15 अक्टूबर 2026
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महाराष्ट्र SIR: संजय निरुपम बोले — 2 करोड़ 7 लाख मतदाता अनमैप्ड, वास्तविक वोटर का नाम न कटे

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महाराष्ट्र SIR: संजय निरुपम बोले — 2 करोड़ 7 लाख मतदाता अनमैप्ड, वास्तविक वोटर का नाम न कटे

सारांश

महाराष्ट्र SIR में 2 करोड़ 7 लाख मतदाता अनमैप्ड रहे — शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरुपम ने सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई का स्वागत करते हुए कहा कि वास्तविक मतदाताओं का नाम नहीं कटना चाहिए। धर्म परिवर्तन-आरक्षण पर मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले का भी उन्होंने समर्थन किया।

मुख्य बातें

शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरुपम ने 15 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र SIR पर सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई का स्वागत किया।
SIR के पहले और दूसरे चरण में 2 करोड़ 7 लाख मतदाता मैप या सूचीबद्ध नहीं हो सके।
इनमें 37 लाख मृत, 17-18 लाख के नाम कई जगह दर्ज, और 70-75 लाख स्थानांतरित मतदाता शामिल हैं।
निरुपम ने कहा कि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम नहीं हटना चाहिए और BLO अधिकारियों की मनमानी रुकनी चाहिए।
मद्रास उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के धर्म परिवर्तन-आरक्षण फैसले का निरुपम ने समर्थन किया।

शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरुपम ने 15 अक्टूबर 2026 को मुंबई में महाराष्ट्र की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) पर सर्वोच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई का स्वागत करते हुए कहा कि SIR के क्रियान्वयन के दौरान 2 करोड़ 7 लाख मतदाताओं को मैप या सूचीबद्ध नहीं किया जा सका। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम सूची से नहीं हटना चाहिए और न्यायालय का कोई भी निर्णय उनकी पार्टी को स्वीकार्य है।

SIR प्रक्रिया में क्या सामने आया

निरुपम ने आँकड़ों का विस्तृत विश्लेषण करते हुए बताया कि SIR के पहले और दूसरे चरण की समीक्षा में कई श्रेणियों में विसंगतियाँ उजागर हुईं। उनके अनुसार, लगभग 37 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है; 17 से 18 लाख मतदाताओं के नाम तीन-चार अलग-अलग स्थानों पर दर्ज हैं; और 70 से 75 लाख मतदाता एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके हैं, जिसके कारण उनके नाम दो बार दोहराए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, लाखों मतदाता ऐसे भी हैं जो बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के घर-घर सत्यापन के दौरान उपस्थित नहीं थे। निरुपम के अनुसार इन तथ्यों की रोशनी में 2 करोड़ 7 लाख का आँकड़ा बड़ा तो दिखता है, लेकिन इसकी पृष्ठभूमि समझने के बाद इसके अलग-अलग कारण स्पष्ट होते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई पर रुख

निरुपम ने कहा, 'हम भी नहीं चाहते कि SIR के बहाने किसी भी वास्तविक वोटर का नाम कटे और कोई भी अधिकारी मनमानी हरकत करे, जिससे कोई वोट देने से वंचित रह जाए।' उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी न्यायालय की याचिका का सम्मान करती है और जो भी निर्णय आएगा, वह स्वीकार्य होगा।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में SIR के विरुद्ध दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने नोटिस जारी किया है, जो इस प्रक्रिया की न्यायिक निगरानी को सुनिश्चित करता है। यह सुनवाई ऐसे समय में आई है जब राज्य की मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों में असंतोष बना हुआ है।

धर्म परिवर्तन और आरक्षण पर निरुपम का बयान

निरुपम ने धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण के मामले में मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय की मुहर लगने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कई लोग धर्म परिवर्तन के बाद भी अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी का आरक्षण लाभ लेते रहते हैं, जो उनके अनुसार न्यायसंगत नहीं है।

