1 अक्टूबर 2026
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गांधी जयंती 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आह्वान — विकसित भारत निर्माण में निभाएं भूमिका

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गांधी जयंती 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आह्वान — विकसित भारत निर्माण में निभाएं भूमिका

सारांश

गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र के नाम संदेश जारी किया। उन्होंने वैश्विक अशांति के बीच गांधी के अहिंसा-संदेश की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और देशवासियों से विकसित भारत @2047 के निर्माण में 'सर्वोदय' की भावना के साथ भागीदारी का आह्वान किया।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 1 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश जारी किया।
महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर उन्होंने वैश्विक अशांति के बीच शांति और अहिंसा के संदेश को और अधिक प्रासंगिक बताया।
राष्ट्रपति ने विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को गांधीजी के 'सर्वोदय' आदर्श से जोड़ा।
2 अक्टूबर को भारत में गांधी जयंती के साथ-साथ 2007 से संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के बाद अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस भी मनाया जाता है; इस प्रस्ताव को 140 से अधिक देशों का समर्थन था।
देश में यह अवसर राजघाट पर श्रद्धांजलि, स्वच्छ भारत अभियान और खादी उद्योग पुनरुद्धार जैसे राष्ट्रीय मिशनों से जोड़कर मनाया जाता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 1 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश जारी करते हुए देशवासियों से आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर जारी इस संदेश में उन्होंने शांति, अहिंसा और 'सर्वोदय' के आदर्शों को आज की वैश्विक परिस्थितियों में और अधिक प्रासंगिक बताया।

वैश्विक अशांति में गांधी का संदेश

राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संदेश में कहा कि आज विश्व के अनेक क्षेत्रों में अशांति और युद्ध का वातावरण है तथा सभी देशों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि ऐसी विषम परिस्थितियों में महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के संदेश और अधिक प्रासंगिक एवं मार्गदर्शक हो जाते हैं। उनके अनुसार, विश्व समुदाय द्वारा गांधीजी के जीवन और आदर्शों को बहुत सम्मान दिया जाता है।

विकसित भारत और सर्वोदय का संकल्प

राष्ट्रपति ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास की इस यात्रा में संवेदनशीलता और समावेश के मूल्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि कोई भी देशवासी विकास के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने इसे महात्मा गांधी के 'सर्वोदय' के आदर्श के अनुरूप बताया, जिसमें सभी के कल्याण और उत्थान की भावना समाहित है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने देशवासियों से अपील की कि गांधी जयंती के शुभ अवसर पर यह संकल्प लें कि नैतिक आचरण और सक्रिय भागीदारी के द्वारा वे पूरी निष्ठा से विकसित भारत के निर्माण में योगदान देंगे।

अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस का महत्व

भारत में 2 अक्टूबर को जहाँ गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है, वहीं 2007 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद दुनियाभर में यह दिन अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। उल्लेखनीय है कि इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र के 140 से अधिक सदस्य देशों का समर्थन प्राप्त था। यह दोहरा आयोजन इस दिन को विशिष्ट बनाता है — यह भारत की राष्ट्रीय स्मृति में गहराई से निहित है और साथ ही मानवता के एक सार्वभौमिक संदेश का वाहक भी है।

संयुक्त राष्ट्र में यह दिवस महासचिव के वक्तव्यों और गांधीजी के दर्शन को आज की वास्तविकताओं से जोड़ने वाले विशेष कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है। हाल के वर्षों में इन संदेशों ने दुनियाभर में चल रहे संघर्षों की ओर ध्यान दिलाया है और यह याद दिलाया है कि सत्य और अहिंसा में गांधीजी का अटूट विश्वास किसी भी हथियार से कहीं अधिक शक्तिशाली है।

भारत में स्मरणोत्सव का स्वरूप

भारत में यह स्मरणोत्सव राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पण, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कार्यक्रमों और गांधीजी के आदर्शों को रेखांकित करने वाले जन अभियानों के रूप में मनाया जाता है। पिछले कई वर्षों से ये आयोजन औपचारिकता से आगे बढ़कर राष्ट्रीय मिशनों को प्रेरणा देते आए हैं — स्वच्छ भारत अभियान से लेकर खादी एवं ग्रामीण उद्योगों के पुनरुद्धार तक।

आगे की राह

राष्ट्रपति के इस संदेश के साथ देश 2 अक्टूबर 2026 को महात्मा गांधी की 157वीं जयंती मनाने के लिए तैयार है। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत अपने विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है, और गांधीजी के समावेशी विकास के मूल्यों को उस यात्रा से जोड़ने की कोशिश जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु इस बार इसकी पृष्ठभूमि में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और भारत के विकसित भारत @2047 अभियान की बढ़ती सक्रियता है — जो इसे केवल औपचारिक श्रद्धांजलि से अलग करती है। गांधीजी के 'सर्वोदय' को विकास-एजेंडे से जोड़ना राजनीतिक रूप से चतुर है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या समावेश की यह भाषा ज़मीनी नीतिगत बदलावों में परिलक्षित होती है। संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भी अहिंसा के संदेश की सीमाएँ स्पष्ट हैं — 140 से अधिक देशों ने 2007 में इस प्रस्ताव का समर्थन किया था, फिर भी वैश्विक संघर्ष थमे नहीं हैं। गांधी जयंती को राष्ट्रीय संकल्प के अवसर के रूप में पुनर्परिभाषित करने का यह प्रयास तब सार्थक होगा जब शब्द, नीति और क्रियान्वयन तीनों एक दिशा में चलें।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गांधी जयंती 2026 पर क्या संदेश दिया?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 1 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश जारी करते हुए देशवासियों से आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण में नैतिक आचरण और सक्रिय भागीदारी से योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने वैश्विक अशांति के बीच महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के संदेश को और अधिक प्रासंगिक बताया।
महात्मा गांधी की 2026 में कौन सी जयंती है?
2 अक्टूबर 2026 को महात्मा गांधी की 157वीं जयंती मनाई जा रही है। इस दिन को भारत में गांधी जयंती और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस कब और कैसे शुरू हुआ?
संयुक्त राष्ट्र ने 2007 में एक प्रस्ताव पारित कर 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया। इस प्रस्ताव को 140 से अधिक सदस्य देशों का समर्थन मिला था और तब से यह दिन दुनियाभर में गांधीजी के दर्शन को समर्पित कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने 'सर्वोदय' का उल्लेख क्यों किया?
राष्ट्रपति मुर्मु ने 'सर्वोदय' — अर्थात् सभी के कल्याण और उत्थान के महात्मा गांधी के आदर्श — का उल्लेख विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से जोड़ते हुए किया। उनका तर्क था कि विकास की यात्रा में संवेदनशीलता और समावेश को प्राथमिकता देना इसी आदर्श के अनुरूप है, ताकि कोई भी देशवासी विकास के लाभ से वंचित न रहे।
भारत में गांधी जयंती कैसे मनाई जाती है?
भारत में गांधी जयंती पर राजघाट (नई दिल्ली) पर श्रद्धांजलि अर्पण, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कार्यक्रम और जन अभियान आयोजित किए जाते हैं। पिछले कई वर्षों से यह अवसर स्वच्छ भारत अभियान और खादी एवं ग्रामीण उद्योगों के पुनरुद्धार जैसे राष्ट्रीय मिशनों से भी जोड़ा जाता रहा है।
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