25 अगस्त 2026
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ग्रेटर बेंगलुरु में समानांतर मतदाता सूची पुनरीक्षण पर कर्नाटक हाईकोर्ट सख्त, KSEC और ECI को नोटिस जारी

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ग्रेटर बेंगलुरु में समानांतर मतदाता सूची पुनरीक्षण पर कर्नाटक हाईकोर्ट सख्त, KSEC और ECI को नोटिस जारी

सारांश

कर्नाटक हाईकोर्ट ने ग्रेटर बेंगलुरु के चुनिंदा वार्डों में राज्य चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे अलग SIR अभियान को संवैधानिक चुनौती पर गंभीर रुख अपनाया है। सवाल यह है — जब ECI पहले से कर्नाटक में फेज-III पुनरीक्षण चला रहा है, तो एक ही मतदाता के लिए दो समानांतर सत्यापन क्यों?

मुख्य बातें

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 8 जुलाई 2026 को KSEC , ECI और कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किए।
ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के चुनिंदा वार्डों में अलग से चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को संवैधानिक चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ECI पहले से कर्नाटक को फेज-III में शामिल कर राष्ट्रव्यापी SIR चला रहा है, जिससे एक ही मतदाता के लिए दो समानांतर सत्यापन की स्थिति बन रही है।
याचिका महादेवपुरा के पाँच निवासियों — एम.
आनंद मूर्ति — ने दायर की है।
मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को निर्धारित है।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 8 जुलाई 2026 को ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों में कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग (KSEC) द्वारा कराए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) — यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण — को संवैधानिक चुनौती देने वाली याचिका पर कर्नाटक सरकार, कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की गई है।

याचिका की पृष्ठभूमि

यह याचिका महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के निवासियों — एम. विवेक, एम. श्रीनाथ, एस.टी. मंजूनाथ, टी.आर. सतीश और के.आर. आनंद मूर्ति — ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि केवल कुछ चुनिंदा निर्वाचन क्षेत्रों में अलग से SIR कराना कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से वैध नहीं है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह प्रक्रिया मनमानी और भेदभावपूर्ण है तथा देश में मतदाता सूची संशोधन की स्थापित व्यवस्था के विरुद्ध है।

समानांतर सत्यापन का विवाद

याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि भारत निर्वाचन आयोग पहले से ही पूरे देश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चला रहा है और कर्नाटक को इस प्रक्रिया के तीसरे चरण (फेज-III) में शामिल किया गया है। ऐसे में राज्य चुनाव आयोग द्वारा GBA के चुनिंदा वार्डों में अलग से SIR कराना एक ही मतदाता के लिए दो समानांतर सत्यापन अभियान चलाने जैसा है।

यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता को लेकर पूरे देश में बहस तेज़ है। गौरतलब है कि GBA का गठन स्वयं हाल ही में हुआ है और उसके वार्डों की सीमाओं को लेकर अभी कई कानूनी प्रश्न लंबित हैं।

याचिका में उठाई गई माँगें

याचिका में उच्च न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि चुनिंदा क्षेत्रों में अलग से चलाए जा रहे इस विशेष पुनरीक्षण की वैधता और संवैधानिकता की जाँच की जाए। याचिकाकर्ताओं ने इसे मतदाताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी बताया है।

हाईकोर्ट की प्रतिक्रिया

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने याचिका को प्रारंभिक सुनवाई में गंभीरता से लेते हुए तीनों प्रतिवादियों — कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग, कर्नाटक सरकार और भारत निर्वाचन आयोग — को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने सभी पक्षों से जवाब माँगा है।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होनी है, जिसमें तीनों प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखना होगा। यदि अदालत याचिकाकर्ताओं के तर्कों को स्वीकार करती है, तो GBA क्षेत्र में चल रहा SIR अभियान कानूनी अड़चन में पड़ सकता है। इस मामले का परिणाम भविष्य में राज्य और केंद्रीय चुनाव आयोगों के बीच अधिकार-क्षेत्र की सीमाओं को भी स्पष्ट कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। हाईकोर्ट का यह फैसला — चाहे जो भी हो — भविष्य में राज्य चुनाव आयोगों की स्वायत्तता की सीमाएँ तय करने में एक मिसाल बन सकता है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक हाईकोर्ट ने किस मामले में नोटिस जारी किया है?
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के चुनिंदा वार्डों में KSEC द्वारा अलग से कराए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को संवैधानिक चुनौती देने वाली याचिका पर KSEC, ECI और कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किए हैं। अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होगी।
समानांतर मतदाता सूची सत्यापन का विवाद क्या है?
भारत निर्वाचन आयोग पहले से ही पूरे देश में SIR चला रहा है और कर्नाटक को इसके फेज-III में शामिल किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसे में KSEC द्वारा GBA के चुनिंदा क्षेत्रों में अलग SIR कराना एक ही मतदाता के लिए दो समानांतर सत्यापन अभियान चलाने जैसा है, जो मनमाना और भेदभावपूर्ण है।
यह याचिका किसने दायर की है?
यह याचिका बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के पाँच निवासियों — एम. विवेक, एम. श्रीनाथ, एस.टी. मंजूनाथ, टी.आर. सतीश और के.आर. आनंद मूर्ति — ने दायर की है। इसमें KSEC, कर्नाटक सरकार और ECI को प्रतिवादी बनाया गया है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को निर्धारित की है, जिसमें तीनों प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
इस फैसले का मतदाताओं पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि हाईकोर्ट याचिकाकर्ताओं के तर्कों को स्वीकार करता है, तो GBA क्षेत्र में चल रहा अलग SIR अभियान रुक सकता है। इससे उन मतदाताओं को राहत मिलेगी जिन्हें दो अलग-अलग सत्यापन प्रक्रियाओं से गुज़रना पड़ रहा था। साथ ही, यह मामला राज्य और केंद्रीय चुनाव आयोगों के बीच अधिकार-क्षेत्र की सीमाओं को स्पष्ट करने में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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