महाराष्ट्र SIR विवाद: भाई जगताप का ज्ञानेश कुमार पर हमला — 2.52 करोड़ मतदाता काटे, SIR चुनाव रद्द हों
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता भाई जगताप ने 23 सितंबर 2026 को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे देश के संवैधानिक प्रमुख की बजाय सरकार के हित में काम कर रहे हैं। जगताप ने माँग की कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) के तहत कराए गए सभी चुनाव रद्द किए जाएँ, क्योंकि महाराष्ट्र में 2 करोड़ 52 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं।
SIR के तहत मतदाता सूची पर विवाद
जगताप ने बताया कि उन्होंने एक दिन पूर्व महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से मुलाकात की। उन्होंने सवाल उठाया कि साढ़े नौ करोड़ मतदाताओं वाले महाराष्ट्र में लगभग 2 करोड़ 52 लाख मतदाताओं को — यानी कुल मतदाताओं के करीब 25-27 प्रतिशत को — विभिन्न कारणों से सूची से हटाया जा रहा है, जो सालों से मतदान करते आ रहे हैं। उनका कहना था कि गलत नामों को हटाना उचित है, लेकिन इस पैमाने पर की जा रही कटौती लोकतंत्र विरोधी है।
ज्ञानेश कुमार पर सीधा आरोप
जगताप ने कहा कि खुद चुनाव आयोग के आयुक्त SIR की प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं और इसे अलोकतांत्रिक बता रहे हैं, फिर भी मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह कदम उठाया। उन्होंने आरोप लगाया, 'ज्ञानेश कुमार देश के चुनाव आयोग के प्रमुख नहीं हैं, बल्कि सरकार के बंगले के बाहर गुलाम की तरह बैठकर काम करते हैं। यह सब सिर्फ सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को खुश करने के लिए किया गया, ताकि रिटायर होने के बाद कहीं समायोजित हो सकें।' उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।
संसद और लोकतंत्र पर टिप्पणी
शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत के संसद संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जगताप ने कहा कि वे उस बयान पर टिप्पणी उचित नहीं मानते, लेकिन इस बात से सहमत हैं कि संसद 140 करोड़ जनता का मंदिर है। उन्होंने कहा, 'उसी मंदिर में लोकतंत्र की हत्या हो रही है। देश के प्रधानमंत्री संसद में आते नहीं, संसद 16-16 दिन तक ठीक से नहीं चलती, ऐसे में गुस्सा स्वाभाविक है — फिर भी उस पवित्र संस्था की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।'
महाराष्ट्र सरकार पर वोट-चोरी का आरोप
जगताप ने आरोप दोहराया कि महाराष्ट्र में मौजूदा सरकार वोट-चोरी के ज़रिए बनी है और इस 'चोरी' में चुनाव आयोग की भी बड़ी भूमिका है। उन्होंने माँग की कि SIR के तहत कराए गए सभी चुनाव रद्द किए जाएँ, क्योंकि वे लोकतांत्रिक ढाँचे में फिट नहीं बैठते। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय उठा है जब पूरे देश में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है और विपक्षी दल इस पर लगातार सवाल उठाते आए हैं। आगे देखना होगा कि क्या चुनाव आयोग इन आरोपों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करता है।