12 सितंबर 2026
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NIA की जम्मू-कश्मीर में 10 ठिकानों पर छापेमारी, लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी सीमापार आतंकी साजिश का भंडाफोड़

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NIA की जम्मू-कश्मीर में 10 ठिकानों पर छापेमारी, लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी सीमापार आतंकी साजिश का भंडाफोड़

सारांश

NIA ने जम्मू-कश्मीर के 5 ज़िलों में 10 ठिकानों पर छापेमारी कर लश्कर-ए-तैयबा के सीमापार आतंकी नेटवर्क पर शिकंजा कसा। 31 मार्च को OGW की गिरफ्तारी से शुरू हुई जांच अब हथियार सप्लाई चेन, फाइनेंशियल ट्रेल और पाकिस्तानी हैंडलर्स तक पहुँच गई है — यह OGW नेटवर्क के ख़िलाफ़ NIA की हालिया सबसे बड़ी कार्रवाई है।

मुख्य बातें

NIA ने 12 सितंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर के 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
कार्रवाई लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी सीमापार आतंकी साजिश और OGW नेटवर्क के सिलसिले में हुई।
कुपवाड़ा , कुलगाम , बांदीपोरा , बारामूला और सोपोर में छापेमारी की गई।
31 मार्च को चेकपॉइंट पर OGW की गिरफ्तारी से मामले की शुरुआत हुई; हैंड ग्रेनेड और कारतूस बरामद हुए।
मामला UA(P) एक्ट , आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के तहत दर्ज है।
NIA फाइनेंशियल ट्रेल और हथियार सप्लाई चेन की जांच कर रही है; और गिरफ्तारियाँ संभव।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शनिवार, 12 सितंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर के 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स और उनके स्थानीय 'ओवरग्राउंड वर्कर्स' (OGW) नेटवर्क से जुड़ी एक बड़ी सीमापार आतंकी साजिश के सिलसिले में की गई। जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने इस अभियान में NIA की सहायता की।

कहाँ-कहाँ हुई छापेमारी

तलाशी अभियान कुपवाड़ा, कुलगाम, बांदीपोरा, बारामूला और सोपोर समेत कई संवेदनशील ज़िलों में चलाया गया। इन स्थानों पर उन लोगों की गतिविधियों की पड़ताल की गई, जो कथित तौर पर घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों को लॉजिस्टिक सहायता, पनाह और रेकी जैसी सुविधाएँ मुहैया करा रहे थे।

मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला 31 मार्च की देर रात एक चेकपॉइंट पर हुई गिरफ्तारी से शुरू हुआ, जब लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक कथित ओवरग्राउंड वर्कर को पकड़ा गया। उसके पास से एक हैंड ग्रेनेड और जिंदा कारतूस बरामद हुए थे। शुरुआत में जकूरा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई, जिसे बाद में NIA ने अपने हाथ में लेते हुए गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 23, आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 7 और 25, और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट, 1908 की धारा 4 के तहत पुनः दर्ज किया।

जांच में अब तक क्या सामने आया

आगे की जांच में साजिश से जुड़े पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई और स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क के सदस्यों की पहचान की गई। अधिकारियों के अनुसार, इन स्थानीय सहयोगियों का इस्तेमाल घुसपैठियों से संपर्क, उनकी आवाजाही, उन्हें छिपाने, रेकी और अन्य लॉजिस्टिकल मदद के लिए किया जा रहा था। गौरतलब है कि यह जम्मू-कश्मीर में LeT से जुड़े OGW नेटवर्क के ख़िलाफ़ NIA की हालिया महीनों में सबसे व्यापक कार्रवाइयों में से एक है।

वित्तीय और हथियार सप्लाई चेन की जांच

NIA वर्तमान में पूरे नेटवर्क के दायरे और गतिविधियों को समझने के लिए फाइनेंशियल ट्रेल, संचार के तरीकों, आरोपियों की आवाजाही के पैटर्न और हथियारों एवं विस्फोटकों की सोर्सिंग व सप्लाई चेन की गहन पड़ताल कर रही है। शनिवार की तलाशी के दौरान मामले से जुड़े अतिरिक्त आपत्तिजनक सामान भी जब्त किए गए, जिनका पहले से एकत्र साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है।

आगे क्या कार्रवाई संभव

NIA साजिश में शामिल सभी तत्वों की पहचान और उनकी सटीक भूमिकाओं का निर्धारण करने के लिए जांच जारी रखे हुए है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे गिरफ्तारियाँ और बरामदगियाँ होने की संभावना है। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब सीमापार आतंकवाद को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता पहले से काफ़ी बढ़ा दी गई है, और OGW नेटवर्क को ध्वस्त करना प्राथमिकता बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि स्थानीय लॉजिस्टिक सपोर्ट पर निर्भर है। NIA की यह कार्रवाई व्यापक है, लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी जब फाइनेंशियल ट्रेल के ज़रिए फंडिंग स्रोतों तक पहुँचा जा सके। पिछले कई मामलों में OGW गिरफ्तारियाँ तो हुईं, लेकिन हैंडलर नेटवर्क अक्षुण्ण रहा। इस बार हथियार सप्लाई चेन और संचार पैटर्न की एक साथ जांच से यह उम्मीद की जा सकती है कि जांच सतही न रहकर ढाँचागत स्तर तक पहुँचे।
RashtraPress
12 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NIA ने जम्मू-कश्मीर में किन ज़िलों में तलाशी ली?
NIA ने कुपवाड़ा, कुलगाम, बांदीपोरा, बारामूला और सोपोर समेत जम्मू-कश्मीर के 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। ये सभी स्थान सीमापार आतंकी साजिश में संदिग्ध OGW गतिविधियों से जुड़े हैं।
इस मामले की शुरुआत कैसे हुई?
31 मार्च की देर रात एक चेकपॉइंट पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कथित ओवरग्राउंड वर्कर को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से हैंड ग्रेनेड और जिंदा कारतूस बरामद हुए। इसके बाद जकूरा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज हुई, जिसे बाद में NIA ने अपने हाथ में लिया।
ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) क्या होते हैं?
ओवरग्राउंड वर्कर वे स्थानीय लोग होते हैं जो आतंकवादी संगठनों को ज़मीनी स्तर पर सहायता प्रदान करते हैं — जैसे घुसपैठियों को पनाह, रेकी, संचार और लॉजिस्टिक मदद। ये सशस्त्र आतंकवादी नहीं होते लेकिन आतंकी ढाँचे का अहम हिस्सा माने जाते हैं।
इस मामले में किन कानूनों के तहत केस दर्ज है?
NIA ने यह मामला गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 23, आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 7 और 25, और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट, 1908 की धारा 4 के तहत दर्ज किया है।
आगे क्या कार्रवाई होने की संभावना है?
NIA फाइनेंशियल ट्रेल, हथियार सप्लाई चेन और संचार पैटर्न की जांच जारी रखे हुए है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर और गिरफ्तारियाँ तथा बरामदगियाँ होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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