30 सितंबर 2026
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मेघालय एसआईआर 2026: 90.65% सुनवाई पूरी, 2.22 लाख 'नो मैपिंग' मामलों के लिए घर-घर जाएंगे बीएलओ

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मेघालय एसआईआर 2026: 90.65% सुनवाई पूरी, 2.22 लाख 'नो मैपिंग' मामलों के लिए घर-घर जाएंगे बीएलओ

सारांश

मेघालय में एसआईआर 2026 अंतिम पड़ाव पर है — 90.65% सुनवाई पूरी, 19 लाख से अधिक मतदाता बरकरार। अब बीएलओ 2.22 लाख 'नो मैपिंग' और 4.28 लाख 'मैपिंग विसंगति' मामलों के लिए घर-घर दस्तक देंगे। ईसीआई का स्पष्ट संदेश — कोई पात्र मतदाता छूटे नहीं।

मुख्य बातें

मेघालय एसआईआर 2026 के तहत 6,51,735 नोटिसों में से 5,90,784 सुनवाइयाँ पूरी — यानी 90.65 प्रतिशत प्रगति।
मसौदा मतदाता सूची में कुल 21,69,243 मतदाता ; जाँच के बाद 19,07,182 मतदाताओं को अंतिम सूची के लिए बरकरार रखा गया।
910 मतदाता अयोग्य पाए गए; 23,259 आवेदनों का डिजिटलीकरण पूरा।
बीएलओ अब 2,22,786 'नो मैपिंग' और 4,28,949 'मैपिंग विसंगति' मामलों के लिए घर-घर जाएंगे।
दावों-आपत्तियों की अवधि 18 सितंबर 2026 को समाप्त; प्रक्रिया अंतिम वैधानिक चरण में।
नोटिस मिलने मात्र से मतदाता का नाम सूची से स्वतः नहीं हटाया जाएगा — सीईओ कार्यालय ने स्पष्ट किया।

मेघालय में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 2026 के तहत अब तक 90.65 प्रतिशत सुनवाइयाँ पूरी हो चुकी हैं। 30 सितंबर 2026 को अधिकारियों ने जानकारी दी कि अगले चरण में बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) मतदाता सूची में विसंगतियों से जुड़े मामलों में दस्तावेज़ एकत्र करने के लिए मतदाताओं के घर-घर जाएंगे। यह कदम भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के नवीनतम निर्देशों के अनुरूप है।

समीक्षा बैठक और प्रगति का लेखा-जोखा

मेघालय के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) बीडीआर तिवारी ने 29 सितंबर 2026 को उपायुक्तों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और अन्य चुनाव अधिकारियों के साथ एक वर्चुअल बैठक में एसआईआर 2026 की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में राज्यव्यापी आँकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया गया।

सीईओ कार्यालय के अनुसार, मेघालय की मसौदा मतदाता सूची में कुल 21,69,243 मतदाता दर्ज हैं। एसआईआर प्रक्रिया के तहत जारी किए गए 6,51,735 नोटिसों में से 6,51,066 नोटिस वितरित किए जा चुके हैं, जबकि अभी भी 619 नोटिस वितरित होने शेष हैं।

सुनवाई के मुख्य आँकड़े

अब तक 5,90,784 सुनवाइयाँ पूरी हो चुकी हैं, जो जारी किए गए कुल नोटिसों का 90.65 प्रतिशत है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत जाँच के बाद 910 मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए अयोग्य पाया गया, जबकि 19,07,182 मतदाताओं को अंतिम प्रकाशन के लिए बरकरार रखा गया है।

चुनाव अधिकारियों ने कुल 23,259 आवेदनों का डिजिटलीकरण भी किया है, जिनमें नए नामांकन के लिए 12,624 फॉर्म-6 आवेदन, नाम हटाने या आपत्तियों से संबंधित 1,616 फॉर्म-7 आवेदन और स्थानांतरण व सुधार से जुड़े 9,019 फॉर्म-8 आवेदन शामिल हैं।

