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लखनऊ में ₹52 प्रति किलो चीनी: योगी सरकार की महंगाई राहत, गन्ना किसान संस्थान में बिक्री केंद्र शुरू

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लखनऊ में ₹52 प्रति किलो चीनी: योगी सरकार की महंगाई राहत, गन्ना किसान संस्थान में बिक्री केंद्र शुरू

सारांश

महंगाई के बीच योगी सरकार ने लखनऊ में ₹52 प्रति किलो चीनी उपलब्ध कराने की पहल शुरू की है। लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान परिसर में स्थित बिक्री केंद्र रोज़ाना कार्यदिवसों पर खुलेगा — यह उत्तर प्रदेश की राज्य-नियंत्रित आपूर्ति श्रृंखला का सीधा उपभोक्ता उपयोग है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ में ₹52 प्रति किलो की दर पर चीनी बिक्री शुरू।
बिक्री केंद्र लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान परिसर में स्थित, सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला।
1 किलो ₹52 , 2 किलो ₹102 , 5 किलो ₹250 और 50 किलो ₹2,500 के पैकेट उपलब्ध।
प्रत्येक कार्यदिवस पर नियमित बिक्री; उपभोक्ता अपनी ज़रूरत के अनुसार खरीद सकते हैं।
चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने नागरिकों से अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।

उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ के नागरिकों को महंगाई से राहत देते हुए लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान परिसर में मात्र ₹52 प्रति किलो की दर पर चीनी उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग द्वारा संचालित यह बिक्री केंद्र प्रत्येक कार्यदिवस पर आम नागरिकों के लिए खुला रहेगा।

पैकेट और मूल्य विवरण

चीनी निगम एवं सहकारी चीनी मिल संघ के इस विक्रय केंद्र पर विभिन्न आकार के पैकेट उपलब्ध हैं। 1 किलो का पैकेट ₹52 और 2 किलो का पैकेट ₹102 में मिलेगा। 5 किलो के पैकेट की कीमत ₹250 तथा 50 किलो के पैकेट का मूल्य ₹2,500 निर्धारित किया गया है। उपभोक्ता अपनी दैनिक आवश्यकता के अनुसार किसी भी पैकेट में खरीदारी कर सकते हैं।

बिक्री केंद्र का समय और व्यवस्था

यह विशेष चीनी बिक्री केंद्र सोमवार से शनिवार प्रत्येक कार्यदिवस पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित रहेगा। गन्ना विकास विभाग के अनुसार, उपभोक्ताओं की सुगम खरीदारी के लिए केंद्र पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ पूरी कर ली गई हैं। यह सुविधा नियमित रूप से जारी रहेगी।

सरकार की मंशा और अपील

गन्ना विकास विभाग ने लखनऊ के नागरिकों से अपील की है कि वे इस जनोपयोगी व्यवस्था का अधिकाधिक लाभ उठाएँ। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में भविष्य में भी इसी प्रकार की व्यावहारिक राहत योजनाएँ जारी रखी जाएँगी। यह पहल ऐसे समय में आई है जब खुले बाज़ार में चीनी की कीमतें आम उपभोक्ताओं पर दबाव बना रही हैं।

आम जनता पर असर

राजधानी लखनऊ के उन परिवारों को इस योजना से सबसे अधिक लाभ मिलेगा जो बाज़ार भाव से अधिक कीमत पर चीनी खरीदने को विवश हैं। ₹52 प्रति किलो की यह दर खुदरा बाज़ार की तुलना में राहतकारी मानी जा रही है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, इसलिए राज्य सरकार के पास चीनी आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा प्रभाव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी पहुँच सीमित है — एक ही केंद्र, केवल लखनऊ। करोड़ों की आबादी वाले प्रदेश में एकमात्र बिक्री केंद्र से राहत का दायरा प्रतीकात्मक अधिक और व्यावहारिक कम लगता है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह व्यवस्था ज़िला स्तर तक विस्तारित होगी और क्या आपूर्ति पर्याप्त रहेगी। देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य में यदि राज्य सरकार चाहे तो इस मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू करना संभव है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ में ₹52 प्रति किलो चीनी कहाँ मिलेगी?
यह चीनी लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान परिसर में स्थित चीनी निगम एवं सहकारी चीनी मिल संघ के बिक्री केंद्र पर मिलेगी। यह केंद्र प्रत्येक कार्यदिवस पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है।
चीनी के पैकेट किस-किस आकार में और किस कीमत पर उपलब्ध हैं?
1 किलो का पैकेट ₹52, 2 किलो का ₹102, 5 किलो का ₹250 और 50 किलो का पैकेट ₹2,500 में उपलब्ध है। उपभोक्ता अपनी दैनिक ज़रूरत के अनुसार कोई भी पैकेट खरीद सकते हैं।
यह चीनी बिक्री योजना किसने शुरू की और इसका उद्देश्य क्या है?
यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग द्वारा शुरू की गई है। इसका उद्देश्य महंगाई के दौर में आम नागरिकों को बाज़ार भाव से कम दर पर चीनी उपलब्ध कराना है।
क्या यह बिक्री केंद्र रोज़ाना खुलेगा?
हाँ, यह बिक्री केंद्र प्रत्येक कार्यदिवस पर नियमित रूप से संचालित होगा। विभाग के अनुसार उपभोक्ताओं की सुगम खरीदारी के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ पूरी कर ली गई हैं।
क्या भविष्य में ऐसी और राहत योजनाएँ आएँगी?
गन्ना विकास विभाग ने संकेत दिया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में भविष्य में भी इसी प्रकार की व्यावहारिक राहत योजनाएँ जारी रखी जाएँगी। हालाँकि इसके विस्तार या अन्य ज़िलों में लागू होने की कोई आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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