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मुंबादेवी वोटर लिस्ट विवाद: कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने 95,538 मतदाताओं को 'मृत या विस्थापित' दर्ज करने पर उठाए सवाल

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मुंबादेवी वोटर लिस्ट विवाद: कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने 95,538 मतदाताओं को 'मृत या विस्थापित' दर्ज करने पर उठाए सवाल

सारांश

मुंबादेवी में 39% मतदाताओं को बिना फील्ड सत्यापन के 'मृत या विस्थापित' दर्ज करने का आरोप — कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने चुनाव अधिकारियों को पत्र लिखकर SIR की समय सीमा बढ़ाने और दोषी BLA की समीक्षा की माँग की है।

मुख्य बातें

कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने 14 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी एस.
चोकलिंगम और BMC आयुक्त अश्विनी भिड़े को पत्र लिखा।
186 मुंबादेवी विधानसभा क्षेत्र के 2,41,959 मतदाताओं में से 95,538 (लगभग 39% ) को बिना उचित सत्यापन के 'मृत या विस्थापित' दर्ज किया गया।
मुंबई शहर में 37.8% और मुंबई उपनगर में 34.4% SIR फॉर्म अभी तक जमा नहीं हुए।
आशंका जताई गई कि महाराष्ट्र के करीब 1.8 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं।
पटेल ने SIR की समय सीमा 17 अगस्त 2026 से आगे बढ़ाने और दोषी BLA की तत्काल समीक्षा की माँग की।

कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने 14 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी एस. चोकलिंगम और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की आयुक्त अश्विनी भिड़े को एक औपचारिक पत्र भेजकर 186 मुंबादेवी विधानसभा क्षेत्र में जारी 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। पटेल के अनुसार, क्षेत्र के कुल 2,41,959 मतदाताओं में से 95,538 — यानी लगभग 39 प्रतिशत — को बिना उचित फील्ड सत्यापन के चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में 'स्थायी रूप से विस्थापित' या 'मृत' दर्ज कर दिया गया है।

मुख्य आरोप: बिना सत्यापन के हटाए गए मतदाता

पटेल ने अपने पत्र में कहा कि कुछ बूथ लेवल एजेंट (BLA) ने SIR फॉर्म वितरण और सत्यापन अभियान के दौरान घोर लापरवाही बरती। उनके अनुसार, वैध निवासियों को बिना किसी वास्तविक जाँच के 'स्थायी रूप से विस्थापित' घोषित कर दिया गया, जो संवैधानिक मतदान अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

पटेल ने यह भी रेखांकित किया कि मुंबई शहर में 37.8 प्रतिशत और मुंबई उपनगर में 34.4 प्रतिशत SIR फॉर्म अभी तक जमा नहीं हुए हैं। इसके अतिरिक्त, जमा किए गए अनेक फॉर्मों में भी संशोधन की आवश्यकता बताई गई है।

महाराष्ट्र में 1.8 करोड़ मतदाताओं पर मंडराता खतरा

पटेल ने चेतावनी दी कि यदि इस प्रक्रिया को समय रहते नहीं सुधारा गया, तो महाराष्ट्र के करीब 1.8 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं। यह आशंका ऐसे समय में और गंभीर हो जाती है जब SIR का मूल उद्देश्य सूची को अधिक सटीक और समावेशी बनाना था — न कि वास्तविक मतदाताओं को बाहर करना।

गौरतलब है कि SIR जैसी प्रक्रियाएँ भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए चलाई जाती हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि जमीनी स्तर पर लापरवाह क्रियान्वयन इन्हें उलटा असरदार बना सकता है।

कांग्रेस की माँगें

पटेल ने अपने पत्र में तीन प्रमुख माँगें रखी हैं। पहली — उन सभी BLA की तत्काल समीक्षा हो जिन्होंने SIR फॉर्म वितरित नहीं किए या बिना सत्यापन के मतदाताओं को 'विस्थापित' दर्ज किया। दूसरी — स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएँ ताकि प्रत्येक पात्र मतदाता को SIR फॉर्म अनिवार्य रूप से मिले। तीसरी — SIR की समय सीमा 17 अगस्त 2026 से आगे बढ़ाई जाए, ताकि वितरण, संग्रह, सत्यापन और डिजिटलीकरण के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

भारत निर्वाचन आयोग से हस्तक्षेप की अपील

पटेल ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से तत्काल हस्तक्षेप की माँग करते हुए कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है। उन्होंने जोर दिया कि बिना विश्वसनीय फील्ड सत्यापन के बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं को सूची से हटाना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है। अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन इन आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मतदाता सूची प्रबंधन की उस व्यापक कमज़ोरी की झलक है जो हर चुनाव चक्र में उजागर होती है। असली सवाल यह है कि क्या BLA की जवाबदेही का कोई ठोस तंत्र है — क्योंकि आरोप नए नहीं हैं, पर सुधार की रफ्तार हमेशा धीमी रही है। 1.8 करोड़ नामों के संभावित विलोपन का आँकड़ा यदि सच साबित हुआ, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाएगा। चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और SIR की समय सीमा पर लिया जाने वाला निर्णय यह तय करेगा कि यह मामला राजनीतिक आरोप बनकर रहता है या प्रणालीगत सुधार की शुरुआत बनता है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबादेवी SIR विवाद क्या है?
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने आरोप लगाया है कि 186 मुंबादेवी विधानसभा क्षेत्र में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के दौरान 95,538 मतदाताओं को बिना उचित फील्ड सत्यापन के 'मृत या स्थायी रूप से विस्थापित' दर्ज कर दिया गया। यह कुल मतदाताओं का लगभग 39 प्रतिशत है।
SIR प्रक्रिया क्या होती है और यह क्यों ज़रूरी है?
'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक बनाने के लिए चलाई जाने वाली प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना और अपात्र नामों को हटाना है, लेकिन इसके लिए जमीनी स्तर पर उचित सत्यापन अनिवार्य है।
महाराष्ट्र में कितने मतदाताओं के नाम हटने की आशंका है?
अमीन पटेल ने अपने पत्र में आशंका जताई है कि यदि SIR प्रक्रिया में सुधार नहीं हुआ, तो महाराष्ट्र के करीब 1.8 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं। यह आँकड़ा उन्होंने मुंबई शहर और उपनगर में जमा न हुए फॉर्मों के प्रतिशत के संदर्भ में दिया है।
कांग्रेस ने चुनाव अधिकारियों से क्या माँगें की हैं?
कांग्रेस विधायक पटेल ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — दोषी BLA की तत्काल समीक्षा, प्रत्येक पात्र मतदाता को SIR फॉर्म सुनिश्चित करने के निर्देश, और SIR की समय सीमा 17 अगस्त 2026 से आगे बढ़ाना ताकि सत्यापन और डिजिटलीकरण के लिए पर्याप्त समय मिले।
इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग की क्या भूमिका है?
पटेल ने ECI से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी मतदाता सूची बनाए रखना और संवैधानिक मतदान अधिकारों की रक्षा करना चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अभी तक ECI की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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