16 जुलाई 2026
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ईडी की आतंकी फंडिंग पर बड़ी कार्रवाई: 4 राज्यों में 16 ठिकानों पर छापे, ₹40 लाख नकद और 180 ग्राम सोना जब्त

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ईडी की आतंकी फंडिंग पर बड़ी कार्रवाई: 4 राज्यों में 16 ठिकानों पर छापे, ₹40 लाख नकद और 180 ग्राम सोना जब्त

सारांश

ईडी की यह कार्रवाई महज एक छापेमारी नहीं — यह एक ऐसे बहुस्तरीय नेटवर्क पर शिकंजा है जो जाली पहचान, विदेशी चंदे और फर्जी बैंक खातों के ज़रिये अवैध घुसपैठियों को भारत में बसाने का काम कर रहा था। 4 राज्यों में एक साथ 16 ठिकानों पर कार्रवाई इस नेटवर्क की व्यापकता का संकेत है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 16 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में 16 परिसरों पर एक साथ छापे मारे।
कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत कथित आतंकी वित्तपोषण और अवैध घुसपैठ नेटवर्क के विरुद्ध की गई।
जांच की शुरुआत यूपी एटीएस की एफआईआर से हुई, जिसमें रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ में सहायता का आरोप है।
छापेमारी में लगभग ₹40 लाख नकद और करीब 180 ग्राम सोना जब्त किया गया।
कुछ धर्मार्थ ट्रस्टों पर एफसीआरए के ज़रिये विदेशी धन प्राप्त कर अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल करने का आरोप है।
प्रमुख व्यक्तियों के बयान दर्ज; आगे की जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने 16 जुलाई 2026 को कथित आतंकी वित्तपोषण और अवैध घुसपैठ नेटवर्क के विरुद्ध पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों में 16 परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई।

मामले की पृष्ठभूमि

इस पीएमएलए जांच की नींव उस प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) पर टिकी है, जो उत्तर प्रदेश आतंकवाद विरोधी दस्ते (यूपी एटीएस) ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत एक संगठित गिरोह के खिलाफ दर्ज की थी। आरोप है कि यह गिरोह रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश दिलाने में सक्रिय था।

नेटवर्क की कार्यप्रणाली

जांच में एक बहुस्तरीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। कथित तौर पर यह गिरोह घुसपैठियों के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट जैसे जाली भारतीय पहचान दस्तावेज़ तैयार कराता था और उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में पुनर्वासित करता था। इसके अलावा फर्जी बैंक खातों के ज़रिये धन लेनदेन और मानव तस्करी भी इस नेटवर्क का हिस्सा बताई जा रही है।

गौरतलब है कि जांच में कुछ धर्मार्थ ट्रस्टों और संस्थाओं की भूमिका भी सामने आई है। इन पर आरोप है कि उन्होंने एफसीआरए चैनलों के माध्यम से विदेशी धन प्राप्त किया और उसे कई स्तरों पर लेनदेन, फर्जी खातों और नकद निकासी के ज़रिये अवैध गतिविधियों के वित्तपोषण में इस्तेमाल किया। लाभार्थियों को भारत में बसाने के लिए छोटी-छोटी किश्तों में धन हस्तांतरित किया जाता था, ताकि वित्तीय निगरानी से बचा जा सके।

छापेमारी में क्या मिला

तलाशी अभियान के दौरान अधिकारियों ने लगभग ₹40 लाख की बेहिसाब नकदी और करीब 180 ग्राम सोना जब्त किया। इसके साथ ही विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और बैंक रिकॉर्ड भी अपने कब्जे में लिए गए, जो जांच में अहम साक्ष्य माने जा रहे हैं।

आगे की जांच

ईडी के अनुसार, मामले में प्रमुख व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और आगे की जांच जारी है। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार अवैध घुसपैठ और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क के विरुद्ध कड़े कदम उठाने की नीति पर काम कर रही है। आने वाले दिनों में गिरफ्तारियाँ और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस बड़े सवाल की ओर इशारा करती है कि धर्मार्थ ट्रस्टों और एफसीआरए ढाँचे की निगरानी कितनी चुस्त है। जाली दस्तावेज़ों से लेकर विदेशी चंदे तक का यह कथित गठजोड़ बताता है कि घुसपैठ अब केवल सीमा-सुरक्षा की समस्या नहीं रही — यह एक वित्तीय अपराध भी है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे मामलों में चार्जशीट और अदालती सुनवाई तक पहुँचने की दर ऐतिहासिक रूप से कम रही है, इसलिए जब्ती और बयान से आगे बढ़कर अभियोजन तक की गति ही इस कार्रवाई की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने 16 जुलाई 2026 को किन राज्यों में छापेमारी की?
ईडी के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने 16 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों में कुल 16 परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
इस मामले में ईडी की जांच किस आधार पर शुरू हुई?
जांच की शुरुआत यूपी एटीएस द्वारा दर्ज उस एफआईआर से हुई, जिसमें एक संगठित गिरोह पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ में सहायता, जाली पहचान दस्तावेज़ बनाने और उन्हें भारत में पुनर्वासित करने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद पीएमएलए के तहत ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया।
छापेमारी में क्या-क्या जब्त किया गया?
तलाशी अभियान में लगभग ₹40 लाख की बेहिसाब नकदी, करीब 180 ग्राम सोना, आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और बैंक रिकॉर्ड जब्त किए गए।
इस नेटवर्क में धर्मार्थ ट्रस्टों की क्या भूमिका बताई जा रही है?
जांच में कुछ धर्मार्थ ट्रस्टों और संस्थाओं पर आरोप है कि उन्होंने एफसीआरए चैनलों के ज़रिये विदेशी धन प्राप्त किया और उसे फर्जी बैंक खातों, बहुस्तरीय लेनदेन और नकद निकासी के माध्यम से अवैध घुसपैठ और पुनर्वास गतिविधियों में लगाया।
इस मामले में आगे क्या होगा?
ईडी के अनुसार प्रमुख व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और जांच जारी है। आने वाले दिनों में गिरफ्तारियाँ और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई संभव है, हालाँकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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