मतदाता सूची में बांग्लादेशियों के नाम जोड़ने की साजिश: कर्नाटक भाजपा ने की अधिकारियों पर FIR की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने 3 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि राज्य की भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सरकार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की आड़ में बांग्लादेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने की कोशिश कर रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की माँग की है।
मुख्य आरोप: बीएलओ की कार्यप्रणाली पर सवाल
अशोक ने आरोप लगाया कि बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन करने के बजाय सड़कों पर बैठकर गणना फॉर्म (एन्यूमरेशन फॉर्म) बाँट रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से महादेवपुरा और ब्यातरायणपुरा क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ मस्जिदों और हज भवनों के बाहर समूह बनाकर SIR की प्रक्रिया संचालित की जा रही है।
उन्होंने कहा, "BLO का काम हर घर जाकर फॉर्म देना, विवरण का सत्यापन करना और आवेदन एकत्र करना है। लेकिन वे सड़कों पर बैठकर ऐसे फॉर्म बाँट रहे हैं जैसे जनता को मुफ्त भोजन वितरित किया जा रहा हो। यह सब वोट बैंक की राजनीति के लिए बांग्लादेशी मूल के लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के उद्देश्य से किया जा रहा है।"
आँकड़े और इलाके: भाजपा के दावे
अशोक ने दावा किया कि कर्नाटक में — विशेषकर बेंगलुरु, मडिकेरी और चिक्कमगलुरु जिलों में — कथित तौर पर लगभग 20 लाख 'बांग्ला' निवासी हैं, जिनके नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि येलहंका के एक क्षेत्र में वर्ष 2002 की मतदाता सूची का रिकॉर्ड अब तक ऑनलाइन अपलोड नहीं हुआ है और कुछ खास समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है। गौरतलब है कि ये सभी आरोप भाजपा की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप
भाजपा नेता ने कांग्रेस पर SIR को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, एक ओर पार्टी सार्वजनिक रूप से इस अभियान का विरोध कर रही है, वहीं दूसरी ओर अपने समर्थकों से सरकारी गारंटी योजनाओं का लाभ लेने के लिए SIR के तहत पंजीकरण कराने को कह रही है। अशोक ने स्पष्ट किया कि SIR केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होता है।
उन्होंने कहा कि वे इस पूरे मामले की शिकायत केंद्रीय निर्वाचन आयोग और कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से करेंगे। उनकी माँग है कि ऐसी गतिविधियों की अनुमति देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएँ और उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
सूखे पर भी सरकार को घेरा
अशोक ने राज्य में उभरते सूखे के हालात पर भी कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया। उनके अनुसार, पिछले वर्ष इसी अवधि में राज्य के 22 जलाशयों में 335.292 TMC पानी था, जो इस वर्ष घटकर केवल 66.099 TMC रह गया है — यानी लगभग 80% की गिरावट। उन्होंने अलमट्टी, तुंगभद्रा, हिडकल और भीमा जलाशयों में गंभीर जल संकट का उल्लेख किया।
भाजपा नेता ने सरकार से फसल नुकसान के मुआवजे के लिए तत्काल ₹10,000 करोड़ का प्रावधान करने, सूखा टास्क फोर्स गठित करने और पशुधन की सुरक्षा के लिए गोशालाएँ स्थापित करने की माँग की। उन्होंने मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना पर मुख्यमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और कहा कि इस परियोजना के लिए बजट में ₹10 तक का प्रावधान नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार पर निशाना
अशोक ने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पद संभाले एक महीना हो गया है, लेकिन प्रशासन में कोई नया बदलाव दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने इसे "पुरानी शराब नई बोतल में भरने जैसा" बताया। साथ ही आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (BDA) और बेंगलुरु महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BMRDA) जैसे अधिक राजस्व वाले विभाग अपने पास रखे हैं। आने वाले दिनों में भाजपा द्वारा निर्वाचन आयोग को औपचारिक शिकायत सौंपे जाने की संभावना है।