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मणिपुर: ईडी ने सलाई ग्रुप की ₹14.69 करोड़ की संपत्ति अटैच की, पोंजी स्कीम से ₹76 करोड़ अलगाववाद में लगाए

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मणिपुर: ईडी ने सलाई ग्रुप की ₹14.69 करोड़ की संपत्ति अटैच की, पोंजी स्कीम से ₹76 करोड़ अलगाववाद में लगाए

सारांश

मणिपुर में ईडी ने सलाई ग्रुप की ₹14.69 करोड़ की संपत्ति जब्त की — यह उस नेटवर्क पर शिकंजा है जिसने पोंजी स्कीम से ₹76.63 करोड़ जुटाकर अलगाववादी गतिविधियों को वित्त पोषित किया। एनआईए और सीबीआई पहले से चार्जशीट दाखिल कर चुकी हैं; अब तक कुल ₹67.92 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त।

मुख्य बातें

ईडी ने 2 सितंबर 2026 को सलाई ग्रुप ऑफ कंपनीज और स्मार्ट सोसाइटी की ₹14.69 करोड़ की संपत्तियाँ प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत जब्त कीं।
आरोपियों ने 19 कंपनियों के जरिए सालाना 36% रिटर्न का लालच देकर जनता से धोखाधड़ी से धन जमा किया; कुल अपराध-आय ₹76.63 करोड़ आँकी गई।
जमा धन का उपयोग भारत से मणिपुर की 'स्वतंत्रता' का दावा करने वाले यामबेम बिरेन और नरेनगबम समरजीत की अलगाववादी गतिविधियों में किया गया।
एनआईए और सीबीआई दोनों ने इस मामले में अलग-अलग चार्जशीट व एफआईआर दाखिल की हैं।
इस मामले में अब तक कुल ₹67.92 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त; जाँच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंफाल सब-जोनल ऑफिस ने 2 सितंबर 2026 को मणिपुर के सलाई ग्रुप ऑफ कंपनीज और स्मार्ट सोसाइटी से जुड़ी संस्थाओं व व्यक्तियों की ₹14.69 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) के तहत जब्त किया। जब्त संपत्तियों में भूमि, इमारतें, प्लांट, मशीनरी तथा औद्योगिक एवं व्यावसायिक इकाइयाँ शामिल हैं। जाँच एजेंसी के अनुसार इस मामले में अपराध से अर्जित कुल राशि ₹76.63 करोड़ आँकी गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह जाँच मणिपुर पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। एफआईआर यामबेम बिरेन — जो कथित तौर पर खुद को 'मणिपुर स्टेट काउंसिल का मुख्यमंत्री' बताता था — और नरेनगबम समरजीत — जो खुद को 'मणिपुर स्टेट काउंसिल का विदेश और रक्षा मंत्री' बताता था — के विरुद्ध दर्ज की गई थी। आरोप है कि दोनों ने भारत संघ से मणिपुर की स्वतंत्रता की घोषणा कर राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ने, राजद्रोह और विभिन्न समूहों के बीच अशांति व वैमनस्य फैलाने जैसी देश-विरोधी गतिविधियाँ कीं।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने भी समरजीत सिंह, वाई. बिरेन और अन्य के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की है। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस रैकेट को गैर-कानूनी पोंजी और मनी-सर्कुलेशन रैकेट बताते हुए अलग से एफआईआर दर्ज की थी।

पोंजी स्कीम का तरीका

जाँच में सामने आया कि आरोपियों ने बिना किसी कानूनी अधिकार या लाइसेंस के स्मार्ट सोसाइटी और सलाई ग्रुप ऑफ कंपनीज के माध्यम से लोगों को सालाना 36 प्रतिशत रिटर्न का लालच देकर धोखाधड़ी से धन जमा किया। इस फंड को ग्रुप की 19 कंपनियों के जरिए लॉन्डर किया गया और अलगाववादी गतिविधियों में लगाया गया।

सलाई फाइनेंशियल सर्विसेज (एसएएफएफआईएनएस) बॉम्बे मनी लेंडर्स एक्ट, 1946 के तहत रजिस्टर्ड थी, जिसके तहत उसे केवल धन उधार देने की अनुमति थी — जनता से डिपॉजिट लेने की नहीं। आरोपियों ने इस पंजीकरण का दुरुपयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मंजूरी के बिना बैंक या एनबीएफसी की तरह कार्य किया।

