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महाराष्ट्र SIR 2026: 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने की संभावना, 21% हिस्सेदारी

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महाराष्ट्र SIR 2026: 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने की संभावना, 21% हिस्सेदारी

सारांश

महाराष्ट्र के SIR 2026 के पहले चरण में 2.07 करोड़ मतदाता — यानी हर पाँच में से एक — प्रारूप सूची से बाहर हो सकते हैं। पुणे और ठाणे सबसे अधिक प्रभावित। नागरिकों के पास 23 सितंबर तक आपत्ति दर्ज कराने का अवसर है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के 2.07 करोड़ मतदाता (कुल का 21.15% ) SIR 2026 के बाद प्रारूप सूची से बाहर हो सकते हैं।
30 जून से 17 अगस्त 2026 तक चले घर-घर सत्यापन अभियान में 7.71 करोड़ मतदाताओं ने फॉर्म जमा किए।
सबसे अधिक प्रभावित जिले: पुणे (28.70 लाख), ठाणे (28.61 लाख), मुंबई उपनगर (26.63 लाख)।
34.81 लाख मतदाता मृतक, 76.80 लाख स्थानांतरित और 17.63 लाख डुप्लीकेट श्रेणी में।
प्रारूप सूची 24 अगस्त , दावे-आपत्तियाँ 23 सितंबर तक, अंतिम सूची 27 अक्टूबर 2026 को।
गलत जानकारी देने पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत एक वर्ष तक जेल का प्रावधान।

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को घोषणा की कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 2026 के पहले चरण के समापन के बाद राज्य के लगभग 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम आगामी प्रारूप मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। यह आँकड़ा राज्य के कुल 9.78 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं का करीब 21.15 प्रतिशत है — अर्थात हर पाँच में से एक मतदाता संभावित रूप से सूची से हट सकता है।

पहले चरण का घर-घर सत्यापन अभियान

30 जून से 17 अगस्त 2026 तक चले इस अभियान में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया। कुल 9.78 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 7.71 करोड़ (78.85 प्रतिशत) ने हस्ताक्षरित गणना फॉर्म जमा कर दिए। शेष 2.07 करोड़ मतदाताओं को 'अप्राप्त गणना फॉर्म' श्रेणी में रखा गया है।

एएसडीडी श्रेणी: किसे क्यों बाहर किया गया

सीईओ कार्यालय ने इन 2.07 करोड़ मतदाताओं को एएसडीडी — अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृतक और डुप्लीकेट — श्रेणी में वर्गीकृत किया है। विवरण इस प्रकार है:

76.80 लाख (7.85%) मतदाता स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो गए हैं। 75.52 लाख (7.72%) सत्यापन के दौरान अनुपस्थित पाए गए या उनसे संपर्क नहीं हो सका। 34.81 लाख (3.56%) को मृतक के रूप में दर्ज किया गया, 17.63 लाख (1.80%) डुप्लीकेट या अन्यत्र पंजीकृत पाए गए, और 2.23 लाख (0.23%) अन्य श्रेणी में रखे गए।

जिलेवार आँकड़े: पुणे और ठाणे सबसे आगे

संभावित रूप से बाहर होने वाले मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक पुणे में 28.70 लाख है, इसके बाद ठाणे में 28.61 लाख, मुंबई उपनगर में 26.63 लाख, नागपुर में 14.44 लाख, नासिक में 10.29 लाख और मुंबई शहर में 9.52 लाख मतदाता हैं। गौरतलब है कि शहरी और अर्ध-शहरी जिलों में यह संख्या अधिक है, जो प्रवासी आबादी की बड़ी उपस्थिति को दर्शाता है।

पारदर्शिता और राजनीतिक दलों की भूमिका

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने अभियान समाप्त होने से चार दिन पहले ही संभावित रूप से बाहर किए जाने वाले मतदाताओं की सूची जिला कलेक्टरों की वेबसाइटों पर अपलोड कर दी थी। इससे मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) के माध्यम से जानकारी की जाँच करने और फीडबैक देने का अवसर मिला। बीएलओ को निर्देश दिए गए थे कि दलों से प्राप्त फीडबैक का सत्यापन कर पात्र मतदाताओं को फॉर्म जमा करने का मौका दिया जाए।

आगे की प्रक्रिया और नागरिकों के लिए विकल्प

24 अगस्त 2026 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद 23 सितंबर 2026 तक नागरिक दावे और आपत्तियाँ दर्ज करा सकते हैं। अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर 2026 को जारी होगी।

जिन नागरिकों का नाम सूची में नहीं है या जो 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे, वे फॉर्म-6 भरकर नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं। फॉर्म-7 के माध्यम से गलत या अमान्य नाम हटाने का अनुरोध किया जा सकता है, जबकि फॉर्म-8 के ज़रिए नाम, पता या अन्य विवरणों में संशोधन संभव है। निर्वाचन कार्यालय ने यह भी चेतावनी दी है कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत झूठी जानकारी देने पर एक वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सज़ा हो सकती है। अंतिम सूची के प्रकाशन के साथ महाराष्ट्र की मतदाता पहचान प्रक्रिया एक निर्णायक मोड़ पर होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सत्यापन के दौरान नहीं मिले। शहरी प्रवासी और किराएदार वर्ग पर इसका सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है, जो पहले से ही मतदाता सूची में पंजीकरण की दृष्टि से कमज़ोर हैं। दावे-आपत्ति की 23 सितंबर की समयसीमा और 27 अक्टूबर की अंतिम सूची के बीच का फासला बेहद कम है; बिना व्यापक जनजागरण के, लाखों पात्र मतदाता अनजाने में अपना मताधिकार खो सकते हैं।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र SIR 2026 क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक बनाने के लिए चलाया गया घर-घर सत्यापन अभियान है। इसका उद्देश्य मृतक, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अनुपस्थित मतदाताओं की पहचान कर सूची को शुद्ध करना है।
कितने मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं और क्यों?
लगभग 2.07 करोड़ मतदाता — राज्य के कुल 9.78 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं का 21.15% — प्रारूप सूची से बाहर हो सकते हैं। इन्हें एएसडीडी श्रेणी में रखा गया है: 76.80 लाख स्थानांतरित, 75.52 लाख अनुपस्थित, 34.81 लाख मृतक और 17.63 लाख डुप्लीकेट।
यदि नाम सूची से हट जाए तो नागरिक क्या कर सकते हैं?
नागरिक 24 अगस्त को प्रकाशित प्रारूप सूची की जाँच कर 23 सितंबर 2026 तक दावे या आपत्तियाँ दर्ज करा सकते हैं। नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6, नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 और विवरण संशोधन के लिए फॉर्म-8 भरा जा सकता है।
सबसे अधिक प्रभावित जिले कौन-से हैं?
पुणे (28.70 लाख), ठाणे (28.61 लाख) और मुंबई उपनगर (26.63 लाख) सबसे अधिक प्रभावित हैं। इसके बाद नागपुर (14.44 लाख), नासिक (10.29 लाख) और मुंबई शहर (9.52 लाख) का स्थान है।
अंतिम मतदाता सूची कब जारी होगी और झूठी जानकारी देने पर क्या होगा?
अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होगी। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत गलत जानकारी देने पर एक वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सज़ा हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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