16 जुलाई 2026
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जम्मू-कश्मीर नार्को-टेरर मॉड्यूल: अदालत ने पाक समर्थित सिंडिकेट के 10 आरोपियों पर आरोप तय करने का आदेश दिया

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जम्मू-कश्मीर नार्को-टेरर मॉड्यूल: अदालत ने पाक समर्थित सिंडिकेट के 10 आरोपियों पर आरोप तय करने का आदेश दिया

सारांश

जम्मू-कश्मीर में नार्को-टेररिज्म के खिलाफ बड़ी कानूनी जीत — विशेष अदालत ने पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नार्को-टेरर सिंडिकेट के 10 आरोपियों पर UAPA और NDPS के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। LoC पार से ड्रग तस्करी कर आतंकी नेटवर्क को वित्त पोषण देने का यह मामला अक्टूबर 2022 में दर्ज हुआ था।

मुख्य बातें

विशेष अदालत ने 16 जुलाई 2026 को पाकिस्तान समर्थित नार्को-टेरर सिंडिकेट के 10 गिरफ्तार आरोपियों पर आरोप तय करने का आदेश दिया।
मामला अक्टूबर 2022 में एफआईआर संख्या 19/2022 के तहत SIA कश्मीर में दर्ज हुआ था।
जांच में 16 आरोपियों की पहचान हुई, जिनमें 4 पाकिस्तान/PoK स्थित घोषित भगोड़े आतंकी संचालक शामिल हैं।
आरोपियों पर NDPS अधिनियम 1985, UAPA 1967 और IPC की गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय होंगे, जिनमें भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ने का आरोप भी शामिल है।
SIA ने 6 विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किए; मुश्ताक अहमद मलिक उर्फ राही मुठभेड़ में मारा जा चुका है, सगीर अहमद पोसवाल अभी फरार है।
UAPA के तहत आतंकी गतिविधियों से जुड़ी संपत्तियों की जब्ती और कुर्की की प्रक्रिया जारी है।

जम्मू-कश्मीर में नार्को-टेररिज्म के खिलाफ एक निर्णायक कदम उठाते हुए एक सक्षम विशेष अदालत ने 16 जुलाई 2026 को राज्य जांच एजेंसी (SIA) कश्मीर द्वारा दर्ज मामले में पाकिस्तान समर्थित नार्को-टेरर सिंडिकेट के 10 गिरफ्तार आरोपियों पर आरोप तय करने का आदेश दिया। अदालत के इस आदेश से श्रीनगर में मुकदमे की विधिवत सुनवाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला अक्टूबर 2022 में पुलिस स्टेशन SIA कश्मीर में एफआईआर संख्या 19/2022 के तहत दर्ज किया गया था। SIA की जांच के अनुसार, प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में बैठे संचालकों ने एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत नशीले पदार्थों की तस्करी को आतंकी वित्त पोषण के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। नियंत्रण रेखा (LoC) के पार से मादक पदार्थों की तस्करी कर अर्जित धन का उपयोग जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी नेटवर्क को सक्रिय रखने, आतंकियों को आर्थिक सहायता पहुँचाने और आतंकी ढाँचे को बनाए रखने में किया जा रहा था।

आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी

विस्तृत जांच के दौरान SIA ने इस नेटवर्क से जुड़े कुल 16 आरोपियों की पहचान की, जिनमें चार पाकिस्तान/PoK स्थित आतंकी संचालक भी शामिल हैं। अब तक जिन 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, उनके नाम हैं — रुबीना नजीर मलिक, इश्फाक अहमद मीर, मुदस्सिर अहमद पोसवाल, सफीर अहमद मुगल, मोहम्मद राशिद ठक्कर, मोहम्मद रियाज लोहार, जाविद इकबाल ठक्कर उर्फ राजा ठक्कर, अब्दुल राशिद मीर, अब्दुल राशिद भट और बशारत अली पोसवाल

एक अन्य आरोपी सगीर अहमद पोसवाल फिलहाल फरार है। पाकिस्तान और PoK में छिपे चार आरोपी — तारिक अहमद मलिक उर्फ दिलावर, अलिफ-उद-दीन बडाना, मुश्ताक अहमद नाइक उर्फ उस्मान भाई और फिरदौस अहमद डार उर्फ उमर डार — घोषित भगोड़े हैं। मामले का एक अन्य आरोपी मुश्ताक अहमद मलिक उर्फ राही पहले ही एक मुठभेड़ में मारा जा चुका है।

