ट समय पर नहीं मिली। अधिकारियों ने अब 1 या 2 सितंबर तक छात्रों, MPSC और मीडिया के सामने रिपोर्ट रखने का आश्वासन दिया है। पवार ने कहा कि वे उस समय सीमा तक प्रतीक्षा करेंगे और इसके बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में अगले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची की विश्वसनीयता एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा की माँग कर रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।