कर्नाटक SIR विवाद: CEO वी. अंबु कुमार ने घर-घर फॉर्म बांटने के दिए सख्त आदेश
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) वी. अंबु कुमार ने 4 जुलाई 2025 को राज्य के सभी उपायुक्तों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत गणना प्रपत्र अनिवार्य रूप से घर-घर जाकर ही वितरित किए जाएं। यह आदेश राज्य के विभिन्न हिस्सों से मिली उन शिकायतों के बाद आया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) प्रपत्र दफ्तरों से बांट रहे हैं, जो भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के दिशानिर्देशों का सीधा उल्लंघन है।
मुख्य घटनाक्रम
30 जून 2025 से कर्नाटक में SIR प्रक्रिया के तहत मतदाताओं को गणना प्रपत्रों का वितरण शुरू हुआ। हालांकि, शुरुआत से ही शिकायतें आने लगीं कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा। 2 जुलाई को लिखे गए आधिकारिक पत्र में CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया कि प्रपत्र वितरण सरकारी दफ्तरों या किसी अन्य निर्धारित स्थान से नहीं, बल्कि सीधे मतदाता के घर पर जाकर किया जाना चाहिए।
निर्देश में यह भी कहा गया कि जिन मतदाताओं को प्रपत्र भरने में कठिनाई हो, उन्हें मतदाता सुविधा केंद्र की जानकारी दी जाए और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए।
राजनीतिक विवाद और आरोप
केंद्रीय खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि रामनगर जिले में SIR प्रक्रिया में कर्नाटक सरकार सीधे हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने कथित अनियमितताओं की तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की।
इससे एक दिन पहले, गुरुवार को केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी रामनगर जिले में SIR प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया था। उन्होंने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि उनके पास कथित अनियमितताओं के साक्ष्य मौजूद हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रशासनिक दायरा और निर्देश
CEO के निर्देश व्यापक प्रशासनिक तंत्र को संबोधित हैं। इनमें बेंगलुरु के जिला निर्वाचन अधिकारी, ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (GBA) के मुख्य आयुक्त, सभी जिलों के उपायुक्त, BBMP के सेंट्रल, नॉर्थ और साउथ निर्वाचन क्षेत्रों के अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी, तथा बेंगलुरु नगर निगमों (उत्तर, दक्षिण और मध्य) के आयुक्त शामिल हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों की ओर से पारदर्शिता की मांग उठ रही है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य में BLO द्वारा दिशानिर्देशों का पालन न करने की शिकायतें सामने आई हों।
आम मतदाता पर असर
SIR प्रक्रिया सीधे तौर पर मतदाता सूची की शुद्धता से जुड़ी है। यदि गणना प्रपत्र समय पर और सही तरीके से नहीं पहुंचते, तो वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटने या जुड़ने में देरी हो सकती है। CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक BLO की जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्र के हर घर तक पहुंचे।
आगे की राह
जिला प्रशासनों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी BLO से पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें और किसी भी चूक की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करें। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच निर्वाचन आयोग स्तर पर होती है, और क्या रामनगर जैसे विवादित जिलों में प्रक्रिया को नए सिरे से संचालित किया जाएगा।