फीफा विश्व कप 2026: रॉबिन सिंह बोले — फ्रांस चैंपियन बनेगा, भारत केप वर्डे से ले सबक
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व स्ट्राइकर रॉबिन सिंह ने 10 जुलाई 2026 को कहा कि फ्रांस इस बार फीफा विश्व कप 2026 का खिताब अपने नाम कर सकती है, और साथ ही यह भी जोड़ा कि भारतीय फुटबॉल टीम को पहली बार विश्व कप खेल रहे केप वर्डे जैसे छोटे देश से प्रेरणा लेनी चाहिए। जी5 पर फीफा विश्व कप 2026 के विशेषज्ञ पैनल में शामिल रॉबिन ने एक खास बातचीत में फ्रांस की टीम की गहराई, मेसी की प्रतिभा और भारत के फुटबॉल भविष्य पर बेबाक राय रखी।
फ्रांस की ताकत: स्टार्टिंग इलेवन से कहीं आगे
रॉबिन सिंह ने कहा, 'फ्रांस फीफा विश्व कप 2026 का खिताब जीतने के लिए पूरी तरह तैयार है। 2022 के फाइनल में अर्जेंटीना से मिली हार ने टीम में जीत की भूख और बढ़ा दी है।' उनके अनुसार, इस साल फ्रांस ने टीम में असाधारण गहराई बनाई है — अटैक में डेम्बेले, मिडफील्ड में कोन और रैबियोट, डिफेंस में थियो हर्नांडेज और जूल्स कौंडे। माइकल ओलिस एक नए रोल में प्रभावशाली प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि टचौमेनी और कांटे जैसे खिलाड़ी नियमित शुरुआती एकादश में भी नहीं हैं।
रॉबिन ने कहा, 'फ्रांस की ताकत उनकी स्टार्टिंग इलेवन से कहीं ज़्यादा है।' उन्होंने कोच डिडिएर डेसचैम्प्स का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब डेसचैम्प्स इसे अपना आखिरी टूर्नामेंट बता रहे हैं, तो पूरी टीम में एक अलग जोश भर जाता है। काइलियन एम्बाप्पे के सामने झुकती डेसचैम्प्स की आइकॉनिक तस्वीर कोच और खिलाड़ी के बीच आपसी सम्मान को दर्शाती है — और यह सम्मान पूरी टीम में फैल रहा है। उन्होंने कहा, 'यह गुणवत्ता, एकता और 2022 के फाइनल की हार के दंश का संयोजन है। एक घायल शेर बेहद खतरनाक होता है।'
मेसी की महानता: आँकड़ों से परे
अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी के बारे में रॉबिन सिंह ने कहा कि उनके पास 'ईश्वर-प्रदत्त प्रतिभा' है जो उन्हें इतिहास के लगभग हर फुटबॉलर से अलग करती है। उनका विजन, बुद्धिमत्ता और गेंद पर नियंत्रण उन्हें मैच को ऐसे तरीके से प्रभावित करने की क्षमता देता है जो बहुत कम खिलाड़ी कर पाते हैं।
उन्होंने कहा, 'हम सभी को शुक्रगुजार होना चाहिए कि हमें उन्हें 20 साल तक खेलते देखने का मौका मिला। मेसी और रोनाल्डो के बीच कोई फर्क नहीं — दोनों असाधारण हैं। मेसी को इसलिए अलग किया जाता है क्योंकि उन्हें अकेले ही खेल पलटने की दैवीय क्षमता मिली है।' हालाँकि रॉबिन ने यह भी कहा कि पिछले कुछ मैचों के बाद अर्जेंटीना के आगे बढ़ने पर उनके मन में सवाल हैं, लेकिन जब मेसी साथ हों तो अर्जेंटीना को कभी कमज़ोर नहीं आँका जा सकता।
भारत के लिए केप वर्डे और जापान का सबक
रॉबिन सिंह ने केप वर्डे की कहानी को भारतीय फुटबॉल के लिए एक प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा, 'फीफा विश्व कप में छोटे देशों के प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि विश्वास, योजना और लगातार निवेश से पारंपरिक रूप से मज़बूत टीमों से अंतर कम किया जा सकता है।' उनके अनुसार, तथाकथित बड़े और बाकी देशों के बीच की खाई सिकुड़ रही है — और भारत को या तो इस बदलाव के साथ आगे बढ़ना होगा, या पीछे छूट जाना होगा।
उन्होंने जापान के दशकों पुराने फुटबॉल विजन को भारत के लिए आदर्श मॉडल बताया। रॉबिन ने कहा, 'जापान का एक मिशन 100 वर्ल्ड कप था, जो बाद में मिशन 50 बन गया क्योंकि वे बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहे थे। यह सिर्फ विश्व कप में खेलने के बारे में नहीं था — उन्होंने युवाओं में फुटबॉल के प्रति प्यार जगाया।'
भारत का तत्काल लक्ष्य: पहले एशिया में जगह बनाएँ
रॉबिन सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत का तात्कालिक लक्ष्य सीधे विश्व कप क्वालिफिकेशन नहीं, बल्कि एशिया के एलीट समूह में जगह बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'एशिया को जीतना कहीं ज़्यादा ज़रूरी है। ऐसा नहीं होगा कि आप हर तीन साल में उठें और कहें कि हमें विश्व कप खेलना है — विश्व-स्तरीय खिलाड़ी बनाने के लिए हर चार साल में क्वालिफिकेशन कैंपेन की तैयारी से कहीं ज़्यादा की ज़रूरत है।'
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि फुटबॉल केवल मैदान पर होने वाली चीज़ नहीं है — इंफ्रास्ट्रक्चर, युवा विकास और दीर्घकालिक संस्थागत विजन ही असली नींव है। नॉर्वे और इंग्लैंड के बीच होने वाले मैच को रॉबिन ने कठिन बताया, और नॉर्वे के स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड के टूर्नामेंट में अब तक के प्रदर्शन को असाधारण करार दिया। भारतीय फुटबॉल की यात्रा लंबी है, लेकिन रॉबिन का संदेश साफ है — सही लोग, सही विजन और निरंतर प्रयास से यह सपना नामुमकिन नहीं।