झारखंड में 'स्वच्छता ही सेवा-2026': मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने नामकुम में बांटे कपड़े के थैले, सिंगल यूज प्लास्टिक छोड़ने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 को रांची के नामकुम में 'स्वच्छता ही सेवा-2026' अभियान के तहत एक बड़े जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर अंकुश लगाने और कपड़े के थैलों को बढ़ावा देने पर विशेष ज़ोर दिया गया। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कार्यक्रम में आम नागरिकों के बीच कपड़े के थैले वितरित किए और प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्ति की दिशा में सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया।
कार्यक्रम का मुख्य घटनाक्रम
मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि स्वच्छता केवल सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बाज़ार जाते समय कपड़े का थैला साथ रखें और प्लास्टिक की थैलियों का अनावश्यक उपयोग बंद करें। उन्होंने यह भी कहा कि रोज़मर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके प्लास्टिक प्रदूषण को उल्लेखनीय रूप से कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने स्वयं स्वच्छता श्रमदान किया। उनके साथ जनप्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों और स्थानीय निवासियों ने भी सफाई अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई।
पौधारोपण और सामुदायिक गतिविधियाँ
इस अवसर पर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधारोपण भी किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सरकार की व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए सेल्फी प्वाइंट सहित कई गतिविधियाँ आयोजित की गईं और उपस्थित लोगों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई गई।
अधिकारियों की प्राथमिकताएँ
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबु इमरान ने ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रयासों के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की सहभागिता के बिना स्वच्छता व्यवस्था को मज़बूत नहीं किया जा सकता।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की मिशन निदेशक रंजीता हेम्ब्रम ने कहा कि स्वच्छता अभियान को किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह तभी सफल होगा जब लोगों के व्यवहार में स्थायी बदलाव आए और यह एक निरंतर चलने वाला जन-आंदोलन बन जाए।
आम जनता पर असर
यह अभियान ऐसे समय में आया है जब भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध के बावजूद इसका उपयोग ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में व्यापक रूप से जारी है। झारखंड सरकार का यह कदम जमीनी स्तर पर व्यवहार परिवर्तन लाने की कोशिश है — केवल दंड के ज़रिए नहीं, बल्कि जागरूकता और विकल्प उपलब्ध कराकर।
आगे की दिशा
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान का दीर्घकालिक उद्देश्य स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन के प्रति नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रमों का विस्तार राज्य के अन्य ज़िलों में भी किए जाने की संभावना है।