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64 टीमों वाला फीफा विश्व कप भारत के लिए वरदान — पहले एशिया टॉप-15 में जगह बनाएं: गुरप्रीत सिंह संधू

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64 टीमों वाला फीफा विश्व कप भारत के लिए वरदान — पहले एशिया टॉप-15 में जगह बनाएं: गुरप्रीत सिंह संधू

सारांश

भारतीय फुटबॉल कप्तान गुरप्रीत सिंह संधू का कहना है कि 64 टीमों वाला फीफा विश्व कप भारत के लिए दरवाज़ा खोल सकता है — लेकिन असली काम अभी बाकी है। एशिया टॉप-15 में जगह बनाना पहला पड़ाव है, विश्व कप का सपना उसके बाद।

मुख्य बातें

गुरप्रीत सिंह संधू ने कहा कि 64 टीमों वाला फीफा विश्व कप भारत जैसी उभरती टीमों के लिए क्वालीफिकेशन के अवसर बढ़ाएगा।
भारत का तत्काल लक्ष्य एशिया की शीर्ष 15 टीमों में जगह बनाना होना चाहिए, इसके बाद शीर्ष 10 की ओर बढ़ना।
यूरोपीय खिलाड़ी पहले ही सालाना 50 से 60 मुकाबले खेलते हैं — विस्तार से उनके कार्यभार पर असर पड़ सकता है।
फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने 2030 विश्व कप में 64 टीमों के प्रस्ताव का समर्थन किया है।
2030 विश्व कप छह देशों और तीन महाद्वीपों में आयोजित होगा — पहले से ही ऐतिहासिक।

भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान और अनुभवी गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने 16 जुलाई को कहा कि यदि फीफा विश्व कप में भाग लेने वाली टीमों की संख्या भविष्य में 64 कर दी जाती है, तो भारत जैसी उभरती फुटबॉल टीमों के लिए इस प्रतिष्ठित मंच तक पहुँचने के अवसर उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकते हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल राष्ट्रीय टीम की प्राथमिकता विश्व कप की सीट की प्रतीक्षा करने के बजाय अपनी रैंकिंग और समग्र प्रदर्शन में सुधार लाना होनी चाहिए।

गुरप्रीत का नज़रिया: भारत के लिए 64 टीमें क्यों फायदेमंद

जी5 के फीफा विश्व कप 2026 एक्सपर्ट पैनल का हिस्सा रहे गुरप्रीत ने कहा कि भारत के दृष्टिकोण से अधिक टीमों वाला विश्व कप निश्चित रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। उनके अनुसार, टूर्नामेंट में जितनी अधिक टीमें शामिल होंगी, भारत जैसे उभरते फुटबॉल राष्ट्रों के लिए क्वालीफाई करने की संभावना उतनी ही प्रबल होगी। यह विचार ऐसे समय में आया है जब फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने 2030 फीफा विश्व कप में 64 टीमों को शामिल करने के प्रस्ताव पर सार्वजनिक रूप से विचार करने का समर्थन किया है।

यूरोपीय खिलाड़ियों पर बढ़ते बोझ की चिंता

गुरप्रीत ने स्वीकार किया कि यूरोप और अन्य शीर्ष फुटबॉल देशों के खिलाड़ियों के लिए यह विस्तार चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा कि वहाँ के खिलाड़ी पहले ही क्लब और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को मिलाकर सालभर में 50 से 60 मुकाबले खेलते हैं। ऐसे में विश्व कप का और विस्तार उनके शारीरिक और मानसिक दबाव को बढ़ा सकता है। फिर भी गुरप्रीत का मानना है कि फीफा इस तरह का कोई भी निर्णय खिलाड़ियों के कार्यभार और प्रतियोगिताओं के कार्यक्रम को ध्यान में रखकर ही लेगा।