उनके अनुसार, 'कई हिंदू — विशेष रूप से पिछड़ी जातियों या अनुसूचित जातियों के लोग — चर्चों या मिशनरियों के बहकावे में आकर दूसरे धर्मों में परिवर्तित हो जाते हैं। इसके बावजूद वे भारत में मौजूद आरक्षण व्यवस्था का लाभ लेना जारी रखते हैं।' निरुपम ने स्पष्ट किया कि ऐसे लोग यह तर्क देते हैं कि मूल रूप से SC श्रेणी से होने के कारण धर्मांतरण के बाद भी वे उस श्रेणी में बने रहते हैं।

न्यायिक स्थिति और आगे की दिशा

मद्रास उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति जो पहले पिछड़ी जाति का हिंदू था, किसी अन्य धर्म में परिवर्तित हो जाता है, तो वह अब SC श्रेणी के अंतर्गत नहीं आता। सर्वोच्च न्यायालय ने इस निर्णय पर सहमति जताई है। निरुपम ने कहा कि वे इस फैसले का समर्थन करते हैं क्योंकि आरक्षण का लाभ उन्हीं को मिलना चाहिए जो वास्तव में उस श्रेणी में आते हैं।

आने वाले समय में सर्वोच्च न्यायालय महाराष्ट्र SIR मामले की सुनवाई जारी रखेगा और उसके निर्णय का सीधा असर राज्य की मतदाता सूची की शुद्धता और विधानसभा चुनावी प्रक्रिया पर पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो स्वयं SIR प्रक्रिया के क्रियान्वयन में हिस्सेदार रही है — यह अपने आप में उल्लेखनीय है। 2 करोड़ 7 लाख के आँकड़े को तकनीकी विसंगतियों से समझाने की कोशिश तो है, लेकिन सवाल यह है कि यदि ये त्रुटियाँ पहले से ज्ञात थीं तो प्रक्रिया इतनी आगे क्यों बढ़ाई गई। धर्म परिवर्तन-आरक्षण पर उनका रुख न्यायिक निर्णय के अनुरूप है, परंतु इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण के संदर्भ में देखा जाएगा। मतदाता सूची की विश्वसनीयता लोकतंत्र की नींव है — सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी इस नींव को मज़बूत करने का अवसर है, बशर्ते प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR (Special Intensive Revision) मतदाता सूची पुनरीक्षण की एक प्रक्रिया है जिसमें BLO घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं। महाराष्ट्र में इस प्रक्रिया के दौरान 2 करोड़ 7 लाख मतदाताओं के अनमैप्ड रहने के आँकड़े सामने आने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर हुई है।
SIR में 2 करोड़ 7 लाख मतदाताओं के अनमैप्ड रहने का कारण क्या बताया गया?
संजय निरुपम के अनुसार इसमें लगभग 37 लाख मृत मतदाता, 17-18 लाख के नाम कई जगह दर्ज, और 70-75 लाख स्थानांतरित मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा लाखों मतदाता BLO के सत्यापन के दौरान घर पर उपस्थित नहीं थे।
सर्वोच्च न्यायालय में SIR पर याचिका का क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र SIR के विरुद्ध दायर याचिका पर नोटिस जारी कर दिया है और मामले की सुनवाई जारी है। संजय निरुपम ने कहा है कि न्यायालय का जो भी निर्णय होगा, वह उनकी पार्टी को स्वीकार्य होगा।
धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण पर मद्रास हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला है?
मद्रास उच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि यदि कोई पिछड़ी या अनुसूचित जाति का हिंदू दूसरे धर्म में परिवर्तित हो जाता है, तो वह SC आरक्षण श्रेणी का लाभ लेने का पात्र नहीं रहता। सर्वोच्च न्यायालय ने इस निर्णय पर सहमति जताई है।
संजय निरुपम किस पार्टी से हैं और उनका यह बयान क्यों महत्वपूर्ण है?
संजय निरुपम शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता हैं, जो महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति सरकार का हिस्सा है। सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रवक्ता द्वारा SIR की खामियाँ स्वीकार करना और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी का स्वागत करना इस बयान को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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