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महाराष्ट्र कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मिलकर SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयसीमा विस्तार की माँग रखी

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महाराष्ट्र कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मिलकर SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयसीमा विस्तार की माँग रखी

सारांश

महाराष्ट्र कांग्रेस ने चुनाव आयोग के सामने SIR प्रक्रिया की खामियाँ गिनाईं — पारदर्शिता की कमी, अपर्याप्त समयसीमा और 50-55% अधूरी BLO नियुक्तियाँ। आयोग ने 30 जून तक सुधार का भरोसा दिया, लेकिन विपक्ष की निगाहें अब अमल पर टिकी हैं।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने 11 जून 2026 को महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग से मुलाकात कर SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग रखी।
कांग्रेस नेता चरण सिंह सपरा ने कहा कि SIR के लिए दी गई एक महीने की समयसीमा अपर्याप्त है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए।
अब तक केवल 50 से 55 प्रतिशत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) नियुक्तियाँ ही पूरी हुई हैं।
चुनाव आयोग ने 30 जून तक सभी नियुक्तियाँ पूरी करने और प्रक्रिया दुरुस्त करने का आश्वासन दिया।
कांग्रेस ने बीडीडी चॉल पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं से विस्थापित मतदाताओं के नाम सूची से न हटाए जाने की विशेष व्यवस्था माँगी।

महाराष्ट्र कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने 11 जून 2026 को महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग के प्रमुख से मुलाकात कर विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और अपर्याप्त समयसीमा को लेकर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराईं। पार्टी ने आयोग से माँग की कि मतदाता सूची संशोधन के लिए दी गई एक महीने की समयसीमा को बढ़ाया जाए, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीय तरीके से संपन्न हो सके। चुनाव आयोग ने सभी चिंताओं को दूर करने का आश्वासन दिया।

SIR प्रक्रिया पर कांग्रेस की आपत्तियाँ

बैठक के बाद कांग्रेस नेता चरण सिंह सपरा ने कहा कि SIR अभी प्रारंभिक चरण में है और इस समय केवल मैपिंग का कार्य चल रहा है, लेकिन इसमें भी पर्याप्त पारदर्शिता नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई अहम सवाल सामने आए हैं, जिन पर तत्काल ध्यान देना आवश्यक है। पार्टी का मानना है कि एक महीने की समयसीमा इस पूरी प्रक्रिया के लिए अपर्याप्त है।

विकास परियोजनाओं के बीच मतदाताओं के अधिकार की चिंता

सपरा ने यह भी रेखांकित किया कि मुंबई सहित राज्य के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर शहरी विकास परियोजनाएँ चल रही हैं — जिनमें बीडीडी चॉल पुनर्विकास और अन्य पुनर्वास योजनाएँ शामिल हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इन परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए नागरिकों के नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए जा सकते हैं। कांग्रेस ने आयोग से पूछा कि ऐसे पात्र मतदाताओं के लिए क्या विशेष व्यवस्था की जा रही है।

बूथ लेवल अधिकारियों की नियुक्ति अधूरी

प्रतिनिधिमंडल ने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की नियुक्ति को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। सपरा के अनुसार, अब तक केवल लगभग 50 से 55 प्रतिशत BLO नियुक्तियाँ ही पूरी हो पाई हैं, जो मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। चुनाव आयोग ने आश्वस्त किया कि 30 जून से पहले सभी नियुक्तियाँ पूरी कर ली जाएँगी और पूरी प्रक्रिया को दुरुस्त कर दिया जाएगा।

राजनीतिक टिप्पणी: नेहरू विरासत पर कांग्रेस का पलटवार

बैठक के बाद सपरा ने केंद्र सरकार पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वर्तमान नेतृत्व यह मानता है कि देश में विकास की असली शुरुआत 2014 में हुई, जबकि आधुनिक भारत की बुनियाद पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं ने रखी थी। सपरा ने कहा कि देश की संस्थागत संरचना, विज्ञान, शिक्षा और प्रशासनिक ढाँचे की नींव उसी कालखंड में तैयार हुई थी और इतिहास को तोड़-मरोड़कर देखना उचित नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि योगदान और कार्यों की तुलना होनी चाहिए, न कि केवल कार्यकाल की।

आगे की राह

चुनाव आयोग ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि उठाए गए सभी मुद्दों पर विचार किया जाएगा। 30 जून तक BLO नियुक्तियाँ पूर्ण करने और SIR प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की समय-सीमा तय की गई है। अब देखना यह होगा कि आयोग इन आश्वासनों को किस हद तक अमल में लाता है, क्योंकि विपक्ष की नज़र इस पूरी प्रक्रिया पर बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ये मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सीधा असर डालती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर शहरी पुनर्विकास के कारण लाखों नागरिक विस्थापित हो रहे हैं — और यदि इनके नाम सूची से कटे, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद को कमज़ोर करेगा। आयोग का '30 जून तक सब ठीक' वाला आश्वासन तब तक अधूरा है, जब तक समयबद्ध सत्यापन तंत्र सार्वजनिक न किया जाए। विपक्ष की यह पहल जवाबदेही की दृष्टि से सही है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि आयोग इन आश्वासनों को कागज़ से ज़मीन पर कब उतारता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SIR (विशेष सारांश पुनरीक्षण) क्या है और महाराष्ट्र में यह क्यों चर्चा में है?
SIR यानी विशेष सारांश पुनरीक्षण मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक आधिकारिक प्रक्रिया है, जिसमें नए नाम जोड़े जाते हैं और अपात्र नाम हटाए जाते हैं। महाराष्ट्र में इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और समयसीमा को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग के समक्ष आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से क्या माँगें रखीं?
कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया के लिए दी गई एक महीने की समयसीमा को बढ़ाने, पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और विकास परियोजनाओं के कारण विस्थापित नागरिकों के मतदाता अधिकार सुरक्षित रखने की माँग की। इसके साथ ही BLO नियुक्तियों को शीघ्र पूरा करने पर भी जोर दिया गया।
बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) नियुक्तियों की स्थिति क्या है?
कांग्रेस नेता चरण सिंह सपरा के अनुसार, अब तक केवल लगभग 50 से 55 प्रतिशत BLO नियुक्तियाँ ही पूरी हो पाई हैं। चुनाव आयोग ने आश्वासन दिया है कि 30 जून से पहले सभी नियुक्तियाँ पूरी कर ली जाएँगी।
विकास परियोजनाओं से विस्थापित मतदाताओं को क्या खतरा है?
मुंबई में बीडीडी चॉल पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं के कारण बड़ी संख्या में नागरिक विस्थापित हो रहे हैं। कांग्रेस की आशंका है कि पुनर्वास प्रक्रिया के दौरान इन नागरिकों के नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हट सकते हैं, जिससे वे अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
चुनाव आयोग ने कांग्रेस की चिंताओं पर क्या प्रतिक्रिया दी?
महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उठाए गए सभी मुद्दों पर काम किया जाएगा, 30 जून से पहले BLO नियुक्तियाँ पूरी होंगी और SIR प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से संपन्न किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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