ग्रेटर बेंगलुरु में समानांतर मतदाता सूची पुनरीक्षण पर कर्नाटक हाईकोर्ट सख्त, KSEC और ECI को नोटिस जारी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 8 जुलाई 2026 को ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों में कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग (KSEC) द्वारा कराए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) — यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण — को संवैधानिक चुनौती देने वाली याचिका पर कर्नाटक सरकार, कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की गई है।
याचिका की पृष्ठभूमि
यह याचिका महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के निवासियों — एम. विवेक, एम. श्रीनाथ, एस.टी. मंजूनाथ, टी.आर. सतीश और के.आर. आनंद मूर्ति — ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि केवल कुछ चुनिंदा निर्वाचन क्षेत्रों में अलग से SIR कराना कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से वैध नहीं है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह प्रक्रिया मनमानी और भेदभावपूर्ण है तथा देश में मतदाता सूची संशोधन की स्थापित व्यवस्था के विरुद्ध है।
समानांतर सत्यापन का विवाद
याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि भारत निर्वाचन आयोग पहले से ही पूरे देश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चला रहा है और कर्नाटक को इस प्रक्रिया के तीसरे चरण (फेज-III) में शामिल किया गया है। ऐसे में राज्य चुनाव आयोग द्वारा GBA के चुनिंदा वार्डों में अलग से SIR कराना एक ही मतदाता के लिए दो समानांतर सत्यापन अभियान चलाने जैसा है।
यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता को लेकर पूरे देश में बहस तेज़ है। गौरतलब है कि GBA का गठन स्वयं हाल ही में हुआ है और उसके वार्डों की सीमाओं को लेकर अभी कई कानूनी प्रश्न लंबित हैं।
याचिका में उठाई गई माँगें
याचिका में उच्च न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि चुनिंदा क्षेत्रों में अलग से चलाए जा रहे इस विशेष पुनरीक्षण की वैधता और संवैधानिकता की जाँच की जाए। याचिकाकर्ताओं ने इसे मतदाताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी बताया है।
हाईकोर्ट की प्रतिक्रिया
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने याचिका को प्रारंभिक सुनवाई में गंभीरता से लेते हुए तीनों प्रतिवादियों — कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग, कर्नाटक सरकार और भारत निर्वाचन आयोग — को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने सभी पक्षों से जवाब माँगा है।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होनी है, जिसमें तीनों प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखना होगा। यदि अदालत याचिकाकर्ताओं के तर्कों को स्वीकार करती है, तो GBA क्षेत्र में चल रहा SIR अभियान कानूनी अड़चन में पड़ सकता है। इस मामले का परिणाम भविष्य में राज्य और केंद्रीय चुनाव आयोगों के बीच अधिकार-क्षेत्र की सीमाओं को भी स्पष्ट कर सकता है।