अदालत का आदेश और लगाए गए आरोप

विशेष अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद उपलब्ध 10 आरोपियों के खिलाफ NDPS अधिनियम 1985, गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) 1967 और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। इनमें भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, युद्ध की साजिश रचने, आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने, आतंकी संगठनों के लिए धन जुटाने, आपराधिक साजिश, साक्ष्य नष्ट करने और जालसाजी जैसे संगीन आरोप शामिल हैं।

SIA कश्मीर ने इस मामले में सभी 16 आरोपियों के खिलाफ छह विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किए हैं। जांच के दौरान एजेंसी ने तीन घोषित अपराधियों को भी गिरफ्तार किया, जो लंबे समय से फरार चल रहे थे।

एसआईए की प्रतिबद्धता और आगे की कार्रवाई

SIA कश्मीर ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान और PoK में छिपे फरार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही UAPA के तहत आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ी संपत्तियों को जब्त और कुर्क करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। एजेंसी ने कहा कि आरोप तय होने का आदेश जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों की मजबूती को दर्शाता है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर में नार्को-टेररिज्म के विरुद्ध केंद्र और राज्य एजेंसियों की संयुक्त मुहिम तेज हो रही है। अब अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज किए जाएंगे, जो इस मुकदमे की अगली निर्णायक कड़ी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न्यायिक प्रक्रिया की गति पर सवाल उठाता है। पाकिस्तान और PoK में बैठे चार घोषित भगोड़े आरोपियों के बिना मुकदमा अधूरा रहेगा, और उन्हें भारतीय न्यायालय के समक्ष लाना व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव है। असली परीक्षा यह है कि UAPA और NDPS के तहत दर्ज ये आरोप अदालत में साक्ष्य के स्तर पर कितने मजबूत साबित होते हैं — क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में दोषसिद्धि दर ऐतिहासिक रूप से अपेक्षाओं से कम रही है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर नार्को-टेरर मॉड्यूल मामला क्या है?
यह अक्टूबर 2022 में SIA कश्मीर द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 19/2022 से जुड़ा मामला है, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तान/PoK स्थित संचालकों पर LoC पार से नशीले पदार्थों की तस्करी कर उससे अर्जित धन से जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को वित्त पोषित करने का आरोप है। SIA ने 16 आरोपियों की पहचान कर 6 आरोपपत्र दाखिल किए हैं।
किन आरोपियों पर आरोप तय किए जाएंगे?
विशेष अदालत ने 10 गिरफ्तार आरोपियों — रुबीना नजीर मलिक, इश्फाक अहमद मीर, मुदस्सिर अहमद पोसवाल, सफीर अहमद मुगल, मोहम्मद राशिद ठक्कर, मोहम्मद रियाज लोहार, जाविद इकबाल ठक्कर, अब्दुल राशिद मीर, अब्दुल राशिद भट और बशारत अली पोसवाल — पर आरोप तय करने का आदेश दिया है। चार अन्य आरोपी पाकिस्तान/PoK में घोषित भगोड़े हैं।
आरोपियों पर कौन-सी धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं?
आरोपियों पर NDPS अधिनियम 1985, UAPA 1967 और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराएँ लगाई गई हैं। इनमें भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आतंकी संगठनों के लिए धन जुटाने, आपराधिक साजिश और साक्ष्य नष्ट करने जैसे संगीन आरोप शामिल हैं।
इस मामले में पाकिस्तान की भूमिका क्या बताई गई है?
SIA की जांच के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तान और PoK में बैठे संचालकों ने LoC पार से नशीले पदार्थों की तस्करी का एक संगठित नेटवर्क खड़ा किया। तस्करी से अर्जित धन का उपयोग जम्मू-कश्मीर में आतंकी ढाँचे को बनाए रखने और आतंकियों को आर्थिक सहायता पहुँचाने में होता था।
आगे मुकदमे में क्या होगा?
अदालत के आरोप तय करने के आदेश के बाद अब अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगा। साथ ही UAPA के तहत आतंकी गतिविधियों से जुड़ी संपत्तियों की जब्ती और कुर्की की प्रक्रिया भी जारी है, और पाकिस्तान/PoK में छिपे भगोड़े आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अलग से चलती रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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