अमीन पटेल की मांग: एसआईआर में पुनर्विकास-प्रभावित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से न हटाएं
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र कांग्रेस नेता और विधायक अमीन पटेल ने 29 जुलाई 2026 को बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर मांग की है कि विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के दौरान पुनर्विकास परियोजनाओं के कारण अस्थायी रूप से विस्थापित हुए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से न हटाए जाएं। यह मांग ऐसे समय में आई है जब मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में चुनावी रोल का विशेष संशोधन अभियान जोरों पर है।
मुद्दे की पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र सरकार, निजी डेवलपर और हाउसिंग सोसाइटियों द्वारा शुरू की गई पुनर्विकास पहलों के तहत राज्यभर में सैकड़ों पुरानी और जर्जर इमारतों का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के चलते मूल निवासियों और किरायेदारों को अस्थायी रूप से ट्रांजिट कैंप या आस-पास के इलाकों में किराए के मकानों में स्थानांतरित कर दिया गया है। अधिकांश परियोजनाओं के अगले दो वर्षों में पूरा होने की संभावना है, जिसके बाद निवासी अपने मूल पतों पर लौट आएंगे।
मतदाताओं की आशंका
विधायक अमीन पटेल ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि इन विस्थापित निवासियों के पास फिलहाल कोई स्थायी आवासीय पता नहीं है। इस कारण वे अपने चुनावी फोटो पहचान पत्र और अन्य चुनावी अभिलेखों में दर्ज पते को अपडेट करने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा, 'फिलहाल, इनमें से कई निवासी किराए के मकानों या ट्रांजिट आवासों में रह रहे हैं और इसलिए उनके पास कोई स्थायी आवासीय पता नहीं है। नतीजतन, वे अपने चुनावी फोटो पहचान पत्र और अन्य चुनावी रिकॉर्ड में दर्ज पते को अपडेट या बदलने में असमर्थ हैं।' उन्होंने आगे कहा कि इससे प्रभावित निवासियों में यह आशंका पैदा हो गई है कि एसआईआर के दौरान उनके नाम चुनावी रोल से हटाए जा सकते हैं।
अमीन पटेल की मांग
पटेल ने बीएमसी कमिश्नर से अनुरोध किया है कि ऐसे विस्थापित मतदाताओं के नाम उनके मूल आवासीय पते के आधार पर एसआईआर और चल रही गणना (एन्यूमरेशन) प्रक्रिया में शामिल और बरकरार रखे जाएं। उन्होंने यह भी माँग की कि वास्तविक मतदाताओं के नामों का उचित सत्यापन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को उपयुक्त निर्देश जारी किए जाएं, ताकि कोई भी असली मतदाता इस प्रक्रिया में सूची से बाहर न हो।
आम मतदाताओं पर असर
गौरतलब है कि मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में पुनर्विकास परियोजनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। यदि विस्थापित मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, तो यह उनके मताधिकार को सीधे प्रभावित करेगा। यह मुद्दा केवल मुंबई तक सीमित नहीं है — पुणे, नागपुर और ठाणे जैसे शहरों में भी बड़े पैमाने पर पुनर्विकास कार्य जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, अस्थायी विस्थापन के कारण मतदाता सूची से नाम हटना लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक संरचनात्मक खामी को उजागर करता है।
आगे की राह
अब देखना यह होगा कि बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े इस पत्र पर क्या कदम उठाती हैं और क्या चुनाव आयोग के स्तर पर भी इस संबंध में कोई स्पष्टीकरण या दिशानिर्देश जारी किया जाता है। यदि इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो यह राज्यभर के हजारों विस्थापित मतदाताओं के लिए राहत की बात होगी।