कर्नाटक भाजपा की SEC पर बड़ी शिकायत: बेंगलुरु के 27 वार्डों में समानांतर मतदाता पुनरीक्षण पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 25 जून 2025 को राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के विरुद्ध औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि आयोग बेंगलुरु के 27 वार्डों में एक समानांतर, अनधिकृत और परस्पर विरोधी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया चला रहा है। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबु कुमार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।
शिकायत का मूल आधार
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु के के.आर. सर्किल स्थित निर्वाचन आयोग कार्यालय पहुँचकर यह शिकायत सौंपी। पार्टी का तर्क है कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पहले से ही मतदाता सूची में दर्ज दोहरे नामों की पहचान और उन्हें हटाने के लिए अपनी SIR प्रक्रिया संचालित कर रहा है। ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उसी प्रकार की समानांतर कवायद चलाना न केवल अनधिकृत है, बल्कि मतदाताओं में भ्रम और भय का कारण भी बन सकता है।
गौरतलब है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का अधिकार क्षेत्र सामान्यतः ECI के पास होता है, और राज्य निर्वाचन आयोग का दायरा स्थानीय निकाय चुनावों तक सीमित माना जाता है। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब कर्नाटक में स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल
शिकायत सौंपने वाले भाजपा प्रतिनिधिमंडल में विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलावादी नारायणस्वामी, प्रदेश प्रवक्ता प्रकाश शेषराघवाचार, भाजपा विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक वसंत कुमार, बेंगलुरु उत्तर जिला अध्यक्ष एस. हरीश और बेंगलुरु मध्य जिला अध्यक्ष सप्तगिरि गौड़ा शामिल थे।
नारायणस्वामी का पक्ष
मीडिया से बातचीत में चलावादी नारायणस्वामी ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में एक से अधिक बार दर्ज किसी भी व्यक्ति के नाम को हटाने की प्रक्रिया उचित है — चाहे वह मतदाता किसी भी दल से जुड़ा हो। उन्होंने कहा, "प्रत्येक व्यक्ति को मतदाता सूची में केवल एक वैध प्रविष्टि का अधिकार है।"
हालाँकि, उन्होंने सवाल उठाया कि जब ECI स्वयं SIR प्रक्रिया चला रहा है, तो SEC को बेंगलुरु के 27 वार्डों में समान प्रकार की कवायद शुरू करने की अनुमति किसने दी। उन्होंने कहा, "निर्वाचन आयोग की सहमति के बिना इस तरह की प्रक्रिया चलाना पूरी तरह गलत है।"
कांग्रेस सरकार पर आरोप
नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार SEC को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा, "यह सब कांग्रेस सरकार के इशारे पर किया जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग, निर्वाचन आयोग से ऊपर नहीं हो सकता। दुर्भाग्य से SEC राज्य सरकार की कठपुतली बनता नज़र आ रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार बेवजह मतदाताओं में डर और भ्रम पैदा कर रही है।
भाजपा ने माँग की है कि इस समानांतर प्रक्रिया को तत्काल वापस लिया जाए और मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य केवल ECI की निगरानी में ही किया जाए। पार्टी ने शिकायत की एक प्रति ECI को भी भेजी है।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी और आगे की राह
नारायणस्वामी ने चेतावनी दी कि यदि यह प्रक्रिया जारी रही, तो राज्य सरकार और SEC दोनों के विरुद्ध कानूनी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी अब ECI की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करेगी और उसी के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यह मामला आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे सकता है, खासकर जब स्थानीय निकाय चुनावों की तारीखें निकट आ रही हैं।