क्या एसआईआर पर विपक्ष के आरोप बेबुनियाद हैं? बिहार-यूपी में सिर्फ फर्जी वोटर हटाए जा रहे हैं: संजय निरुपम

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क्या एसआईआर पर विपक्ष के आरोप बेबुनियाद हैं? बिहार-यूपी में सिर्फ फर्जी वोटर हटाए जा रहे हैं: संजय निरुपम

सारांश

क्या विपक्ष के आरोप एसआईआर पर बेबुनियाद हैं? जानिए संजय निरुपम के इस बयान के पीछे की सच्चाई और चुनाव आयोग की प्रक्रिया के बारे में। क्या फर्जी वोटरों को हटाना सही है? जानें इस लेख में।

Key Takeaways

  • एसआईआर का उद्देश्य फर्जी वोटरों को हटाना है।
  • विपक्ष के आरोपों की जांच आवश्यक है।
  • चुनाव आयोग की प्रक्रियाएं पारदर्शी होनी चाहिए।
  • वोटरों के लिए अपील करने का अधिकार है।
  • राजनीतिक खेलों से बचना आवश्यक है।

मुंबई, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना के नेता संजय निरुपम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव आयोग एसआईआर के माध्यम से फर्जी वोटरों को वोटर लिस्ट से बाहर निकालने का कार्य कर रहा है और विपक्ष इस प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास कर रहा है।

मुंबई में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में संजय निरुपम ने बताया कि एसआईआर सबसे पहले बिहार में लागू किया गया था। वहां चुनावों के दौरान लगभग 60-67 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए थे। किसी ने भी नहीं कहा कि उसका नाम हटाया गया है। इसका मतलब है कि यह सब बहुत ही पक्के तरीके से किया गया था।

अब पश्चिम बंगाल, यूपी समेत अन्य राज्यों में भी इसी पैटर्न का पालन किया जा रहा है। विपक्ष केवल बहस के लिए यह मुद्दा उठा रहा है। बिहार में एसआईआर के दौरान फर्जी और रिपीट वोटरों के नाम निकाले गए। चुनाव आयोग ने यह घोषणा की है कि जिनके नाम हटाए जाएंगे, उनके नाम डिजिटल मोड में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराए जाएंगे। यदि कोई वोटर सोचता है कि उसका वोट गलत तरीके से काटा गया है, तो वह अपील कर सकता है।

शिवसेना नेता ने कहा कि इतनी अच्छी व्यवस्था के बावजूद विपक्ष केवल झूठे आरोप लगाते हैं कि वोटों की चोरी की जा रही है और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं। यूपी में लगभग 3 करोड़ फर्जी वोटरों के नाम हटाए गए हैं। आयोग ने यह अवसर दिया है कि यदि किसी का नाम काटा गया है, तो वे आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। एसआईआर एक अच्छी व्यवस्था को स्थापित होने से रोकने के लिए विपक्ष अपना एजेंडा चला रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर संजय निरुपम ने कहा कि खड़गे का बयान काफी नफरत से भरा है। सच यह है कि कई राज्यों में, केंद्र द्वारा भेजे गए राज्यपालों को वहां की राज्य सरकारों से दुश्मनी का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में, मैंने देखा कि तमिलनाडु के राज्यपाल को राज्य विधानसभा सत्र को संबोधित करते समय चौथी बार बीच में ही जाना पड़ा, क्योंकि उनका बहिष्कार किया गया था। उन्हें बहुत परेशान किया गया और तंग किया गया।

भारत एक ऐसा देश है जो संविधान से चलता है। संविधान एक संघीय गणराज्य की कल्पना करता है और संघीय गणराज्य में राज्यों के अपने अधिकार होते हैं। जब केंद्र किसी राज्य में राज्यपाल भेजता है, तो वह वहां का प्रमुख होता है। उनके विचारों का सम्मान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है, लेकिन केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल में केंद्र द्वारा नियुक्त राज्यपालों का अपमान किया जा रहा है।

Point of View

यह आवश्यक है कि हम इस मुद्दे को निष्पक्षता से देखें। विपक्ष के आरोपों को ध्यान में रखते हुए, यह भी महत्वपूर्ण है कि हम समझें कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता और ईमानदारी होनी चाहिए। यह देश की लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

एसआईआर क्या है?
एसआईआर का मतलब है 'सिस्टमेटिक इनफॉर्मेशन रिव्यू', जो फर्जी वोटरों को वोटर लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया है।
विपक्ष क्यों आरोप लगा रहा है?
विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता नहीं है और यह प्रक्रिया राजनीतिक लाभ के लिए की जा रही है।
कितने फर्जी वोटरों के नाम हटाए गए हैं?
यूपी में लगभग 3 करोड़ और बिहार में 60-67 लाख फर्जी वोटरों के नाम हटाए गए हैं।
क्या कोई वोटर अपील कर सकता है?
हाँ, अगर किसी वोटर का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो वह अपील कर सकता है।
क्या यह प्रक्रिया सही है?
इस प्रक्रिया का उद्देश्य चुनावी पारदर्शिता बढ़ाना है, लेकिन इसे निष्पक्षता से लागू किया जाना चाहिए।
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