भारत का असली लक्ष्य: एशिया टॉप-15 में जगह

भारतीय कप्तान ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय टीम को फिलहाल विश्व कप में संभावित अतिरिक्त स्थानों की प्रतीक्षा करने के बजाय अपनी बुनियादी प्रगति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनके अनुसार, भारत का पहला ठोस लक्ष्य एशिया की शीर्ष 15 टीमों में स्थान सुनिश्चित करना होना चाहिए। इसके बाद टीम क्रमशः शीर्ष 10 और उससे आगे बढ़ने का लक्ष्य तय कर सकती है। गौरतलब है कि वर्तमान में भारतीय फुटबॉल टीम फीफा रैंकिंग में एशियाई प्रतिस्पर्धा में काफी पीछे है, जो इस लक्ष्य की महत्ता को और बढ़ा देता है।

2030 विश्व कप और वैश्विक बहस

2030 फीफा विश्व कप पहले ही ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि इसका आयोजन छह देशों और तीन महाद्वीपों में किया जाएगा। इन्फेंटिनो के 64 टीमों वाले प्रस्ताव ने फुटबॉल जगत में नई बहस छेड़ दी है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खिलाड़ियों पर मैचों का बोझ बढ़ेगा, जबकि कुछ इसे वैश्विक फुटबॉल के विस्तार की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं।

दीर्घकालिक सफलता के लिए धैर्य ज़रूरी

गुरप्रीत ने कहा कि एक भारतीय खिलाड़ी और फुटबॉल प्रशंसक के रूप में वह भी चाहते हैं कि भारत जल्द से जल्द फीफा विश्व कप में खेले। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सपना तभी साकार होगा जब टीम लगातार बेहतर प्रदर्शन करेगी और एशियाई स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत बनाएगी। उनके शब्दों में, सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता — भारतीय फुटबॉल को एक-एक कदम आगे बढ़ना होगा और दीर्घकालिक सफलता के लिए धैर्य, निरंतर सुधार और स्पष्ट लक्ष्य ही सबसे महत्वपूर्ण हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत को इसका लाभ तभी मिलेगा जब घरेलू ढाँचे, युवा विकास और कोचिंग में ठोस निवेश हो।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरप्रीत सिंह संधू ने 64 टीमों वाले फीफा विश्व कप पर क्या कहा?
गुरप्रीत सिंह संधू ने कहा कि 64 टीमों वाला फीफा विश्व कप भारत जैसी उभरती टीमों के लिए क्वालीफिकेशन के अवसर बढ़ाएगा। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत को पहले एशिया की शीर्ष 15 टीमों में जगह बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
भारतीय फुटबॉल टीम का एशिया में अगला लक्ष्य क्या है?
भारतीय कप्तान के अनुसार, टीम का तत्काल लक्ष्य एशिया की शीर्ष 15 टीमों में स्थान हासिल करना है। इसके बाद क्रमशः शीर्ष 10 और फिर विश्व कप क्वालीफिकेशन की ओर बढ़ा जा सकता है।
फीफा विश्व कप 2030 में कितनी टीमें खेलेंगी?
फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने 2030 विश्व कप में 64 टीमों को शामिल करने के प्रस्ताव पर विचार करने का समर्थन किया है, हालाँकि यह अभी प्रस्ताव के स्तर पर है। 2030 का विश्व कप छह देशों और तीन महाद्वीपों में आयोजित होगा।
64 टीमों वाले विश्व कप से यूरोपीय खिलाड़ियों पर क्या असर पड़ेगा?
गुरप्रीत ने बताया कि यूरोपीय खिलाड़ी पहले ही सालाना 50 से 60 मुकाबले खेलते हैं, इसलिए विश्व कप के विस्तार से उनके शारीरिक और मानसिक दबाव में और इजाफा हो सकता है। उनका मानना है कि फीफा यह निर्णय खिलाड़ियों के कार्यभार को ध्यान में रखकर लेगा।
भारत फीफा विश्व कप में कब खेल सकता है?
गुरप्रीत सिंह संधू के अनुसार, भारत के विश्व कप में खेलने का सपना तभी साकार होगा जब टीम एशियाई स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करे और अपनी रैंकिंग में सुधार लाए। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है — धैर्य और निरंतर सुधार ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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