एनआईए की बड़ी कार्रवाई: लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नार्को-टेरर नेटवर्क की अमृतसर संपत्ति कुर्क
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 17 जून 2025 को लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर नेटवर्क के विरुद्ध ठोस कदम उठाते हुए अमृतसर के होली सिटी, होली एन्क्लेव फेज-1 स्थित मकान संख्या-33 को कुर्क कर लिया। यह कार्रवाई सालाया ड्रग जब्ती मामले के तहत गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 25(1) के अंतर्गत की गई है। एजेंसी ने इस संपत्ति को आतंकवाद से अर्जित संपत्ति घोषित किया है।
कार्रवाई का ब्योरा
एनआईए की टीम ने स्वतंत्र गवाहों और स्थानीय प्रशासन की उपस्थिति में कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए यह कुर्की संपन्न की। जांच एजेंसी के अनुसार, यह संपत्ति मुख्य आरोपी अंकुश कपूर के पिता के नाम पर पंजीकृत है। अंकुश कपूर को भारत में सक्रिय इस नार्को-टेरर नेटवर्क का प्रमुख संचालक बताया जा रहा है।
नेटवर्क का अंतरराष्ट्रीय विस्तार
एनआईए की जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के तार इटली, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान समेत कई देशों से जुड़े हैं। अंकुश कपूर के संबंध दुबई में बैठे एक ऐसे आरोपी से पाए गए, जिसका सीधा जुड़ाव प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से था। पिछले वर्ष गिरफ्तार किए गए अंकुश की भूमिका मादक पदार्थों की तस्करी, परिवहन, भंडारण, वितरण और आतंकवाद से संबंधित वित्तीय लेन-देन में महत्वपूर्ण मानी गई है।
ड्रग मनी से आतंकी फंडिंग
जांच में खुलासा हुआ कि मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित धन का उपयोग भारत में आतंकवादी गतिविधियों को वित्तीय सहायता देने के लिए किया जा रहा था। इसके लिए एक जटिल और सुनियोजित वित्तीय नेटवर्क का सहारा लिया जा रहा था। यह ऐसे समय में सामने आया है जब सीमा-पार नार्को-टेरर गठजोड़ राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए प्राथमिकता का विषय बना हुआ है।
आरोपियों पर कानूनी शिकंजा
एनआईए पहले ही अंकुश कपूर के विरुद्ध आतंकवादी फंडिंग, आपराधिक षड्यंत्र और गैरकानूनी आतंकी नेटवर्क को सहयोग देने के आरोपों में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। उस पर एनडीपीएस अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत भी मामला दर्ज है। इस पूरे मामले में अब तक 26 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं, जबकि जांच अभी जारी है।
आगे की राह
एनआईए ने स्पष्ट किया है कि यह कुर्की भारत में आतंकवादी गतिविधियों को पोषित करने वाले वित्तीय और लॉजिस्टिक ढाँचे को पूरी तरह ध्वस्त करने के उसके निरंतर अभियान का हिस्सा है। गौरतलब है कि सालाया मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और आने वाले समय में और कार्रवाइयों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।