मेघालय में SIR जरूरी: BJP मंत्री सनबोर शुल्लई बोले — अवैध अप्रवासियों को मतदाता सूची से बाहर रखना लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के कैबिनेट मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता सनबोर शुल्लई ने 29 सितंबर 2026 को शिलांग में राज्य में जारी विशेष गहन संशोधन (SIR) का पुरज़ोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अवैध अप्रवासियों सहित अपात्र व्यक्तियों को मतदान के अधिकार से दूर रखने के लिए अनिवार्य है। साथ ही उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और उसके इंडिया गठबंधन के सहयोगियों पर चुनाव आयोग (ECI) के बारे में भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया।
SIR प्रक्रिया: क्या है वर्तमान स्थिति
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, मेघालय के SIR अभियान में 23,49,645 मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन किया गया है। इस सत्यापन के आधार पर मसौदा मतदाता सूची अगस्त 2026 में प्रकाशित हुई थी। फिलहाल यह प्रक्रिया नोटिस और सुनवाई के चरण में है, और अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित होने की उम्मीद है।
शुल्लई ने कहा कि SIR मतदाता सूचियों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने का एक संवैधानिक उपाय है, और इस पर उठाए जा रहे सवाल राजनीति से प्रेरित हैं।
चुनाव आयोग पर विवाद और सरकार की प्रतिक्रिया
शुल्लई ने कहा कि आयोग की पूर्ण बैठक के बाद जारी संयुक्त प्रेस नोट ने विपक्ष के आरोपों को निराधार साबित कर दिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तीनों चुनाव आयुक्तों ने प्रमुख निर्णयों पर सर्वसम्मति से काम किया है, और आयोग के भीतर किसी मतभेद के दावे झूठे हैं।
शुल्लई ने अपने बयान में कहा, 'संयुक्त प्रेस नोट ने स्पष्ट रूप से साबित कर दिया है कि कांग्रेस और उसके इंडिया गठबंधन के सहयोगी देश की जनता को गुमराह करने के लिए झूठ गढ़ रहे हैं।'
विपक्ष पर BJP का पलटवार
शुल्लई ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल ने चुनावी असफलताओं का सामना करने पर चुनाव आयोग और न्यायपालिका सहित संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करना अपनी आदत बना ली है। उन्होंने कहा कि मेघालय के मतदाता कांग्रेस और उसके सहयोगियों को पहले ही नकार चुके हैं, और अब ये दल चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है। कांग्रेस ने ECI के कामकाज और SIR की प्रक्रिया पर अलग से आपत्ति दर्ज की है।
जनता से अपील
शुल्लई ने मेघालय की जनता से अपील की कि वे जिसे उन्होंने 'दुर्भावनापूर्ण प्रचार' कहा, उसके झांसे में न आएं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची संशोधन एक पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया है, जिसकी न्यायिक जाँच भी हो चुकी है।
गौरतलब है कि SIR को लेकर यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मेघालय समेत कई उत्तर-पूर्वी राज्यों में अवैध प्रवासन एक दीर्घकालिक संवेदनशील मुद्दा रहा है। आने वाले हफ्तों में अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ यह राजनीतिक बहस और गहरी होने की संभावना है।