महाराष्ट्र कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मिलकर SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयसीमा विस्तार की माँग रखी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने 11 जून 2026 को महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग के प्रमुख से मुलाकात कर विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और अपर्याप्त समयसीमा को लेकर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराईं। पार्टी ने आयोग से माँग की कि मतदाता सूची संशोधन के लिए दी गई एक महीने की समयसीमा को बढ़ाया जाए, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीय तरीके से संपन्न हो सके। चुनाव आयोग ने सभी चिंताओं को दूर करने का आश्वासन दिया।
SIR प्रक्रिया पर कांग्रेस की आपत्तियाँ
बैठक के बाद कांग्रेस नेता चरण सिंह सपरा ने कहा कि SIR अभी प्रारंभिक चरण में है और इस समय केवल मैपिंग का कार्य चल रहा है, लेकिन इसमें भी पर्याप्त पारदर्शिता नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई अहम सवाल सामने आए हैं, जिन पर तत्काल ध्यान देना आवश्यक है। पार्टी का मानना है कि एक महीने की समयसीमा इस पूरी प्रक्रिया के लिए अपर्याप्त है।
विकास परियोजनाओं के बीच मतदाताओं के अधिकार की चिंता
सपरा ने यह भी रेखांकित किया कि मुंबई सहित राज्य के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर शहरी विकास परियोजनाएँ चल रही हैं — जिनमें बीडीडी चॉल पुनर्विकास और अन्य पुनर्वास योजनाएँ शामिल हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इन परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए नागरिकों के नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए जा सकते हैं। कांग्रेस ने आयोग से पूछा कि ऐसे पात्र मतदाताओं के लिए क्या विशेष व्यवस्था की जा रही है।
बूथ लेवल अधिकारियों की नियुक्ति अधूरी
प्रतिनिधिमंडल ने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की नियुक्ति को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। सपरा के अनुसार, अब तक केवल लगभग 50 से 55 प्रतिशत BLO नियुक्तियाँ ही पूरी हो पाई हैं, जो मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। चुनाव आयोग ने आश्वस्त किया कि 30 जून से पहले सभी नियुक्तियाँ पूरी कर ली जाएँगी और पूरी प्रक्रिया को दुरुस्त कर दिया जाएगा।
राजनीतिक टिप्पणी: नेहरू विरासत पर कांग्रेस का पलटवार
बैठक के बाद सपरा ने केंद्र सरकार पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वर्तमान नेतृत्व यह मानता है कि देश में विकास की असली शुरुआत 2014 में हुई, जबकि आधुनिक भारत की बुनियाद पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं ने रखी थी। सपरा ने कहा कि देश की संस्थागत संरचना, विज्ञान, शिक्षा और प्रशासनिक ढाँचे की नींव उसी कालखंड में तैयार हुई थी और इतिहास को तोड़-मरोड़कर देखना उचित नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि योगदान और कार्यों की तुलना होनी चाहिए, न कि केवल कार्यकाल की।
आगे की राह
चुनाव आयोग ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि उठाए गए सभी मुद्दों पर विचार किया जाएगा। 30 जून तक BLO नियुक्तियाँ पूर्ण करने और SIR प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की समय-सीमा तय की गई है। अब देखना यह होगा कि आयोग इन आश्वासनों को किस हद तक अमल में लाता है, क्योंकि विपक्ष की नज़र इस पूरी प्रक्रिया पर बनी रहेगी।