जयशंकर का वारसॉ में बड़ा बयान: भारत-पोलैंड मिलकर तय करें वैश्विक मुद्दों की दिशा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 4 सितंबर 2026 को वारसॉ में कहा कि भारत और पोलैंड मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल के बीच अंतरराष्ट्रीय बहसों और नीतिगत मुद्दों की दिशा तय करने में साझा रूप से निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। पोलैंड के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में जयशंकर ने कहा कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, बाजार आधारित अर्थव्यवस्था और बहुपक्षीय सहयोग के साझा दृष्टिकोण से एकजुट हैं।
यूक्रेन युद्ध पर भारत का स्पष्ट संदेश
जयशंकर ने कहा, 'यूक्रेन में युद्ध अब पाँचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। मैं स्वयं अभी कीव से आया हूँ। भारत का स्पष्ट मत है कि युद्ध का अंत होना चाहिए, क्योंकि ऐसे युद्ध में कोई विजेता नहीं होता। हर अतिरिक्त दिन अधिक मौतें, अधिक तबाही और पूरी दुनिया पर बढ़ता आर्थिक बोझ लेकर आता है।'
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में सार्वजनिक रूप से इस चिंता को व्यक्त कर चुके हैं और भारत संवाद एवं कूटनीतिक प्रयासों को बढ़ावा देने के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश यूक्रेन को सैन्य सहायता जारी रखे हुए हैं और संघर्षविराम की कोई ठोस संभावना नज़र नहीं आ रही।
वैश्विक चुनौतियाँ: खाद्य, ईंधन और आपूर्ति श्रृंखला
विदेश मंत्री ने बताया कि वार्ता में पश्चिम एशिया, खाड़ी क्षेत्र और हिंद-प्रशांत की स्थिति पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने रेखांकित किया कि दुनिया इस समय केवल सैन्य संघर्षों का नहीं, बल्कि खाद्य, ईंधन और उर्वरकों की उपलब्धता जैसी बुनियादी चुनौतियों का भी सामना कर रही है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की नाजुकता एक गंभीर चिंता बन चुकी है।
गौरतलब है कि यूक्रेन युद्ध के बाद से अनाज और उर्वरक आपूर्ति पर जो संकट आया, उसका सबसे अधिक असर विकासशील देशों पर पड़ा है — और भारत इस मुद्दे पर वैश्विक मंचों पर लगातार आवाज़ उठाता रहा है।
द्विपक्षीय संबंध: रणनीतिक साझेदारी से आगे
जयशंकर ने बताया कि भारत और पोलैंड के बीच वर्ष 2024 में रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो वर्ष पहले पोलैंड यात्रा के दौरान तय किए गए एक्शन प्लान की समीक्षा भी इस बैठक में की गई।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में वृद्धि हुई है तथा रक्षा सहयोग मजबूत हुआ है। खनन और ऊर्जा जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।
नए समझौतों की रूपरेखा
विदेश मंत्री ने खुलासा किया कि साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष, स्वच्छ कोयला, गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान और महत्वपूर्ण खनिजों समेत कई क्षेत्रों में नए समझौतों पर सक्रिय रूप से काम चल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यूरोपीय संघ के भीतर पोलैंड की मजबूत भूमिका भारत-ईयू साझेदारी को और गति देगी।
बहुध्रुवीय विश्व में भारत-पोलैंड की भूमिका
जयशंकर ने कहा कि दुनिया तेज़ी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और भारत-यूरोपीय संघ संबंध इस वैश्विक पुनर्संतुलन का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भारत और पोलैंड मिलकर सकारात्मक दिशा दे सकते हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब यूरोप सुरक्षा के मोर्चे पर नई चुनौतियों से जूझ रहा है और भारत अपनी कूटनीतिक सक्रियता को नई ऊँचाई दे रहा है।