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जयशंकर का कीव में ऐलान: 'अंतहीन युद्ध खत्म हो', भारत शांति प्रयासों में मदद को तैयार

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जयशंकर का कीव में ऐलान: 'अंतहीन युद्ध खत्म हो', भारत शांति प्रयासों में मदद को तैयार

सारांश

भारत के विदेश मंत्री जयशंकर की कीव यात्रा सिर्फ शिष्टाचार नहीं थी — यह एक स्पष्ट संदेश था। 'यह युद्ध का युग नहीं' की भारतीय नीति को दोहराते हुए उन्होंने शांति में मध्यस्थता की पेशकश की, 160 टन मानवीय सहायता का उल्लेख किया और भविष्य के सहयोग का रोडमैप रखा।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 3 सितंबर को कीव में यूक्रेन की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा की।
यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ वार्ता में भारत ने शांति प्रयासों में मदद की पेशकश दोहराई।
यात्रा से दो दिन पहले कीव हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत; जयशंकर ने शोक जताया।
भारत अब तक 19 खेपों में 160 टन मानवीय सहायता यूक्रेन को दे चुका है।
बिश्केक में PM मोदी के 'अंतहीन युद्ध खत्म हो' के आह्वान को जयशंकर ने कीव में दोहराया।
जयशंकर ने मंत्री सिबिहा को अंतर-सरकारी आयोग की बैठक के लिए भारत आने का न्योता दिया।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 3 सितंबर को कीव में यूक्रेन की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा के दौरान स्पष्ट किया कि भारत की स्थिति अटल है — यह युद्ध का युग नहीं है और युद्ध के मैदान से कोई स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ वार्ता के बाद जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की ओर' बढ़ने के आह्वान के अनुरूप भारत संवाद और कूटनीति के हर प्रयास में सहयोग देने को तैयार है।

मुख्य घटनाक्रम

यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब कीव पर हमले जारी हैं। जयशंकर ने बताया कि इस यात्रा से महज दो दिन पहले कीव में हुए एक हमले में एक भारतीय नागरिक की जान गई। उन्होंने कहा, 'हम हर खोई हुई जिंदगी के शोक में शामिल होते हैं और हर प्रभावित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।' गौरतलब है कि इससे दो दिन पहले बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा था कि अंतहीन युद्ध को अब युद्ध के अंत का रास्ता देना होगा।

द्विपक्षीय संबंध और पुराना रिश्ता

जयशंकर ने रेखांकित किया कि भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय सहयोग का इतिहास यूक्रेन की स्वतंत्रता से भी पहले का है। दोनों देशों के बीच व्यापार फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य, कृषि, उर्वरक, मशीनरी, रसायन और उपभोक्ता वस्तुओं तक फैला है। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले चार वर्षों में युद्ध और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण व्यापार प्रभावित हुआ है, लेकिन एक 'स्पष्ट लचीलापन' बना रहा है।

ग्लोबल साउथ और शिपिंग संकट

वार्ता में कॉमर्शियल शिपिंग पर हमलों का मुद्दा भी उठा। जयशंकर ने कहा कि भारतीय नाविक कई देशों के झंडे वाले जहाजों पर काम करते हैं और दुर्भाग्यपूर्ण हताहतों में शामिल रहे हैं। शिपिंग पर पड़ने वाला असर ग्लोबल साउथ के देशों को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है — ईंधन, उर्वरक और खाद्य की कमी के रूप में।

मानवीय सहायता और शिक्षा सहयोग

भारत अब तक यूक्रेन को 19 खेपों में मानवीय सहायता पहुँचा चुका है, जिसमें जनरेटर सेट, दवाएँ और चिकित्सा उपकरण सहित कुल 160 टन सामग्री शामिल है। जयशंकर ने कहा कि आगे और क्या किया जा सकता है, इस पर मंत्री सिबिहा के साथ चर्चा जारी रहेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों का पुराना सहयोग है — वर्तमान में कई भारतीय छात्र यूक्रेन में पढ़ रहे हैं।

आगे क्या

जयशंकर ने मंत्री सिबिहा को भारत आने का न्योता दिया ताकि दोनों देशों द्वारा सह-अध्यक्षता वाले अंतर-सरकारी आयोग की अगली बैठक हो सके। भविष्य की साझेदारी में डिजिटल क्षमताओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवाचार और स्टार्टअप्स को प्रमुख क्षेत्र बताया गया। यह यात्रा भारत की उस कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जो संघर्ष में किसी पक्ष का साथ दिए बिना संवाद की वकालत करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न पश्चिम को — और इसी में इसकी ताकत भी है, कमज़ोरी भी। 'युद्ध के मैदान से समाधान नहीं' का नारा नैतिक रूप से सही लगता है, लेकिन ठोस मध्यस्थता प्रस्ताव के बिना यह महज़ कूटनीतिक मुहावरा बनकर रह जाता है। 160 टन मानवीय सहायता सद्भावना दर्शाती है, पर यूक्रेन जिस पैमाने पर पुनर्निर्माण चाहता है, उसमें भारत की भूमिका अभी तक परिभाषित नहीं है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या भारत केवल 'मदद को तैयार' रहेगा या किसी ठोस शांति ढाँचे में सक्रिय भागीदार बनेगा।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर की कीव यात्रा का उद्देश्य क्या था?
यह यूक्रेन की भारत की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा थी, जिसमें शांति प्रयासों में भारत की भूमिका, मानवीय सहायता और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा हुई। जयशंकर ने यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ व्यापार, शिपिंग संकट और भविष्य की साझेदारी पर विचार-विमर्श किया।
भारत ने यूक्रेन को कितनी मानवीय सहायता दी है?
भारत अब तक 19 खेपों में 160 टन मानवीय सहायता यूक्रेन को भेज चुका है, जिसमें जनरेटर सेट, दवाएँ और चिकित्सा उपकरण शामिल हैं। जयशंकर ने कहा कि आगे और सहायता की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी।
PM मोदी ने बिश्केक में यूक्रेन युद्ध पर क्या कहा था?
बिश्केक में PM मोदी ने घोषणा की थी कि अंतहीन युद्ध को अब युद्ध के अंत का रास्ता देना चाहिए। जयशंकर ने कीव में इसी संदेश को दोहराया और कहा कि संघर्ष का हर बीतता दिन केवल अधिक मौतों और विनाश का अर्थ है।
कीव हमले में मारे गए भारतीय नागरिक के बारे में जयशंकर ने क्या कहा?
जयशंकर ने बताया कि इस यात्रा से दो दिन पहले कीव में हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की जान गई। उन्होंने कहा कि भारत हर खोई हुई जिंदगी के शोक में शामिल है और प्रभावित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है।
भारत और यूक्रेन के बीच भविष्य के सहयोग की क्या योजना है?
जयशंकर ने डिजिटल क्षमताओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवाचार और स्टार्टअप्स को भविष्य की साझेदारी के प्रमुख क्षेत्र बताया। उन्होंने मंत्री सिबिहा को भारत आने का न्योता दिया ताकि दोनों देशों के अंतर-सरकारी आयोग की अगली बैठक हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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