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गांधी जयंती 2026: राष्ट्रपति मुर्मू और उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने राजघाट पर अर्पित की श्रद्धांजलि

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गांधी जयंती 2026: राष्ट्रपति मुर्मू और उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने राजघाट पर अर्पित की श्रद्धांजलि

सारांश

गांधी जयंती 2026 पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने राजघाट पर बापू की 157वीं जयंती और विजय घाट पर शास्त्री जी की 122वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। वैश्विक अशांति के बीच बापू के अहिंसा संदेश को आज भी सर्वाधिक प्रासंगिक बताया गया।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2 अक्टूबर 2026 को राजघाट पर महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की।
राधाकृष्णन ने भी राजघाट पर बापू को श्रद्धांजलि दी और उनके सत्य व अहिंसा के सिद्धांतों को मानवता की स्थायी प्रेरणा बताया।
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों ने विजय घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
राष्ट्रपति मुर्मू ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को गांधीजी के 'सर्वोदय' आदर्श से जोड़ा।
उपराष्ट्रपति कार्यालय ने शास्त्री जी के 'जय जवान, जय किसान' नारे का उल्लेख कर उनकी विरासत को रेखांकित किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 2 अक्टूबर 2026 को राजघाट, नई दिल्ली पहुँचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसी अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर विजय घाट पर भी श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।

राजघाट पर राष्ट्रपति की श्रद्धांजलि

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राजघाट पहुँचकर बापू की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने संदेश में कहा, "राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर, मैं सभी देशवासियों की ओर से उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करती हूँ।"

राष्ट्रपति ने वैश्विक संदर्भ में गांधीजी की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा, "विश्व के अनेक क्षेत्रों में अशांति और युद्ध का वातावरण है तथा सभी देशों पर इसका प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी स्थितियों में महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।"

विकसित भारत और सर्वोदय का संकल्प

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास की यात्रा में संवेदनशीलता और समावेश के मूल्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि कोई भी देशवासी विकास के लाभ से वंचित न रहे।

उन्होंने कहा कि यह गांधीजी के 'सर्वोदय' के आदर्श के अनुरूप है, "जिसमें सभी के कल्याण और उत्थान की भावना निहित है।" उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे नैतिक आचरण और सक्रिय भागीदारी द्वारा आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लें।

उपराष्ट्रपति की श्रद्धांजलि और संदेश

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी राजघाट पर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके कार्यालय के आधिकारिक एक्स हैंडल से संदेश जारी कर कहा गया, "सत्य और अहिंसा में उनकी अटूट आस्था, न्याय के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता और हर व्यक्ति की गरिमा में उनका गहरा विश्वास आज भी मानवता को प्रेरित करता है।"

उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से अपील की कि वे गांधीजी के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए "एक न्यायपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण के लिए खुद को समर्पित करें।"

लाल बहादुर शास्त्री को विजय घाट पर नमन

राष्ट्रपति मुर्मू और उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन दोनों ने विजय घाट पर पहुँचकर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उपराष्ट्रपति कार्यालय ने अपने संदेश में कहा, "शांत शक्ति और असाधारण संकल्प के धनी नेता, शास्त्री जी विनम्रता, ईमानदारी और देश के प्रति अटूट समर्पण की मिसाल थे।"

संदेश में शास्त्री जी के ऐतिहासिक नारे 'जय जवान, जय किसान' का विशेष उल्लेख किया गया, जिसने भारत के सैनिकों के बलिदान और किसानों के योगदान को चिरस्थायी पहचान दिलाई। गौरतलब है कि 2 अक्टूबर का दिन हर वर्ष देश के दो महान नेताओं की जयंती एक साथ मनाए जाने के कारण विशेष महत्व रखता है।

राष्ट्रीय महत्व और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर संघर्षों की पृष्ठभूमि में गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांत की चर्चा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी हो रही है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो गांधीजी की वैश्विक विरासत का प्रमाण है। देशभर में इस अवसर पर विभिन्न सरकारी और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गांधी जयंती 2026 पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहाँ श्रद्धांजलि अर्पित की?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के राजघाट पर महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके अतिरिक्त उन्होंने विजय घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।
लाल बहादुर शास्त्री की 2026 में कौन सी जयंती मनाई गई?
2 अक्टूबर 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती मनाई गई। राष्ट्रपति मुर्मू और उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन दोनों ने नई दिल्ली के विजय घाट पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने गांधी जयंती पर क्या कहा?
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने संदेश में कहा कि गांधीजी की सत्य और अहिंसा में अटूट आस्था, न्याय के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता और हर व्यक्ति की गरिमा में उनका गहरा विश्वास आज भी मानवता को प्रेरित करता है। उन्होंने नागरिकों से एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण के लिए खुद को समर्पित करने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने 'सर्वोदय' का उल्लेख किस संदर्भ में किया?
राष्ट्रपति मुर्मू ने 2047 तक विकसित भारत बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य को गांधीजी के 'सर्वोदय' आदर्श से जोड़ा। उन्होंने कहा कि विकास की यात्रा में संवेदनशीलता और समावेश को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि कोई भी देशवासी विकास के लाभ से वंचित न रहे।
2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस क्यों मनाया जाता है?
संयुक्त राष्ट्र ने महात्मा गांधी के जन्मदिन 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया है, जो उनकी वैश्विक विरासत को मान्यता देता है। यह दिन विश्वभर में शांति और अहिंसा के सिद्धांतों के प्रसार के लिए समर्पित है।
राष्ट्र प्रेस
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