बीएलओ का घर-घर अभियान

अगले चरण में राज्यभर में पहचाने गए 2,22,786 'नो मैपिंग' मामलों और 4,28,949 'मैपिंग विसंगति' मामलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। ईसीआई के निर्देशों के तहत बीएलओ इन श्रेणियों के मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज़ एकत्र करेंगे और उन्हें ईसीआईएनईटी के माध्यम से अपलोड करेंगे।

सीईओ कार्यालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मतदाताओं को सामान्यतः ईआरओ या एईआरओ कार्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। सुनवाई केवल असाधारण निर्धारित मामलों में होगी, जिसका निर्णय ईआरओ लेगा, और प्राथमिकता ऑनलाइन सुनवाई को दी जाएगी। मतदाता अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से अधिकृत भी कर सकते हैं।

कमज़ोर वर्गों के लिए विशेष व्यवस्था

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, असंगठित श्रमिकों, बेघर लोगों और अन्य कमज़ोर वर्गों के लिए समर्पित सहायता डेस्क और विशेष शिविर स्थापित किए जाएँ। उल्लेखनीय है कि 18 सितंबर 2026 को दावों और आपत्तियों की अवधि समाप्त होने के साथ ही पुनरीक्षण प्रक्रिया अपने अंतिम वैधानिक चरणों में प्रवेश कर चुकी है।

सीईओ कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि नोटिस मिलने या 'नो मैपिंग' अथवा 'मैपिंग विसंगति' की श्रेणी में आने मात्र से किसी मतदाता का नाम सूची से स्वतः नहीं हटाया जाएगा। सभी पात्र नागरिकों से आग्रह किया गया है कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने पर वे अपने नामों का सत्यापन करें, ताकि कोई भी योग्य मतदाता वंचित न रह जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है — 6.51 लाख नोटिस में से 'नो मैपिंग' और 'मैपिंग विसंगति' के मिलाकर लगभग साढ़े छह लाख मामले संकेत देते हैं कि राज्य में मतदाता डेटाबेस की गुणवत्ता अभी भी नाज़ुक है। बीएलओ का घर-घर दौरा एक सही कदम है, पर इसकी सफलता पहाड़ी, दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में क्षेत्रीय क्षमता पर निर्भर करेगी। यह सुनिश्चित करना कि कोई भी पात्र मतदाता — विशेषकर दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक और बेघर व्यक्ति — वंचित न रहे, केवल प्रशासनिक दक्षता का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक समावेश का प्रश्न है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय में एसआईआर 2026 क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित की जाती है। मेघालय में 2026 के इस अभियान में 21,69,243 मतदाताओं वाली मसौदा सूची की जाँच की जा रही है।
बीएलओ का घर-घर दौरा किन मामलों के लिए होगा?
बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) राज्यभर में चिह्नित 2,22,786 'नो मैपिंग' और 4,28,949 'मैपिंग विसंगति' मामलों में मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज़ एकत्र करेंगे। इन दस्तावेज़ों को ईसीआईएनईटी के माध्यम से ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा।
क्या नोटिस मिलने से मतदाता का नाम सूची से हट जाएगा?
नहीं। सीईओ कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने या 'नो मैपिंग' व 'मैपिंग विसंगति' की श्रेणी में आने मात्र से किसी मतदाता का नाम स्वतः नहीं हटाया जाएगा। प्रत्येक मामले की जाँच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
मेघालय एसआईआर में अभी तक कितनी सुनवाइयाँ पूरी हुई हैं?
30 सितंबर 2026 तक 6,51,735 जारी नोटिसों में से 5,90,784 सुनवाइयाँ पूरी हो चुकी हैं, जो कुल नोटिसों का 90.65 प्रतिशत है। 619 नोटिस अभी वितरित होने बाकी हैं।
कमज़ोर वर्गों के मतदाताओं के लिए क्या विशेष व्यवस्था है?
वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, असंगठित श्रमिकों और बेघर लोगों के लिए समर्पित सहायता डेस्क और विशेष शिविर स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, मतदाता अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से अधिकृत भी कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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