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ईडी ने फर्जी डिग्री गिरोह पर कसा शिकंजा, मोनाड यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में ₹25.44 करोड़ की संपत्ति अटैच

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ईडी ने फर्जी डिग्री गिरोह पर कसा शिकंजा, मोनाड यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में ₹25.44 करोड़ की संपत्ति अटैच

सारांश

हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी के नाम पर चला फर्जी डिग्री का यह कारोबार महज कागज़ी जालसाजी नहीं था — यह 1,800 से अधिक छात्रों को ठगने वाला संगठित अपराध था। ₹37.66 करोड़ की कमाई और ₹25.44 करोड़ की संपत्ति अटैच के साथ, ईडी ने साफ संदेश दिया है कि शिक्षा की आड़ में मनी लॉन्ड्रिंग बख्शी नहीं जाएगी।

मुख्य बातें

ईडी लखनऊ ने 20 जुलाई 2026 को फर्जी डिग्री मामले में ₹25.44 करोड़ की संपत्तियाँ अस्थायी रूप से अटैच कीं।
अटैच संपत्तियों में एक फार्महाउस , कई फ्लैट और वाहन शामिल हैं, जो आरोपियों व उनके परिजनों के नाम पर थीं।
मुख्य आरोपी मोनाड यूनिवर्सिटी (हापुड़) के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा और सहयोगी संदीप सहरावत हैं।
गिरोह ने कथित तौर पर 1,800 से अधिक छात्रों को फर्जी मार्कशीट, डिग्री व अन्य दस्तावेज बेचकर ₹37.66 करोड़ की अपराध आय अर्जित की।
यूपी एसटीएफ ने 11 अगस्त 2025 को 11 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।
ईडी की जांच PMLA, 2002 के तहत जारी है; और गिरफ्तारियों व संपत्ति अटैचमेंट की संभावना बनी हुई है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने 20 जुलाई 2026 को फर्जी डिग्री और जाली शैक्षणिक दस्तावेजों के एक बड़े गिरोह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए ₹25.44 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के माध्यम से की गई है। जांच का केंद्र हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक संगठित फर्जीवाड़ा नेटवर्क है, जिसने कथित तौर पर 1,800 से अधिक छात्रों को जाली दस्तावेज बेचे।

अटैच की गई संपत्तियाँ

ईडी द्वारा जब्त की गई संपत्तियों में एक फार्महाउस, कई फ्लैट और वाहन शामिल हैं। ये संपत्तियाँ आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर पंजीकृत थीं। जांच एजेंसी के अनुसार, इन संपत्तियों की खरीद कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों की बिक्री से अर्जित अपराध की आय से की गई थी।

मुख्य आरोपी और गिरोह का तरीका

ईडी की जांच में सामने आया है कि मोनाड यूनिवर्सिटी के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा ने संदीप सहरावत और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर विश्वविद्यालय के नाम, आधिकारिक संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का दुरुपयोग किया। आरोप है कि इस गिरोह ने फर्जी मार्कशीट, डिग्री, प्रोविजनल सर्टिफिकेट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट, चरित्र प्रमाण पत्र और छात्रों के रिकॉर्ड की जाली पुष्टि — ये सभी पैसे लेकर तैयार और बेचे। जांच के दौरान तलाशी अभियान में फर्जी दस्तावेजों के सत्यापन से जुड़े आवेदन सहित कई अहम साक्ष्य बरामद किए गए।

यूपी एसटीएफ की भूमिका और चार्जशीट

ईडी ने यह जांच उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यूपी एसटीएफ ने अपनी प्रारंभिक जांच में मोनाड यूनिवर्सिटी के नाम पर चल रहे इस फर्जी दस्तावेज गिरोह का भंडाफोड़ किया था। इसके बाद 11 अगस्त 2025 को 11 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की गई थी।

अपराध से अर्जित आय और मनी लॉन्ड्रिंग

ईडी के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी मार्कशीट और डिग्री बेचकर कथित तौर पर ₹37.66 करोड़ की अपराध से अर्जित आय जुटाई। इस रकम का एक बड़ा हिस्सा नगद में लिया गया और बाद में खर्च किया गया। जांच में यह भी पता चला कि इस धनराशि को कई बैंक खातों और लेन-देन के जरिए छिपाने और घुमाने की कोशिश की गई — जो PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की परिभाषा में आता है। अब तक 1,800 से अधिक छात्रों के रिकॉर्ड मिले हैं जिन्हें कथित तौर पर ये जाली दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे।

आगे की जांच और संभावित कार्रवाई

यह मामला उच्च शिक्षा क्षेत्र में दस्तावेज जालसाजी के एक व्यापक और संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है। ईडी की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और आरोपियों तथा संपत्तियों पर शिकंजा कसे जाने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब नियामक एजेंसियाँ फर्जी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नौकरियाँ हासिल करने के मामलों पर कड़ी नज़र रख रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

800 से अधिक छात्रों तक पहुँचा यह नेटवर्क बताता है कि माँग और आपूर्ति दोनों तरफ गहरी जड़ें हैं। असली सवाल यह है कि इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कितने लोग सरकारी या निजी नौकरियों में हैं — और क्या ईडी की कार्रवाई उन तक पहुँचेगी, या केवल संपत्ति अटैचमेंट पर रुक जाएगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने मोनाड यूनिवर्सिटी मामले में क्या कार्रवाई की है?
ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने 20 जुलाई 2026 को PMLA, 2002 के तहत ₹25.44 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से अटैच की हैं। इनमें एक फार्महाउस, कई फ्लैट और वाहन शामिल हैं।
मोनाड यूनिवर्सिटी फर्जी डिग्री घोटाला क्या है?
हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी के नाम पर एक संगठित गिरोह कथित तौर पर फर्जी मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज पैसे लेकर बेचता था। जांच में 1,800 से अधिक छात्रों के रिकॉर्ड मिले हैं जिन्हें ये जाली दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
ईडी की जांच के अनुसार मुख्य आरोपी मोनाड यूनिवर्सिटी के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा और उनके सहयोगी संदीप सहरावत हैं। यूपी एसटीएफ ने 11 अगस्त 2025 को कुल 11 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
आरोपियों ने इस घोटाले से कितनी रकम कमाई?
ईडी के अनुसार आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज बेचकर कथित तौर पर ₹37.66 करोड़ की अपराध आय अर्जित की। इस रकम का बड़ा हिस्सा नगद लिया गया और कई बैंक खातों के जरिए छिपाने की कोशिश की गई।
इस मामले में आगे क्या होगा?
ईडी की जांच PMLA के तहत जारी है और आने वाले दिनों में और संपत्तियाँ अटैच होने तथा अतिरिक्त आरोपियों पर कार्रवाई की संभावना है। साथ ही यह भी जाँचा जा सकता है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कितने लोग नौकरियों में कार्यरत हैं।
राष्ट्र प्रेस
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