लश्कर-ए-तैयबा की पुरानी रणनीति वापस: 10 दिनों में दो हमले, TRF के ज़रिए नागरिकों पर निशाना
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर में 10 दिनों के भीतर दो आतंकी हमले हुए हैं — पहला अनंतनाग में और दूसरा कुलगाम में। खुफिया एजेंसियों ने पुष्टि की है कि दोनों हमले लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के छद्म संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) की साजिश हैं। अधिकारियों के अनुसार, लश्कर अपनी दशकों पुरानी रणनीति को फिर से सक्रिय कर रहा है, जिसमें सहयोगी संगठनों की आड़ में कश्मीर घाटी में आम नागरिकों को निशाना बनाया जाता है।
मुख्य घटनाक्रम
जांचकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि अनंतनाग हमले के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें 'यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल' को जिम्मेदार ठहराया गया था। हालाँकि, अधिकारियों ने इसे लश्कर-ए-तैयबा का ध्यान भटकाने का हथकंडा बताया। एजेंसियाँ इन हमलों में लश्कर के एक सक्रिय सदस्य लतीफ की भूमिका की जाँच कर रही हैं।
लतीफ ने लश्कर कमांडर जाकिर गनई के साथ मिलकर अनंतनाग, शोपियां और कुलगाम में हमले अंजाम दिए थे। गनई बाद में कुलगाम में एक सुरक्षा अभियान में मारा गया, लेकिन लतीफ फरार होने में सफल रहा।
रणनीति में बदलाव: पिस्तौल, गुमनाम भर्ती, सिलसिलेवार हमले
खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार, लतीफ ने ये हमले यह संदेश देने के लिए किए कि घाटी में उसका संगठन अभी भी सक्रिय है। उसकी योजना दक्षिण कश्मीर में कम तीव्रता वाले, अचानक किए जाने वाले हमलों की श्रृंखला चलाने की है।
अधिकारियों ने बताया कि लश्कर ने अपने सदस्यों को एके-47 की जगह पिस्तौल ले जाने का निर्देश दिया है, क्योंकि पिस्तौल आसानी से छिपाई जा सकती है और संदेह कम उत्पन्न करती है। इसके अलावा, संगठन ऐसे व्यक्तियों की भर्ती कर रहा है जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिन्हें सिर्फ एक बार हमला करके गायब हो जाना होगा — इससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए इन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
निशाने पर कौन
अधिकारियों के अनुसार, कुलगाम हमले में प्रवासी श्रमिकों को निशाना बनाया गया — यह लश्कर की उस पुरानी रणनीति की याद दिलाता है जिसमें गैर-स्थानीय लोगों में भय फैलाकर उन्हें जम्मू-कश्मीर छोड़ने पर मजबूर किया जाता था। कश्मीरी पंडित, धार्मिक अल्पसंख्यक और प्रवासी मज़दूर इस समय प्राथमिक लक्ष्य हैं।
गौरतलब है कि कुलगाम हमला आतंकवादी समर्थित चैनलों द्वारा धमकी भरे संदेश और हत्यारों की सूचियाँ प्रसारित किए जाने के ठीक दो दिन बाद हुआ। अधिकारियों का कहना है कि हमले उन इलाकों में किए जा रहे हैं जहाँ सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत कमज़ोर है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती
अधिकारियों का मानना है कि कड़ी सुरक्षा के कारण लश्कर अब सैन्य प्रतिष्ठानों और संवेदनशील इमारतों में घुसपैठ करने में असमर्थ है। इसीलिए संगठन ने नागरिक लक्ष्यों की ओर रुख किया है। नियमित अंतराल पर छोटे-छोटे हमले करके एक बड़ा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पैदा करना लश्कर का मौजूदा उद्देश्य बताया जा रहा है।
आगे क्या
अधिकारियों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा को उम्मीद है कि इन हमलों से घाटी में उसकी स्थिति मज़बूत होगी और भर्ती अभियान को भी बल मिलेगा। सुरक्षा एजेंसियाँ इन हमलों के पैटर्न की निगरानी कर रही हैं और दक्षिण कश्मीर में चौकसी बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लश्कर सुरक्षा बलों को भी निशाना बनाने की फ़िराक में है।