जयशंकर का कीव में ऐलान: 'अंतहीन युद्ध खत्म हो', भारत शांति प्रयासों में मदद को तैयार
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 3 सितंबर को कीव में यूक्रेन की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा के दौरान स्पष्ट किया कि भारत की स्थिति अटल है — यह युद्ध का युग नहीं है और युद्ध के मैदान से कोई स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ वार्ता के बाद जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की ओर' बढ़ने के आह्वान के अनुरूप भारत संवाद और कूटनीति के हर प्रयास में सहयोग देने को तैयार है।
मुख्य घटनाक्रम
यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब कीव पर हमले जारी हैं। जयशंकर ने बताया कि इस यात्रा से महज दो दिन पहले कीव में हुए एक हमले में एक भारतीय नागरिक की जान गई। उन्होंने कहा, 'हम हर खोई हुई जिंदगी के शोक में शामिल होते हैं और हर प्रभावित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।' गौरतलब है कि इससे दो दिन पहले बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा था कि अंतहीन युद्ध को अब युद्ध के अंत का रास्ता देना होगा।
द्विपक्षीय संबंध और पुराना रिश्ता
जयशंकर ने रेखांकित किया कि भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय सहयोग का इतिहास यूक्रेन की स्वतंत्रता से भी पहले का है। दोनों देशों के बीच व्यापार फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य, कृषि, उर्वरक, मशीनरी, रसायन और उपभोक्ता वस्तुओं तक फैला है। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले चार वर्षों में युद्ध और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण व्यापार प्रभावित हुआ है, लेकिन एक 'स्पष्ट लचीलापन' बना रहा है।
ग्लोबल साउथ और शिपिंग संकट
वार्ता में कॉमर्शियल शिपिंग पर हमलों का मुद्दा भी उठा। जयशंकर ने कहा कि भारतीय नाविक कई देशों के झंडे वाले जहाजों पर काम करते हैं और दुर्भाग्यपूर्ण हताहतों में शामिल रहे हैं। शिपिंग पर पड़ने वाला असर ग्लोबल साउथ के देशों को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है — ईंधन, उर्वरक और खाद्य की कमी के रूप में।
मानवीय सहायता और शिक्षा सहयोग
भारत अब तक यूक्रेन को 19 खेपों में मानवीय सहायता पहुँचा चुका है, जिसमें जनरेटर सेट, दवाएँ और चिकित्सा उपकरण सहित कुल 160 टन सामग्री शामिल है। जयशंकर ने कहा कि आगे और क्या किया जा सकता है, इस पर मंत्री सिबिहा के साथ चर्चा जारी रहेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों का पुराना सहयोग है — वर्तमान में कई भारतीय छात्र यूक्रेन में पढ़ रहे हैं।
आगे क्या
जयशंकर ने मंत्री सिबिहा को भारत आने का न्योता दिया ताकि दोनों देशों द्वारा सह-अध्यक्षता वाले अंतर-सरकारी आयोग की अगली बैठक हो सके। भविष्य की साझेदारी में डिजिटल क्षमताओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवाचार और स्टार्टअप्स को प्रमुख क्षेत्र बताया गया। यह यात्रा भारत की उस कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जो संघर्ष में किसी पक्ष का साथ दिए बिना संवाद की वकालत करती है।