जमा की गई राशि को डायरेक्टरों और ग्रुप कंपनियों के खातों के जरिए घुमाया गया। ईडी के अनुसार इस धन का उपयोग व्यावसायिक खर्च, संपत्ति व मशीनरी की खरीद, विदेश में धन प्रेषण, कस्टम ड्यूटी, आयकर भुगतान, डायरेक्टरों की विदेश यात्रा, क्रेडिट कार्ड भुगतान और कर्मचारियों के जरिए नकद निकासी में किया गया।

पिछली कार्रवाइयाँ

ईडी की यह कार्रवाई पहली नहीं है। 17 मई 2022 को सलाई मार्ट प्राइवेट लिमिटेड के खाते में मौजूद ₹11.26 लाख और 9 नवंबर 2022 को सलाई एग्री कंसोर्टियम के खाते में मौजूद ₹2.32 करोड़ अटैच किए गए थे। इसके बाद 13 मार्च 2026 को अपराध की आय से खरीदी गई ₹50.80 करोड़ मूल्य की 28 अचल और 5 चल संपत्तियाँ जब्त की गई थीं। अब तक इस मामले में कुल ₹67.92 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त की जा चुकी हैं।

आगे की जाँच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जाँच अभी जारी है और आगे और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला मणिपुर में वित्तीय धोखाधड़ी और अलगाववादी नेटवर्क के बीच संबंध की जाँच में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एनआईए और सीबीआई — का एक साथ सक्रिय होना इस खतरे की गंभीरता को रेखांकित करता है। लेकिन असली सवाल यह है कि ₹76.63 करोड़ की राशि विदेश में भेजी गई — किन खातों में, किन देशों में — इसका खुलासा अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ। बिना इस अंतरराष्ट्रीय कड़ी को उजागर किए, केवल संपत्ति जब्ती से अलगाववादी नेटवर्क की जड़ें नहीं कटेंगी।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सलाई ग्रुप ऑफ कंपनीज क्या है और इस पर क्या आरोप हैं?
सलाई ग्रुप ऑफ कंपनीज मणिपुर स्थित एक कथित पोंजी नेटवर्क है जिसने 19 कंपनियों के जरिए लोगों को सालाना 36% रिटर्न का लालच देकर धोखाधड़ी से धन जमा किया। जाँच एजेंसियों के अनुसार जुटाई गई ₹76.63 करोड़ की राशि अलगाववादी गतिविधियों में लगाई गई।
ईडी ने इस मामले में अब तक कितनी संपत्ति जब्त की है?
ईडी ने 2 सितंबर 2026 को ₹14.69 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच कीं। इससे पहले मई 2022, नवंबर 2022 और मार्च 2026 में भी कार्रवाइयाँ हो चुकी हैं। इस मामले में अब तक कुल ₹67.92 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त की जा चुकी हैं।
यामबेम बिरेन और नरेनगबम समरजीत कौन हैं?
यामबेम बिरेन कथित तौर पर खुद को 'मणिपुर स्टेट काउंसिल का मुख्यमंत्री' और नरेनगबम समरजीत खुद को 'विदेश और रक्षा मंत्री' बताते थे। दोनों पर भारत संघ से मणिपुर की स्वतंत्रता की घोषणा कर राजद्रोह और अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप हैं; एनआईए उनके विरुद्ध चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
इस मामले में कौन-कौन सी जाँच एजेंसियाँ शामिल हैं?
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) — तीनों एजेंसियाँ सक्रिय हैं। मणिपुर पुलिस की एफआईआर के आधार पर जाँच शुरू हुई थी, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसियों ने अलग-अलग कोणों से जाँच अपने हाथ में ली।
सलाई फाइनेंशियल सर्विसेज ने कानून का उल्लंघन कैसे किया?
सलाई फाइनेंशियल सर्विसेज बॉम्बे मनी लेंडर्स एक्ट, 1946 के तहत केवल धन उधार देने के लिए पंजीकृत थी। आरोप है कि इस पंजीकरण का दुरुपयोग कर RBI की अनुमति के बिना जनता से डिपॉजिट लिए गए और बैंक या एनबीएफसी की तरह कार्य किया गया, जो कानूनन अवैध है।
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