3 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक SIR विवाद: CEO वी. अंबु कुमार ने घर-घर फॉर्म बांटने के दिए सख्त आदेश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक SIR विवाद: CEO वी. अंबु कुमार ने घर-घर फॉर्म बांटने के दिए सख्त आदेश

सारांश

कर्नाटक में SIR फॉर्म दफ्तरों से बांटे जाने की शिकायतों के बाद CEO वी. अंबु कुमार ने सख्त आदेश जारी किए। रामनगर में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर दो केंद्रीय मंत्री मैदान में आ गए हैं — यह विवाद मतदाता सूची की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी.
अंबु कुमार ने सभी उपायुक्तों को SIR गणना प्रपत्र घर-घर वितरित करने के सख्त आदेश दिए।
30 जून 2025 से शुरू हुई SIR प्रक्रिया में शिकायतें आईं कि BLO दफ्तरों से फॉर्म बांट रहे हैं, जो ECI दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने रामनगर जिले में कर्नाटक सरकार के कथित हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने वीडियो जारी कर रामनगर में SIR में कथित बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के साक्ष्य होने का दावा किया।
निर्देश BBMP , GBA और राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को जारी किए गए; मतदाता सुविधा केंद्रों का प्रचार-प्रसार भी अनिवार्य किया गया।

कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) वी. अंबु कुमार ने 4 जुलाई 2025 को राज्य के सभी उपायुक्तों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत गणना प्रपत्र अनिवार्य रूप से घर-घर जाकर ही वितरित किए जाएं। यह आदेश राज्य के विभिन्न हिस्सों से मिली उन शिकायतों के बाद आया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) प्रपत्र दफ्तरों से बांट रहे हैं, जो भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के दिशानिर्देशों का सीधा उल्लंघन है।

मुख्य घटनाक्रम

30 जून 2025 से कर्नाटक में SIR प्रक्रिया के तहत मतदाताओं को गणना प्रपत्रों का वितरण शुरू हुआ। हालांकि, शुरुआत से ही शिकायतें आने लगीं कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा। 2 जुलाई को लिखे गए आधिकारिक पत्र में CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया कि प्रपत्र वितरण सरकारी दफ्तरों या किसी अन्य निर्धारित स्थान से नहीं, बल्कि सीधे मतदाता के घर पर जाकर किया जाना चाहिए।

निर्देश में यह भी कहा गया कि जिन मतदाताओं को प्रपत्र भरने में कठिनाई हो, उन्हें मतदाता सुविधा केंद्र की जानकारी दी जाए और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए।

राजनीतिक विवाद और आरोप

केंद्रीय खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि रामनगर जिले में SIR प्रक्रिया में कर्नाटक सरकार सीधे हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने कथित अनियमितताओं की तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की।

इससे एक दिन पहले, गुरुवार को केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी रामनगर जिले में SIR प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया था। उन्होंने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि उनके पास कथित अनियमितताओं के साक्ष्य मौजूद हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

प्रशासनिक दायरा और निर्देश

CEO के निर्देश व्यापक प्रशासनिक तंत्र को संबोधित हैं। इनमें बेंगलुरु के जिला निर्वाचन अधिकारी, ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (GBA) के मुख्य आयुक्त, सभी जिलों के उपायुक्त, BBMP के सेंट्रल, नॉर्थ और साउथ निर्वाचन क्षेत्रों के अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी, तथा बेंगलुरु नगर निगमों (उत्तर, दक्षिण और मध्य) के आयुक्त शामिल हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों की ओर से पारदर्शिता की मांग उठ रही है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य में BLO द्वारा दिशानिर्देशों का पालन न करने की शिकायतें सामने आई हों।

आम मतदाता पर असर

SIR प्रक्रिया सीधे तौर पर मतदाता सूची की शुद्धता से जुड़ी है। यदि गणना प्रपत्र समय पर और सही तरीके से नहीं पहुंचते, तो वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटने या जुड़ने में देरी हो सकती है। CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक BLO की जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्र के हर घर तक पहुंचे।

आगे की राह

जिला प्रशासनों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी BLO से पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें और किसी भी चूक की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करें। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच निर्वाचन आयोग स्तर पर होती है, और क्या रामनगर जैसे विवादित जिलों में प्रक्रिया को नए सिरे से संचालित किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर गहरा सवाल है — जो लोकतंत्र की नींव है। रामनगर जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिले में गड़बड़ी के आरोप और दो केंद्रीय मंत्रियों का एक साथ मैदान में उतरना बताता है कि यह विवाद महज प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि राजनीतिक रंग ले चुका है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि CEO का आदेश भले ही सही दिशा में हो, लेकिन बिना जवाबदेही तंत्र के — यानी यह जाने बिना कि किन BLO ने नियमों का उल्लंघन किया और उन पर क्या कार्रवाई हुई — यह निर्देश केवल कागज़ी खानापूर्ति बनकर रह सकता है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में SIR क्या है और यह विवाद क्यों हुआ?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है जिसमें BLO घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करते हैं। विवाद इसलिए हुआ क्योंकि शिकायतें आईं कि अधिकारी दफ्तरों से फॉर्म बांट रहे थे, जो ECI के निर्देशों का उल्लंघन है।
CEO वी. अंबु कुमार ने क्या आदेश दिए हैं?
CEO वी. अंबु कुमार ने सभी उपायुक्तों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि BLO अनिवार्य रूप से हर घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करें। साथ ही, मतदाता सुविधा केंद्रों की जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
रामनगर जिले में क्या अनियमितताएं बताई जा रही हैं?
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और एचडी कुमारस्वामी ने रामनगर जिले में SIR प्रक्रिया में कर्नाटक सरकार के कथित हस्तक्षेप और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया है। कुमारस्वामी ने एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें उन्होंने कथित साक्ष्य होने का दावा किया है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
SIR प्रक्रिया कर्नाटक में कब शुरू हुई?
कर्नाटक में SIR के तहत गणना प्रपत्रों का वितरण 30 जून 2025 से शुरू हुआ। ECI के दिशानिर्देशों के अनुसार यह प्रक्रिया BLO द्वारा घर-घर जाकर संचालित की जानी थी।
आम मतदाता इस विवाद से कैसे प्रभावित हो सकते हैं?
यदि गणना प्रपत्र सही तरीके से वितरित नहीं होते, तो वैध मतदाताओं के नाम सूची में दर्ज होने या अद्यतन होने में देरी हो सकती है, जो चुनाव में उनके मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। जिन मतदाताओं को फॉर्म नहीं मिला, वे नजदीकी मतदाता सुविधा केंद्र से सहायता ले सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 15 मिनट पहले
  2. 25 मिनट पहले
  3. 21 घंटे पहले
  4. 2 दिन पहले
  5. 2 दिन पहले
  6. 4 दिन पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 महीना पहले